महाराष्ट्र

Yerwada Central Jail: कैदियों का शानदार काम, हर साल 8 करोड़ की कमाई।

Janprahar Desk
26 Jan 2020 7:15 PM GMT
Yerwada Central Jail: कैदियों का शानदार काम, हर साल 8 करोड़ की कमाई।
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महाराष्ट्र (Maharashtra) की येरवडा जेल (Yerwada Central Jail) में कैदियों के सुधार की सबसे बड़ी पहल चलाई जा रही है. कैदियों को सुधारने और उनके पुनर्वासन के मकसद से अलग-अलग तरीके के काम उनसे कराए जाते हैं. कैदियों को ट्रेनिंग भी दी जाती है. कैदियों से उद्योग के साथ-साथ खुद के हुनर वाले भी कई

महाराष्ट्र (Maharashtra) की येरवडा जेल (Yerwada Central Jail) में कैदियों के सुधार की सबसे बड़ी पहल चलाई जा रही है. कैदियों को सुधारने और उनके पुनर्वासन के मकसद से अलग-अलग तरीके के काम उनसे कराए जाते हैं. कैदियों को ट्रेनिंग भी दी जाती है. कैदियों से उद्योग के साथ-साथ खुद के हुनर वाले भी कई काम कराए जाते हैं. ऐसे उपक्रम बेहद कम जेलों में चलाए जाते हैं.

पुणे (Pune) की येरवडा सेंट्रल जेल (Yerwada Central Jail) ऐसे ही सुधारों की प्रयोगशाला बनती दिख रही है. इस जेल की कमाई करोड़ों में है. प्रशासन के मुताबिक इस जेल की कमाई 7 से 8 करोड़ रुपये सालाना है.

खास बात यह है कि इस जेल में जो उपक्रम सफल हो जाता है, उसे राज्य की अन्य जेलों में भी लागू किया जाता है. इस बार यरवदा जेल के वरिष्ठ प्रशासन ने 100 दोषी कैदियों को हाई सैलून और कपड़े प्रेस कराने का हुनर भी सिखाया जाता है.

दोषी कैदियों में से कुछ को खुले जेल के लिए भी चुना गया है, वहीं दो दुकानों में कुछ चुने कैदी बाल काटते हैं, साथ ही कुछ को कपड़े प्रेस करने का काम दिया गया है.

पश्चिम महाराष्ट्र जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल योगेश देसाई ने आज तक से बातचीत में बताया कि जेल विभाग जेल के भीतर कैदियों को कई हुनर सिखा रहा है. हुनर सीखने के बाद कैदी बाहर मुख्य धारा में जाकर इन स्किल्स के जरिए जीवन-यापन कर सकते हैं. इन कैदियों को दी गई ट्रेनिंग जेल के बाहर बहुत काम आने वाली है. जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे कैदी समाज के लिए खतरा नहीं बनेंगे और गुनाह की दुनिया में दोबारा कदम नहीं रखेंगे. इसी मकसद से कैदियों को बाहर ले जाकर उन्हें जीविका कमाने का मौका दिया जा रहा है.

येरवडा जेल (Yerwada Jail) के अधीक्षक के मुताबिक जेल में कुल 6 हजार कैदी हैं. इनमें से 1500 कैदियों पर दोष साबित है, साथ ही उन्हें सजा सुनाई गई है. ऐसे कैदी जिनका बर्ताव अच्छा है, उन्हें खुली जेल में भेजा जाता है. ये बैरक जेल के बाहर होते हैं.

इसके पीछे मकसद आजाद माहौल में कैदियों के व्यवहार की निगरानी रखनी भी है. जेलों की ओर से कैदियों के सुधार का यह पहला मामला है. शहर के अन्य हेयर सलून और कपड़े प्रेस करने की दुकानों की तुलना में इन दुकानों पर चार्ज 30 फीसदी कम है.

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