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सनकी तानाशाह किंग जोंग की तानाशाही ने बच्चो को भी नहीं छोड़ा।

Janprahar Desk
26 Jun 2020 5:38 PM GMT
सनकी तानाशाह किंग जोंग की तानाशाही ने बच्चो को भी नहीं छोड़ा।
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दोस्तों स्कूल टाइम वो टाइम होता है जब बच्चे हर तरह से ग्रो करता है हमें स्कूल में हर वो चीज सिखाई जाती है जो हमें जिंदगी जीने में आगे काम आने वाली है या फिर आप ऐसा ही कह लीजिए कि जिंदगी की सबसे अहम नीव हमारे स्कूल में बढ़ती है। जहां हम कुछ ऐसी बातें सीखते हैं वह जिंदगी भर हमारे साथ रहती हैं और सबसे जरूरी बात हम वहां पर अनुशासन सीखते हैं। हालांकि हर स्कूल के अनुशासन अलग होते हैं और वहां के बच्चों को उन  अनुशासन का पालन करना जरूरी होता है।

लेकिन दोस्तों वैसे तो आप जानते है की नार्थ कोरिया एक ऐसा  देश है जिसके अपने नियम कायदे कानून है और ये नियम सबको मानने ही होते है और अगर कोई इन नियमो को नहीं मानता है तो उसे सज़ा दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते है की वहा के स्कूलों के भी कुछ अलग ही तरह के नियम काईदे कानून है और जिन्हे जो कोई भी जनता है या उनके बारे में पढ़ता है वो हैरान रहे जाता है और मै ये भी दावा कर सकती हु की इन्हे पढ़कर आप भी जरूर हैरान रहे जायेंगे।  तो आइये जानते है उन रूल्स के बारे में।

1. स्ट्रेंज बाथरूम रूल :-  जब किसी बच्चे को स्कूल का टॉयलेट यूज करना होता है तो वह सबसे पहले क्लास में अपने हाथ उठाता है और फिर टीचर से परमिशन लेकर तुरंत वॉशरूम की तरफ भागता है लेकिन नॉर्थ कोरिया का माजरा थोड़ा अलग है क्योंकि यहां पर बच्चे को हाथ उठाकर परमिशन तो मांगनी  होती है लेकिन उसके बाद उसे क्लास के रूम के वाशरूम को इस्तेमाल करना होता है। उसके साथ ही वाशरूम के अंदर कोई टिशू पेपर नहीं होता है आपको क्लास रूम के अंदर दीवार पर लटके टिशू पेपर को लेकर वॉशरूम के अंदर जाना होता है और यह जितना ज्यादा एम्बेरेसिंग होता है कि उतना ही ज्यादा अजीब होता है क्योंकि बच्चों के द्वारा लिया गया टिशू पेपर यदि खत्म हो गया तो उसके आसपास दोबारा मांगने का कोई चांस नहीं होता। पता नहीं नॉर्थ कोरिया ये रूल क्यों बनाया लेकिन शायद वो टिशू पेपर की बर्बादी नहीं चाहते थे।

2. आस्क ए क्वेश्चन:- हालांकि हर जगह पर तो ऐसा होता है कि बच्चों को जब कोई डाउट होता है तो वह तुरंत अपने टीचर से पूछ कर अपना डाउट क्लियर कर लेते हैं। लेकिन नॉर्थ कोरिया में ऐसा रूल नहीं है वहां पर क्लास खत्म होने के बाद ही बच्चों को अपने डाउट्स पूछने का राइट है क्योंकि अगर बच्चे क्लास के बीच में डाउट पूछते हैं तो यह माना जाता है कि टीचर के नॉलेज पर क्वेश्चन उठा रहे हैं।

3.टेक आउट द ट्रैश :- नॉर्थ कोरिया में बच्चों को शुरूसे ही रिस्पांसिबल बनाया जाता है ताकि वह अपने साथ-साथ अपने स्कूल की भी केयर कर सकें क्योंकि जहां जापान में बच्चे स्कूल के अंदर की सफाई करते हैं वही नॉर्थ कोरिया के बच्चे न सिर्फ स्कूल के अंदर की बल्कि स्कूल के बाहर के एरिया की साफ सफाई करते हैं ताकि स्कूल का माहौल स्वच्छ रहें और कोई गंदगी स्कूल के आसपास इकट्ठा ना हो पाए।

