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22 मई से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन करेंगे डब्ल्युएचओ (WHO) एग्जीक्यूटिव बोर्ड का नेतृत्व, भारत की भूमिका बढ़ी

Janprahar Desk
20 May 2020 9:15 AM GMT
22 मई से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन करेंगे डब्ल्युएचओ (WHO) एग्जीक्यूटिव बोर्ड का नेतृत्व, भारत की भूमिका बढ़ी
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Highlights- स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन डब्ल्युएचओ एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन 22 मई से पद के कर्तव्यों को निभाएंगे एक साल तक के लिए यह जिम्मेदारी उनकी कोरोना महाकाल में बुरी खबरें ही हर तरफ फैली दिखाई दे रहीं हैं। ऐसे में देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, हर चीज़ की जिम्मेदारी निभाने को तत्पर हैं।

Highlights-

  • स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन डब्ल्युएचओ एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन
  • 22 मई से पद के कर्तव्यों को निभाएंगे
  • एक साल तक के लिए यह जिम्मेदारी उनकी

कोरोना महाकाल में बुरी खबरें ही हर तरफ फैली दिखाई दे रहीं हैं। ऐसे में देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, हर चीज़ की जिम्मेदारी निभाने को तत्पर हैं। और इन्हीं बुरी खबरों में, भारत को विश्व भर में सफलता की सीढ़ी पर चढ़ाते हुए, वे ही अच्छी खबर के निमित बन गए हैं। अब वे सिर्फ़ भारत के स्वास्थ्य मंत्री नहीं रहे। बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एग्जीक्यूटिव बोर्ड का नेतृत्व करते दिखाई देंगे। वे पिछले अध्यक्ष रहे जापान के डॉ. हिरोकी नकतानी के पद की सभी कर्तव्यों का 22 मई से निर्वाह करें सकेंगे।

इस बोर्ड में कुल 34 सदस्य होते हैं। सबसे अनोखी बात यह है, की मंगलवार को डब्ल्यूएचओ के सभी 194 देशों ने उनके चेयरमैन बनने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अधिकारियों की मानें तो 22 मई को होने वाले बैठक में, हर्षवर्धन का चुनाव निश्चित है। वे एक साल के लिए इस बोर्ड का निरीक्षण करेंगे। दरअसल, पिछले साल साउथ-ईस्ट एशिया ग्रुप ने भारत को बोर्ड के सदस्य के रूप में तीन साल के पदावधि के लिए स्वीकृति दे दी थी।

हर साल बदलने वाले इस पद में, हर्ष वर्धन को बैठकों का मुख्य अंग बनकर रहना होगा। एग्जीक्यूटिव बोर्ड डब्ल्यूएचओ के फैसलों पर सही राय देकर उन्हें राह दिखाने की कोशिश करता है। जिन बैठकों के हर्ष वर्धन हिस्सा रहेंगे, वो सिर्फ़ साल में दो बार, जनवरी और मई में आयोजित होगा। इस बोर्ड का चुनाव वर्ल्ड हैल्थ असेम्बली द्वारा 3 सालों के लिए किया जाता है। इन्हीं सदस्यों में से कोई एक बोर्ड का चेयरमैन बनता है।

आपको बता दें कि डब्ल्युएचओ ने कोरोना को कैसे संभलकर सामना करने कि कोशिश की, इसकी निष्पक्ष जांच के लिए सभी सदस्य देशों ने बीते मंगलवार को हां कह दिया। इससे यह साफ होगा कि डब्ल्युएचओ कोरोना काल में सही कदम उठाने में कहां सक्षम रहा और कहां नहीं।

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