धर्म

क्यों तीन दिन के लिए इस मंदिर में किसी का भी प्रवेश होता है वर्जित ?

Janprahar Desk
28 Jun 2020 5:33 PM GMT
क्यों तीन दिन के लिए इस मंदिर में किसी का भी प्रवेश होता है वर्जित ?
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तंत्र साधना और अघोरियों  के गढ़ माने जाने वाला कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित है वहां से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत है जहां पर कामाख्या देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव का देवी सती के प्रति मोहभंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया। इसी कारण यहां पर माता की योनि गिरी जिसके कारण इसे कामाख्या नाम दिया गया।

इस मंदिर में वैसे तो हर समय भक्तों की भीड़ लगी होती है लेकिन दुर्गा पूजा बुहानविया बसंती पूजा और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व होता है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।

यह भी कहा जाता है कि यहां पर देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं यह भी कहा जाता है कि यह मंदिर चमत्कारों से भरा हुआ है इस मंदिर के बहुत से रोचक तथ्य भी हैं और उन बातों के बारे में आज मैं आपको अपने इस आर्टिकल में बताऊंगी तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ने के बाद आप इन सब रहस्यों को अच्छे से जान जाएंगे आइए जानते हैं कि रोचक रहस्य क्या है ?

कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का एक महापीठ है यहां पर दुर्गा या अंबे मां कि कोई भी मूर्ति देखने को नहीं मिलेगी यहां पर एक कुंड सा बना हुआ है जो हमेशा फूलों से ढका रहता है और उसे हमेशा प्राकृतिक झरने जैसा जल निकलता रहता है। कामाख्या मंदिर को समस्त निर्माण का केंद्र माना जाता है क्योंकि समस्त रचना की उत्पत्ति महिला योनि को जीवन का प्रवेश द्वार माना जाता है। वैसे तो पूरे विश्व में रजस्वला यानी मासिक धर्म को अशुद्ध माना जाता है आपको पता ही होगा कि लड़कियां इस दौरान कई परेशानियों का सामना करती हैं और उन्हें एक अछूत समझा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कामाख्या के बारे में ऐसा नहीं है हर साल एक त्यौहार के दौरान पास में स्थित नदी ब्रह्मपुत्र का पानी 3 दिन के लिए लाल हो जाता है पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। फिर 3 दिन बाद श्रद्धालुओं की मंदिर में फिर से भीड़ उमड़ पड़ती है।

इस मंदिर में दिया जाने वाला प्रसाद भी दूसरे शक्तिपीठों से बिल्कुल ही अलग होता है इस मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का कपड़ा दिया जाता है कहा जाता है कि जब मां को 3 दिन का राजस्वाला होता है तो सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है और जब 3 दिन बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तब वस्त्र माता के रज से लाल रंग में परिवर्तित हो जाता है और साथ ही गीला भी होता है इस कपड़े को अंबुबाची वस्त्र कहते हैं। इसी कपड़े को भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.

यहां पर कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है इस जगह पर एक समतल चट्टान के बीच में बना विभाजन देवी की योनि को दर्शाता है एक प्राकृतिक झरने के कारण यह जगह हमेशा गिला रहता है इस झरने के जल को काफी प्रभाव कारी और शक्तिशाली माना जाता है। माना जाता है कि इस जल के नियमित सेवन से आप हर बीमारी से निजात पा सकते हैं।

यहां पर पशुओं की बलि दी जाती है भैंस और बकरी की बली तो आम है लेकिन यहां पर किसी भी मादा जानवर की बलि नहीं दी जाती। इसके साथ ही मान्यता है कि मां को प्रसन्न करने के लिए आप कन्या पूजन और भंडारा करा सकते हैं जिससे आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाएगी।

इस जगह को तंत्र साधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है यहां पर साधुओं और अघोरियों की भीड़ लगी रहती है यहां पर अधिक मात्रा में काला जादू भी किया जाता है अगर कोई व्यक्ति काला जादू से परेशान है तो वह यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

कामाख्या के तांत्रिक और साधु चमत्कार करने में सक्षम होते हैं कई लोग विवाह बच्चे धन और दूसरी इच्छा की पूर्ति के लिए कामाख्या के तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि यहां के तांत्रिक बुरी शक्तियों को दूर करने में भी सक्षम होते हैं हालांकि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल काफी सोच विचार करते हैं।

कामाख्या मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है पहला सबसे बड़ा है इसमें हर व्यक्ति को नहीं जाने दिया जाता है वही दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माना जाता है कि महीने के 3 दिन माता को रजस्वला होता है इन 3 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं और 3 दिन बाद दुबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते हैं।

इस मंदिर के साथ लगे एक मंदिर में आपको मां की मूर्ति विराजित मिलेगी इस मंदिर को कामदेव मंदिर भी कहा जाता है इस मंदिर परिसर में आपको कई देवी-देवताओं की आकृति देखने को मिल जाएगी। ऐसा माना जाता है कि यहां पर जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर आता है उसकी हर मुराद पूरी होती है। तांत्रिकों की देवी कामाख्या देवी की पूजा भगवन शिव की नव वधु के रूप में की जाती है जो की मुक्ति को स्वीकार करती है और सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं। काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या देवी तांत्रिकों की सबसे महत्व पूर्ण देवी है।

तो दोस्तों उम्मीद करती हु की इस आर्टिकल से आप समझ गए होंगे की आखिर तीन दिनों तक इस मंदिर के कपाट क्यों बंद रहते है और साथ ही इस मंदिर से जुड़े हुए अन्य रोचक रहस्यों के बारे में भी आप जान गए होंगे।

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