4. नो शूज :-जैसा कि हम और आप किसी के घर जाते हैं तो सबसे पहले रेस्पेक्ट में अपने जूते और चप्पल बाहर ही उतार देते हैं ताकि बाहर की गंदगी हम किसी और के घर में ना ले जा पाए। और सही में ऐसा ही रूल नॉर्थ कोरिया में भी है जहां पर बच्चों को स्कूल में एंटर करने से पहले उनके जूते बाहर ही उतरवा दिए जाते हैं और उन्हें अपने अलग से चप्पल लेकर आनी होते हैं जिसे उस स्कूल के अंदर एंटर कर सकते हैं और ऐसे ही रोज स्कूल स्टाफ के लिए भी  है ताकि बाहर की कोई भी गंदगी स्कूल के अंदर ना आ पाए। जिस दिन बच्चे अपने स्कूल स्लिपर्स लाना भूल जाते हैं उस दिन उन्हें पूरा समय मौजों में या फिर नंगे पांव में ही पूरे स्कूल में घूमना पड़ता है।

 5. एक्स्ट्रा लेसंस :- हर स्कूल की तरह नॉर्थ कोरिया में भी सुबह से लेकर दोपहर तक क्लासेज होती है और उसके बाद बाकी देशों में तो बच्चे अपने घर जाकर खेलने कूदने और आराम करने लगते हैं। लेकिन नॉर्थ कोरिया का ऐसा कोई रूल नहीं है वहां पर बच्चों की  सेकंड शिफ्ट में भी क्लास जारी रहती है जहां पर उन्हें रात तक पढ़ाई करनी पड़ती है और अगर सिलेबस ज्यादा ही जल्दी करवाना हो तो यह लोग बच्चों को दो-तीन घंटे का रेस्ट भी नहीं देते।

6.पनिशमेंट :-हम सभी जानते है की सभी बच्चे शैतान होते हैं और उन्हें थोड़ा बहुत सुधारने के लिए हर जगह पर पनिशमेंट दी जाती है लेकिन नॉर्थ कोरिया का अपना अलग ही सिस्टम है क्योंकि वहां पर हर स्कूल अपनी पनिशमेंट रूल अलग ही बनाता है जिस पर  बच्चो को चलना ही पड़ता है और कई बार इस वजह से बच्चों को तकलीफ उठानी पड़ती है क्योंकि कोई भी बच्चा ये नहीं चाहता कि वह शारीरिक या मानसिक तौर पर चोटिल हो इस वजह से कई बार वहा के बच्चों ने प्रोटेस्ट भी किया ताकि वह अपने टीचर्स के खिलाफ शिकायत कर सके और उन्हें स्कूल से निकलवा सके।

7. नो वेकेशन :-  जहां दुनिया भर में गर्मियों के समय में बच्चों को छुट्टियां दी जाती है ताकि वह आराम से वेकेशन बना सके वही नॉर्थ कोरिया में मार्च से सेशन स्टार्ट होता है और फरवरी के एंड तक चलता है जिससे बच्चों को कोई भी छुट्टियां नहीं मिल पाती और उन्हें गर्मियों के समय में भी वहां पर पढ़ने के लिए स्कूल जाना पड़ता है। हालांकि ये रूल दुनिया भर से थोड़ा अलग है लेकिन वहां के बच्चों को अब इसकी आदत हो गई है और सिर्फ और सिर्फ मेन मेन फेस्टिवल की छुट्टियां मिलती है वरना पूरा साल उनका स्कूल चलता रहता है।

तो दोस्तों नार्थ कोरिया के स्कूलो के इन नियमो को जानकर आपको भी हैरानी हुई न। दोस्तों अब आप सोच सकते है की आखिर हम जो अपने देश के स्कूलो को इतना बुरा कहते है वो कितना गलत है आप ज़रा सोचिये अगर हमारे देश में भी ऐसे ही रूल हो जाये तब आप क्या ही करेंगे ?

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