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कोरोना का पहला वैक्सीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटी को: वैक्सीन देने के बाद तापमान गिरा

Janprahar Desk
12 Aug 2020 7:19 PM GMT
कोरोना का पहला वैक्सीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटी को: वैक्सीन देने के बाद तापमान गिरा
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इस वैक्सीन का नाम 'Sputnik V' है  । Sputnik दुनिया की पहली सैटेलाइट का नाम था, जिसे सोवियत संघ ने 1957 में लॉन्च किया था ।  इस सैटेलाइट से जोड़कर दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का नाम दिया गया है ,राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात का सोशल मीडिया पर भी खुलासा किया कि सबसे पहले यह वैक्सीन उनकी बेटी को दी गई है। 

कोरोना कोरोना महामारी के चलते सभी लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है और पूरी दुनिया कोरोना की वैक्सीन का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही है ।दुनिया के कई देश इस वैक्सीन को बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा कर दिया कि उनके यहां दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन तैयार हो गई है ।
खुशी की खबर यह है कि इस वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी भी मिल गई है ।

इस वैक्सीन का नाम 'Sputnik V' है  । Sputnik दुनिया की पहली सैटेलाइट का नाम था, जिसे सोवियत संघ ने 1957 में लॉन्च किया था ।  इस सैटेलाइट से जोड़कर दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का नाम दिया गया है ,राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात का सोशल मीडिया पर भी खुलासा किया कि सबसे पहले यह वैक्सीन उनकी बेटी को दी गई है। उन्हें दो डोज दिए गए। डोज देने के बाद शरीर के तापमान में बदलाव रिकॉर्ड किया गया। पुतिन के मुताबिक, पहली डोज देने पर उसके शरीर का तापमान 38 डिग्री था। वैक्सीन की दूसरी डोज दी गई तो तापमान 1 डिग्री गिरकर 37 डिग्री हो गया। लेकिन कुछ समय बाद दोबारा तापमान बढ़ा, जो धीरे-धीरे सामान्य हो गया।

वैक्सीन का एडवांस क्लीनिकल ट्रायल यानी फेज-3 का ट्रायल 12 अगस्त से शुरू होने जा रहा है । इस ट्रायल में यूएई, सऊदी अरब, फिलीपींस और ब्राजील भी शामिल हो रहे हैं ।पहले और दूसरे  चरण  का ट्रायल 1 अगस्त को पूरा हो गया है । बताया ये भी जा रहा है कि इस बीच ये वैक्सीन बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स को दी जाएगी। रूस प्रशासन ने ये भी कहा है कि मेडिकल स्टाफ, टीचर्स जैसे लोग जो ज्यादा रिस्क पर हैं उन्हें सबसे पहले ये वैक्सीन दी जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में होने की बात कही है। रूस के साथ WHO अप्रूवल पर चर्चा कर रहा है। WHO ने पहले कहा था कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो ये बहुत खतरनाक कदम साबित हो सकता है।

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