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ईरान और सऊदी अरब तक में तबलीगी जमात के घुसने पर भी रोक है तो भारत में क्यों नहीं ?

Janprahar Desk
14 April 2020 9:00 PM GMT
ईरान और सऊदी अरब तक में तबलीगी जमात के घुसने पर भी रोक है तो भारत में क्यों नहीं ?
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भारत में कोरोना वायरस फैला कर तबाही मचाने की साज़िश रचने वाली तबलीगी जमात विश्व के 213 देशों में अपनी पैठ रखने का दावा करती है। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज से दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए टोलियां भेजने का भी दावा किया जाता है। लेकिन यह भी

भारत में कोरोना वायरस फैला कर तबाही मचाने की साज़िश रचने वाली तबलीगी जमात विश्व के 213 देशों में अपनी पैठ रखने का दावा करती है। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज से दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए टोलियां भेजने का भी दावा किया जाता है। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि, इस्लाम के जनक सऊदी अरब और ईरान में तबलीगियों के घुसने तक पर भी पाबंदी है। भारत इस कट्टर जमात पर, जो दुनिया मे सिर्फ इस्लाम के राज का ख्वाब देखता है और जो मध्ययुगीन शरिया कानून चाहता है, कब प्रतिबंध लगाएगा और कब उसके मानने वाले विदेशियो का प्रवेश निषिद्ध करेगा , रहकर टके का सवाल देश की शांतिप्रिय जमात पूछ रही है ?

गौरतलब है कि, मौलाना इलियास कांधलवी ने 1927 में तबलीगी जमात का गठन किया था। ये देवबंदी विचारधारा से प्रेरित और मुसलमानों में हनफी संप्रदाय के मानने वाले हैं। इलियास कांधलवी पहली जमात दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात के मुस्लिम समुदाय लोगों को इस्लाम की मजहबी शिक्षा देने के लिए ले गये थे। इसके बाद से तबलीगी जमात का काम दुनिया के तमाम देशों में काफी फल-फूल रहा है, लेकिन सऊदी अरब और ईरान के अलावे आसपास के इस्लामी मुल्को में तबलीगी जमात अपनी जगह नहीं बना पायी है।

सऊदी अरब में सलफी मसलक के मानने वाले लोग ज्यादा हैं। वहां की मस्जिदों के इमाम भी ज्यादातर सलफी मसलक के हैं। वहीं, तबलीगी जमात के लोग हनफी मसलक के हैं। ऐसे में इस्लाम के अंदर ही धार्मिक और वैचारिक मतभेद होने के कारण एक तरह से सऊदी अरब में तबलीगी जमात पर प्रतिबंध है, क्योंकि सलफी मसलक में इस्लाम के प्रचार-प्रसार की इस तरह की कोई पद्धति ही नहीं है।

इसके अलावा सऊदी अरब में मस्जिदों की सारी जिम्मेदारियां सरकार के पास हैं। वहां पर मस्जिदों में किसी को ठहरने की इजाजत नहीं है और न ही किसी तरह की कोई धार्मिक भीड़ इकट्ठा करने की है। जबकि, तबलीगी जमात के लोग मस्जिदों में जाकर ठहरते हैं और लोगों के बीच प्रचार-प्रचार करते हैं। इसी के चलते सऊदी अरब की हुकूमत ने तबलीगी जमात को अपने देश में प्रतिबंधित कर रखा है। इसके अलावा सऊदी अरब की एक दलील यह भी है कि, यहां से ही इस्लाम पूरी दुनिया में फैला है, ऐसे में कोई हमें क्या इस्लाम बतायेगा।

सऊदी अरब ने तबलीगी जमात के अलावा दूसरे मुस्लिम समुदायों के क्रियाकलाप को भी प्रतिबंधित कर रखा है। सार्वजनिक रूप से न तो किसी को अपने धार्मिक कार्य करने की इजाजत है और न ही किसी तरह का कोई चंदा इकट्ठा करने की। हाल ही में सऊदी अरब ने तबलीगी जमात को प्रतिबंधित करने के लिए बकायदा पत्र भी जारी किया है।

सऊदी अरब की तरह ईरान में भी तबलीगी जमात के घुसने पर रोक है, लेकिन वजह दूसरी है। सऊदी अरब में जहां सलफी संप्रदाय की बहुलता है, वहीं ईरान शिया बहुल है और सत्ता पर भी उन्हीं का कब्जा है। तबलीगी जमात और शिया संप्रदाय के बीच काफी वैचारिक मतभेद हैं। शिया संप्रदाय के धार्मिक क्रियाकलापों को तबलीगी जमात इस्लाम के खिलाफ बताता है। उसी प्रकार तबलीगी जमात के कामकाज को भी शिया समुदाय के लोग सही नहीं मानते हैं। इसी वजह से ईरान में तबलीगी जमात के घुसने पर प्रतिबंध है। इतना ही नहीं ईरान में तबलीगी जमात के चोरी-छिपे काम करने पर भी सख्ती से रोक है।

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