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क्या है पैंगोंग झील का इतिहास ?

Janprahar Desk
22 May 2020 10:30 AM GMT
क्या है पैंगोंग झील का इतिहास ?
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पैंगोंग झील का नाम सुनते ही भारत-चीन जंग याद आ जाती है। साल 1962 में दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रही ये पैंगोंगे झील। बता दें कि तिब्बती में सो का अर्थ

पैंगोंग झील का नाम सुनते ही भारत-चीन जंग याद आ जाती है। साल 1962 में दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रही ये पैंगोंगे झील। बता दें कि तिब्बती में सो का अर्थ झील होता है। 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित एक लंबी, संकरी और गहरी झील पैंगोंगे सो या झील कह लाती है। ये सो लद्दाख में स्थित है। ये चारों तरफ से जमीन से घिरी हुई है। ये झील दोनों देशों के बीच रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों ही देश इस सो में पट्रोलिंग करते रहते हैं।

सो से किया था चीन ने मुख्य हमला-

चीनी सेना ने 1962 में पैंगोंग सो से ही भारत पर आक्रमण किया था। जब से ये झील बहुत ही सुखियों पर रहती है। साल 2017, अगस्त में पैंगोंग के किनारे भारत-चीन सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी। दोनों ओर से जमकर लात-घूसे चले थे।

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पैंगोंग सो झील पर रणनीतिक

ये झील चुशुल अप्रोच के रास्ते में पड़ती है। कहा जाता है कि अगर चीन कभी-भी भारत पर हमले की कोशिश करता है तो वो चुशुल अप्रोच का इस्तेमाल जरूर करेंगा क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व बेहद अहम है। आपको बता दें कि पैंगोंग सो लेह के दक्षिणपूर्व में 54 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस झील की लंबाई 134 किलोमीटर है। ये झील 604 वर्ग किलोमीटर के दायर में फैली हुई है। जहां इस सो की चौड़ाई ज्यादा है, वहां इसकी चौड़ाई 6 किलोमीटर है।

पैंगोंग झील तिब्बत से लेकर भारतीय क्षेत्र तक फैली है। इसका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है। इसके 89 किलोमीटर हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। वहीं झील के 45 किलोमीटर पश्चिमी हिस्से हिस्से पर भारत का नियंत्रण है। आपको बता दें कि पैंगोंग सो झील 14,270 फीट मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दी के मौसम ये इस क्षेत्र का तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है। जिससे ये झील पूरी तरह से जम जाती है।

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