दिल्ली

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा, कई मुद्दों पर उठाए सवाल

Janprahar Desk
18 July 2021 6:45 PM GMT
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा, कई मुद्दों पर उठाए सवाल
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संसद का मानसून सत्र कल से शुरू हो रहा है. ऐसे में मानसून सत्र से पहले बैठकों का दौर जारी है. इसी कड़ी में संसद सत्र से संबंधित मुद्दों पर चर्चों के लिए केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाई.  

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के मॉनसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए. पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आज नेताओं ने सरकार को कई सुझाव दिए. पीएम ने कहा कि सरकार संसद में विभिन्न मुद्दों पर स्वस्थ और सार्थक चर्चाओं को लेकर तैयार है. संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने बैठक में प्रधानमंत्री के कथन के बारे में बताया कि उन्होंने सदन में विभिन्न दलों के नेताओं से कहा कि सरकार नियमों और प्रक्रिया के तहत उठाए गए मुद्दों पर स्वस्थ और सार्थक चर्चा को तैयार है. इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी समेत उप लोकसभा नेता राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, वी मुरलीधरन और राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल भी मौजूद रहे.

बता दें कि बैठक में अन्य नेताओं के साथ कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी और मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ ब्रायन और सुदीप बंदोपाध्याय, डीएमके से तिरुचि शिवा और टीआर बालू, वाईएसआर कांग्रेस से मिथुन रेड्डी और विजय साई रेड्डी, बसपा से रितेश पांडे और सतीश मिश्रा शामिल हुए, समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव, अपना दल से अनुप्रिया पटेल, अकाली दल से हरसिमरत कौर बादल, शिवसेना की ओर से संजय राउत एवं बीजद से पिनाकी मिश्रा और प्रसन्ना आचार्य भी बैठक में शामिल हुए.

इस बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार को कई मुद्दों को लेकर करारा वार किया. विपक्ष ने मौजूदा सरकरा पर कृषि बिलों, कीमतों में वृद्धि - विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल के- जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया और सरकार से एनईईटी में ओबीसी के लिए आरक्षण लाने के मांग की.

वहीं सरकार ने सदन के नेताओं को यह भी सूचित किया कि उन्होंने पांच अध्यादेशों सहित कई विधेयकों को सूचीबद्ध किया है और अन्य विधेयकों की कुल संख्या 29 है. हालांकि यह विपक्ष को रास नहीं आया और उन्होंने सवाल किया कि अगर विधेयकों को पास कराने में इतना समय दिया जाएगा, तो फिर उन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा कब की जाएगी, जिससे आम आदमी परेशान है.

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