क्या आप भी स्मार्टफोन को डार्क मोड में करते हैं यूज? ..तो पहले जान ने एक्सपर्ट्स की राय

अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, डार्क मोड इस्तेमाल करने वाले लोगों में एस्टिगमेटिज्म नाम की बीमारी सामने आ रही है। जिसमें आपके आंखों के कॉर्निया का शेप बदल सकता है।
 
Dark mode

लेटेस्ट एंड्राइड अपडेट आ जाने के बाद से स्मार्टफोन में डार्क मोड़ का क्रेज बहुत बढ़ गया है। ज्यादातर लोग इस मोड में मोबाइल को चलाना पसंद करते है। तर्क यह दिया जाता है कि इससे आंखों को आराम मिलता है। मगर एक ताजा शोध के मुताबिक इस तर्क को सिरे से नकार दिया गया है। बल्कि नतीजा इसके उलट है। जी है ज्यादा समय तक डार्क मोड में मोबाइल का इस्तेमाल आपकी आंखों के लिए घातक साबित हो सकता है। 

अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, डार्क मोड इस्तेमाल करने वाले लोगों में एस्टिगमेटिज्म नाम की बीमारी सामने आ रही है। जिसमें आपके आंखों के कॉर्निया का शेप बदल सकता है। ऐसे लोगों में आगे चलकर यह समस्या हो जाती है कि वह लोग  वाइट बैकग्राउंड पर ब्लैक टेक्स्ट के मुकाबले ब्लैक बैकग्राउंड पर वाइट टेक्स्ट आसानी से नहीं पढ़ पाते। 

वैज्ञानिकों का यह तर्क है कि ज्यादा ब्राइटनेस की वजह से आइरिस छोटा हो जाता है, वहीं डार्क मोड में इसका उल्टा हो जाता है। डार्क मोड की वजह से आइरिस बड़ा हो जाता है, इस वजह से आंख के फोकस ओर असर पड़ता है। इस वजह से आगे चलकर ब्लर दिखाई देने लगता है। 

अगर आप लंबे समय से डार्क मोड का इस्तेमाल कर रहे है तो आपकी आंखें उसे अडॉप्ट कर लेती है। वहीं, जब आप लाइट मोड पर स्विच करेंगे तो आपकी आंखें एडजस्ट नहीं कर पाती। ऐसे में ब्राइटबर्न की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप इस समस्या से निजाद पाना चाहते है तो लाइट और डार्क मोड के बीच स्विच करते रहिए। दिन में लाइट मोड का इस्तेमाल करें और रात में स्मार्टफोन को डार्क मोड में स्विच कर लें। 

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