धर्म

क्यों माँ लक्ष्मी और भगवान् विष्णु एक साथ नहीं पूजे जाते ?

Janprahar Desk
27 Jun 2020 8:33 PM GMT
क्यों माँ लक्ष्मी और भगवान् विष्णु एक साथ नहीं पूजे जाते ?
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माता लक्ष्मी भगवान विष्णु से इतना प्रेम करती है कि जब जब विष्णु ने धरती पर अवतार लिया है तब-तब लक्ष्मी ने उनकी प्रेमिका या पत्नी बनकर उनके साथ अवतार लिया है।

पुराणों में यह दर्ज है कि मां लक्ष्मी तभी प्रसन्न होती है जब उनके साथ साथ विष्णु की भी पूजा की जाए मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विष्णु की भी पूजा बेहद जरूरी है।

लेकिन एक  सवाल है जो शयद आप सभी के मन में भी उठता होगा कि हर साल दीपावली के मौके पर लक्ष्मी के साथ गणपति को क्यों पूजा जाता है क्यों लक्ष्मी की पूजा उनके पति विष्णु के साथ नहीं होती ?

हर साल दीपावली पर आप  लक्ष्मी गणेश का विधिवत पूजन करते होंगे कभी ना कभी आपके जेहन में यह सवाल जरूर आया होगा तो चलिए जानते है की इस सवाल का जवाब क्या है ?

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के पीछे उद्देश्य तो आप लोग जानते  ही होंगे हर कोई मां लक्ष्मी को दीपावली पर प्रसन्न करता है और माता से उनके निवास स्थान पर बस जाने की कामना करता है ताकि उनका परिवार फलता फूलता रहे। गणेश को बुद्धि का देवता कहा गया है विवेक का देवता कहां गया है गणेश की दो पत्नियां हैं रिद्धि  और सिद्धि और दो ही पुत्र है शुभ और लाभ।

शुभ और लाभ गणपति के साथ साथ माँ लक्ष्मी से भी जुड़े हैं लाभ के बिना लक्ष्मी का आगमन नहीं हो सकता और लाभ शुभ समय में ही होता है यानी की शुभ और लाभ के आगमन से ही लक्ष्मी का आगमन होता है।

इसके बाद आता है गणपति का काम। शुभ और लाभ के आगमन से जब लक्ष्मी घर में आती है तो उस लक्ष्मी को संभालने के लिए विवेक और बुद्धि की आवश्यकता पड़ती है। कहते हैं कि लक्ष्मी को एक जगह पर रोक ना बिल्कुल भी संभव नहीं है अगर कोई भी लक्ष्मी को एक जगह रोके रखना चाहता है तो उसे बुद्धि और विवेक की बेहद जरूरत है जो कि उसे भगवान गणेश के आशीर्वाद से ही मिल सकती है इसलिए माता लक्ष्मी को अपने घर पर रोके रखने के लिए गणपति की भी पूजा की जाती है और उनसे बुद्धि और विवेक का वर मांगा जाता है।

इसके अलावा एक और प्रमुख कारण है जो कि दीपावली के दिन लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है और ये कारन है  गणपति जी के लक्ष्मी जी के पुत्र होने का जी हां गणपति को लक्ष्मी का मानस पुत्र माना गया है। मानस संतान वह संतान होती है जो की इच्छा से प्राप्त होती है संभोग से नहीं। अब आप लोग सोच रहे होंगे कि गणपति तो पार्वती के पुत्र हैं तो वह ऐसे में लक्ष्मी पुत्र कैसे हो सकते हैं।

दरअसल पुराणों में दर्ज कहानी के अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से यह बात कही कि कोई भी नारी पूर्ण तब होती है जब उसकी कोई संतान हो लेकिन माँ लक्ष्मी की कोई भी संतान नहीं थी और वह मां पार्वती के पास मदद के लिए गई। मां पार्वती के सौभाग्य से 2 पुत्र थे गणपति और कार्तिक्य  जब लक्ष्मी ने पार्वती से विनती की उनकी मदद करने की बात कही तो पार्वती माता ने अपने पुत्र गणेश को लक्ष्मी को सौंप दिया पार्वती माता ने लक्ष्मी माता से कहा कि आज से गणेश मेरा और आपका दोनों का ही पुत्र है। हालांकि पार्वती यह बखूबी जानती थी कि लक्ष्मी एक जगह पर स्थिर नहीं रहती इसलिए वह गणपति का ख्याल नहीं रख पाएंगी लेकिन लक्ष्मी की हालत देखकर पार्वती मां ने उनकी मदद की।  इसके बाद लक्ष्मी माता ने पार्वती मां से यह वादा किया कि वह गणपति का हमेशा ख्याल रखेंगे लक्ष्मी मां ने कहा कि जब जब मेरी पूजा होगी तब-तब गणपति का पूजन भी साथ होगा और इसी के बाद ही मेरी पूजा संपूर्ण समझी जाएगी।

यही वजह है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी के साथ उनके पुत्र गणेश की भी पूजा होती है जी हां गणपति लक्ष्मी के मानस पुत्र हैं उनके बेटे हैं इसीलिए दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणपति की पूजा होती है विष्णु कि नहीं।

आपको यह भी बता दें कि दीपावली पर लक्ष्मी और गणेश की पूजन के दौरान आपको एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गणेश को सदा लक्ष्मी की बायीं  और ही रखें जी हां गणपति की मूर्ति आपको लक्ष्मी की बायीं  और रखनी है क्योंकि आदिकाल से पत्नी को वामांगी कहा गया है अर्थात बाय स्थान पत्नी को दिया जाता है अतः पूजा करते समय आपको लक्ष्मी गणेश को इस प्रकार स्थापित करना है कि लक्ष्मी जी सदा गणेश जी के दाहिनी ओर ही रहे तभी पूजा का संपूर्ण फल मिलता है।

तो अब आप समझ  गए होंगे की क्यों  लक्ष्मी माँ की पूजा भगवान् विष्णु के साथ नहीं होती है।

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