टेक्नोलॉजी

देश में बनेगा 200 Km लंबा पहला Electric Highway, जानिए कैसे होगा इसपर वाहनों का आवागमन? और क्या होंगे इससे फायदे?

Nairitya Srivastva
21 Sep 2021 6:17 AM GMT
देश में बनेगा 200 Km लंबा पहला Electric Highway, जानिए  कैसे होगा इसपर वाहनों का आवागमन?  और क्या होंगे इससे फायदे?
x

जल्द ही देश को पहला इलेक्ट्रिक हाईवे मिल सकता है. सरकार दिल्ली से जयपुर के बीच इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने राजस्थान के दौसा में हाल ही में इसकी घोषणा की. इस हाईवे पर सभी इलेक्ट्रिक वाहन ही चलेंगे. इससे पैसा भी बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा. केंद्रीय मंत्री की इस घोषणा को देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की राह में बड़ा कदम माना जा रहा है.

इलेक्ट्रिक हाईवे क्या होता है ?

ये एक ऐसा हाईवे जिसपर इलेक्ट्रिक वाहन चलते हैं. आपने ट्रेन के ऊपर एक इलेक्ट्रिक वायर देखा होगा. ट्रेन के इंजन से ये वायर एक आर्म के जरिए कनेक्ट होता है, जिससे पूरी ट्रेन को इलेक्ट्रिसिटी मिलती है. इसी तरह हाइवे पर भी इलेक्ट्रिक वायर लगाए जाएंगे. हाइवे पर चलने वाले वाहनों को इन वायर्स से इलेक्ट्रिसिटी मिलेगी. इसे ही ई-हाइवे, यानी इलेक्ट्रिक हाइवे कहा जाता है. इस हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चार्जिंग पॉइंट भी होंगे.

कहां बनाया जा रहा है?

नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि देश का पहला ई-हाईवे दिल्ली और जयपुर के बीच बनाया जाएगा. 200 किलोमीटर लंबे इस हाईवे को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के साथ ही एक नई लेन पर बनाया जाएगा. ये लेन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और इसमें केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही चलेंगे. सरकार इसके लिए स्वीडन की कंपनियों से बात कर रही है. पूरी तरह तैयार होने के बाद ये देश का पहला ई-हाईवे होगा.

ई-हाईवे से आपको क्या होंगे फायदे ?

ई-हाईवे की सबसे बड़ी खासियत इसमें वाहनों की सस्ती आवाजाही है. नितिन गडकरी ने कहा था कि ई-हाईवे से लॉजिस्टिक कॉस्ट में 70% की कमी आएगी. फिलहाल चीजों की कीमतों में बढ़ोत्तरी की एक बड़ी वजह ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट है. अगर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में कमी आएगी, तो चीजें सस्ती हो सकती हैं.

ये पूरी तरह इको फ्रेंडली होंगे. वाहनों को चलाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पेट्रोल-डीजल के मुकाबले सस्ती होगी और पर्यावरण के लिए भी कम हानिकारक होगी. पेट्रोल-डीजल पर से निर्भरता कम होगी. महंगे पेट्रोल-डीजल की वजह से ट्रांसपोर्टशन कॉस्ट भी बढ़ी है. साथ ही पेट्रोल-डीजल पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है.

किस तरह करेगा ?

दुनियाभर में तीन अलग-अलग तरह की टेक्नोलॉजी ई-हाईवे के लिए इस्तेमाल की जाती हैं. भारत सरकार स्वीडन की कंपनियों से बात कर रही है, इसलिए माना जा रहा है कि स्वीडन में जो टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही है, वही भारत में भी होगी. ये इलेक्ट्रिसिटी डायरेक्ट इंजन को पॉवर देती है या वाहन में लगी बैटरी को चार्ज करती है. इसके अलावा कंडक्शन और इंडक्शन मॉडल का भी इस्तेमाल किया जाता है. कंडक्शन मॉडल में सड़क के भीतर ही वायर लगा होता है, जिसपर पेंटोग्राफ टकराता हुआ चलता है.

दुनिया के और किन देशों में है ई-हाईवे ?

इलेक्ट्रिक हाईवे का इस्तेमाल स्वीडन और जर्मनी में हो रहा है. स्वीडन ई-हाईवे शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश है. स्वीडन ने 2016 में ई-हाइवे का ट्रायल शुरू किया था और 2018 में पहला ई-हाईवे शुरू किया.

स्वीडन के बाद जर्मनी ने 2019 में इलेक्ट्रिक हाईवे की शुरुआत की. ये हाईवे 6 मील लंबा है. इस हाईवे के अलावा जर्मनी ने बसों के लिए वायरलेस इलेक्ट्रिक रोड भी बनाया है. स्वीडन और जर्मनी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट चल रहे हैं. ब्रिटेन और अमेरिका में भी ई-हाईवे पर काम चल रहा है.


ये भी पढ़ें:

बाइक में की गई एक छोटी सी करतब! अब बाइक 10 रुपये में 50 किमी दौड़ती है

Epic Games को माननी होंगी Apple की शर्तें, तभी एप स्टोर पर एपिक की वापसी होगी संभव

WhatsApp में मिलेंगे 'Money Heist' के कमाल स्टिकर पैक, ऐसे डाउनलोड करके करें Enjoy

Next Story
Share it