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विश्व की सबसे लम्बी सुरंग से देखिए कुदरत की खूबसूरती को!

Janprahar Desk
12 Aug 2020 9:10 PM GMT
विश्व की सबसे लम्बी सुरंग से देखिए कुदरत की खूबसूरती को!
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एक लम्बे इन्तजार के बाद हिमालय कि पीर-पन्जाल रेंज मे दस  हजार  फीट  की ऊंचाई पर “अटल टनल” बनकर  तैयार  है जिसे  प्रधानमंत्री अगले महीने राष्ट्र को समर्पित करेंगे।  जो विश्व की सबसे आधुनिक यातायात टनल होगी देश के सबसे खुबसूरत इलाके धुन्दी और लाहुल  मे इनका  प्रवेशद्वार खुलता है।

एक लम्बे इन्तजार के बाद हिमालय कि पीर-पन्जाल रेंज मे दस  हजार  फीट  की ऊंचाई पर “अटल टनल” बनकर  तैयार  है जिसे  प्रधानमंत्री अगले महीने राष्ट्र को समर्पित करेंगे।  जो विश्व की सबसे आधुनिक यातायात टनल होगी देश के सबसे खुबसूरत इलाके धुन्दी और लाहुल  मे इनका  प्रवेशद्वार खुलता है। जिससे  यात्रियों  के लिए मनाली  से सीधा  शीत  मरुस्थल लाहुल के लिए  रास्ता खुल जाएगा । हिमालय  कि  पीर-पन्जाल  चोटी के श्रेणियों  मे 10000 फीट  की ऊंचाई  पर स्थित विश्व की सबसे आधुनिक  और सबसे लम्बी यातायात टनल,प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर मे राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाएगा ।

लेह से मनाली तक को जोड़ने वाली ये टनल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल  बिहारी वाजपेयी के सम्मान मे रखा गया है।लगभग पाँच वर्ष लगे इस टनल को बनाने मे हालांकि इस देरी की वजह  इस सुरंग के उपर सेरी नदी  के जल रिसाव के कारण हुई। देर से ही सही लेकिन अब ये देश  का गर्व बनने  जा रहा है । 8.8 किलोमीटर इस लम्बी परियोजना की लागत चार  हजार करोड़  रुपये  है,जिसका निर्माण BRO  सीमा सड़क संगठन द्वारा किया गया है।इस परियोजना से सबसे ज्यादा  फायदा उन लोगो को होगा जो लाहूल और स्पिति  घाटी  के दूर क्षेत्रों मे रहते है और सबसे  अच्छी बात है कि यह सुरंग मौसम के प्रभाव से अछूता रहेगा,साथ ही मजबूत  भी ।

सुरंग के अंदर सभी सुविधाएँ उपलब्ध है,जैसे थोड़ी दूर के अन्तराल  पर सीसीटीवी कैमरे का होना,लाईट सेविंग सेंसर सिस्टम प्रदूषण  के रोकथाम के लिए  सेंसर सिस्टम का प्रबंध  है साथ ही आक्सीजन की सही मात्रा उपलब्ध रहे इसके लिए सुरंग की दोनो ओर हाई-कैपिसिटी  विंड  टर बाइन  सिस्टम  को लगाया  गया है ,और आग बूझाने  वाली मशीन के यंत्र  को स्थापित किया गया  है,जिससे अगर सुरंग के बीच  कोई दुर्घटना  घट  जाती  है तो आग पर नियन्त्रण पाया जा सकता है ।सुरंग  की एक और  खास  बात है वह यह कि उसमे एक वैकल्पिक सुरंग भी उपलब्ध है यह उस स्थिति  के लिए  बनाई  गई  है ,जिसमे अगर भीषण  आग के साथ  कोई अनहोनी  घटना  घट जाती है तो  उस वैकल्पिक  सुरंग से आसानी  से बाहर  आया जा सकता है।

जिसकी लम्बाई भी मुख्य  सुरंग की तरह 8.8 किलो मीटर है । सुरंग मे लाईट  सिस्टम  कुछ  इस तरह  से है की एक निश्चित  दूरी  पर गाड़ियों  के आते ही लाइट  अपने आप जल जायेंगी और वाहन से गुजरने के बाद अपने आप बन्द हो जाएगी। सुरंग के उत्तरी  दिशा मे बौद्ध  शैली  की स्वागत द्वार है। इस सुरंग के बनने  से कलन्ग  तक का  सफर  एक घन्टा  और लेह का सफर करीब 9 से 10 घन्टे का हो गया है। पहले के मुकाबले अब मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर  कम  हो जाएगी । बर्फ से ढके होने के कारण लाहूल घाटी पहले 6 महीने तक दुनिया से कटी रहती थी । अब देश  के साथ  घाटी  का सम्पर्क बना रहेगा बिजली गुल होने की भी अब दिक्कत नही  रहेगी क्युंकि  बिजली की लाइन  सुरंग  के अंदर से ही जा रही है ।

सुरंग का इतिहास 

इस सुरंग  को बनाए  जाने का निर्णय  3 जून  2000  को अटल बिहारी वाजपेयी  सरकार द्वारा लिया  गया  था जिसका शिलान्यास  खूद  अटल जी ने 2003 मे किया था। पहले इस टनल  का नाम रोहतांग दर्रे  रखा गया था जिसको बाद मे अटल बिहारी  वाजपेयी की 95  वी   जयंती ( 25 दिसम्बर 2019) को नाम बदलकर अटल  सुरंग  कर  दिया  गया  पीर  पन्जाल  की पूर्वी चोटियों  मे बना ये सुरंग दुनिया का सबसे लम्बा सुरंग है। हिमान्चल प्रदेश  के मुख्यमंत्री  ने ये जानकारी  दी है की, हालांकि कोरोना महामारी  के चलते  इसका काम मई  से रुका हुआ था लेकिन अब जो बचा हुआ काम है वो सितम्बर तक पूरा  हो जायेगा जिसके बाद प्रधानमंत्री इसका उदघाटन  कर राष्ट्र  को समर्पित करेंगे ।

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