गरीब मुल्कों में इंसानों के लिए वैक्सीन नहीं और अमीर देशों में जानवरों को लग रहा टीका

 
Vaccination of animal

कोरोना से बचने के लिए अभी तक कई गरीब देशों में इंसानों को वैक्सीन की डोज ढंग से नहीं लग पा रही है। वहीं, कुछ ऐसे अमीर देश है जो जरूरत से ज्यादा वैक्सीन खरीदकर अब अपने जानवरों को टीका लगा रहे है। आवर वर्ल्ड इन डाटा ने अभी हाल ही में दुनिया में कुल टिकाकरण को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक गरीब मुल्कों में अभी तक सिर्फ एक फीसदो वैक्सीनेशन ही हो पाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक टिकाकरण में गरीब मुल्कों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत ही है। पूरी दुनिया की 23 फीसदी आबादी को कोरोना की सिंगल डोज लग चुकी है लेकिन कम आय वाले मुल्कों पहली डोज की ही मात्रा एक फीसदी से भी कम है। इन गरीब देशों की लिस्ट में लैटिन अमेरिका और अफ्रीका शामिल है। 

पीपुल्स वैक्सीन अलायंस की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया मे अमीर देशों की आबादी 14 प्रतिशत ही है लेकिन इन देशों में अपनी आबादी से 53 प्रतिशत अधिक खुराकें खरीदकर सुरक्षित रख ली है। इन देशों में ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश शामिल है। मसलन गरीब देशों में टीके की आपूर्ति ठीक से नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा ने तो अपनी आबादी से 5 गुना अधिक खुराकें जमा कर ली है। यही कारण है कि गरीब देश टीके के हक से वंचित रह जा रहे है। 

अमेरिका ने तो आपने देश की आबादी के 65 प्रतिशत हिस्से को पहली डोज लगा दी है। अमेरिका का लक्ष्य है कि साल के अंत तक 80 प्रतिशत जनता को दोनों टीके लग जाए। अमेरिका ने इतने ज्यादा टीके जमा कर लिए है कि वह अब जानवरों का टीकाकरण कर रहा है। 

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रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के ऑकलैंड में जानवरों को टीका लगना शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अभियान के तहत सैन फ्रांसिस्को बे एरिया के चिड़ियाघर में बाघ, भालू और गंधबिलाव को कोरोना रोधी टीके लगाए गए। न्यू जर्सी में पशु दवा कंपनी जोएटिस ये टीका विकसित कर दान किया है।

फिलहाल में बाघ, पहाड़ी शेर, गंध बिलाव काले और भूरे भालू को टीके की पहली खुराक दी गई है। बाद में अन्य जानवरों का टिकाकरण भी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार जानवरों के लिए टीका बनाने वाली कंपनी ने 11 हजार से अधिक वैक्सीन की खुराक दान की है। यहां के चिड़ियाघर का कोई भी जानवर संक्रमित नहीं है, लेकिन एहतियातन उन्हें खुराकें लगाई जा रही है।

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