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कोरोना से जुड़ी कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी

Janprahar Desk
19 May 2020 4:38 PM GMT
कोरोना से जुड़ी कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी
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अमेरिका समेत ब्रिटेन में ऐसे करीब 200 से अधिक मामले सामने आ चुके है। डॉक्टरों के पास इस बीमारी की वजह को लेकर कोई जानकारी नहीं है।और यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी नहीं फैलती है। चेन्नई के आठ वर्षीय एक बच्चे मे कोरोनो वायरस से जुड़े हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण मिले
  • अमेरिका समेत ब्रिटेन में ऐसे करीब 200 से अधिक मामले सामने आ चुके है।
  • डॉक्टरों के पास इस बीमारी की वजह को लेकर कोई जानकारी नहीं है।और यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी नहीं फैलती है।
  • चेन्नई के आठ वर्षीय एक बच्चे मे कोरोनो वायरस से जुड़े हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण मिले ।

जहां हमें दुनिया भर में छाई कोरोना वायरस की महामारी से छुटकारा नहीं मिला। वहीं कुछ देशों में नई वायरस ने बच्‍चों पर हमला बोल दिया है। अमेरिका समेत ब्रिटेन में ऐसे करीब 200 से अधिक मामले सामने आ चुके है। जिनमे बच्‍चों के भीतर इस तरह की बीमारी का पता लगा है। और साथ ही कई बच्चे इनका शिकार भी बन चुके है।डॉक्टरों के पास इस बीमारी की वजह को लेकर कोई जानकारी नहीं है।और यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी नहीं फैलती है।

वहीं भारत में चेन्नई के आठ वर्षीय एक बच्चे मे कोरोनो वायरस से जुड़े हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण मिले है। यह भारत में पहला मामला है। इस सिंड्रोम में जरूरी अंग के साथ पूरे शरीर में सूजन होती हैं। जिस के असर से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।

जानकारी के मुताबिक कोरोना से संक्रमित इस बच्चे को गंभीर हालत के साथ चेन्नई के कांची कामकोटि चाइल्डस ट्रस्ट हॉस्पिटल में ले जाया गया।बच्चे के शरीर में उत्पन्न होने वाले विषाक्त पदार्थों दिखाई दिए है।और कावासाकी बीमारी के लक्षण मिले हैं। हालांकि बच्चे में कोरोना के साथ हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम को कुछ दवाओं की मदद से ठीक कर दिया है। इससे पहले लंदन में भी के बीचों बीच दस दिन के अंदर आठ बच्चों में यह बीमारी देखा गया था।आंकड़ों के अनुसार यह बीमारी वयस्कों की तुलना बच्चों और किशोरों में दिखाई देता है।

आपको बता दे की ये कावासाकी बीमारी शरीर की रक्तवाहिनियों से संबनधित बीमारी है। जिसमे सूजन होती है और यह सूजन हृदय तक रक्त देने वाली धमनियों को कमजोर बना देती है।इसका प्रभाव शरीर के अन्य भाग में भी दिखाई देते है। इसमें हार्ट फेल्योर और हर्ट अटैक होने की संभावना प्रचुर मात्रा में होती है।डब्लूएचओ ने दुनिया भर के विशेषज्ञों का समूह बनाया है। जो इस बात का पुष्टि देने के लिए जांच करेगा कि क्या कॉरोना वायरस से इस आयु वर्ग में भी कई अंगों के विफल होने का कारण बन सकता है।

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