धर्म

क्यों एक ऋषि ने दिया था नारायण  को  इतना बड़ा श्राप ?

Janprahar Desk
7 July 2020 8:55 PM GMT
क्यों एक ऋषि ने दिया था नारायण  को  इतना बड़ा श्राप ?
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आपने राधा कृष्ण के अटूट प्रेम और श्री कृष्ण रुक्मणी के विवाह की कहानियां आवश्य ही सुनी होंगी राधा और रुक्मणि के संबंध में सोचने पर यह प्रश्न हमारे मन में कौंध ने लगता है कि राधा और रुक्मणी दोनों ही श्री कृष्ण की संगिनिया थी किंतु दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार में माता लक्ष्मी के रूप में क्या जन्म लेती है।

कौन है लक्ष्मी राधा रानी या देवी रुक्मणी ?आज के अपने इस आर्टिकल में मैं आपको बताउंगी की आखिर राधा या रुक्मणि में कौन थी माँ लक्ष्मी का रूप ?

तो दोस्तों सबसे पहले जानते हैं वह मत जिसके अनुसार राधा को लक्ष्मी स्वरूप माना जाता है तो इस बारे में यह कथा प्रचलित है कि एक बार भगवान विष्णु में बैकुण्ड में आराम कर रहे थे तभी क्रोधित ऋषि भृगु वहां पर उनके पास आए थे वह अत्यधिक क्रोधित थे क्योंकि भगवान विष्णु ने उनकी पत्नी का वध किया था वास्तव में ऋषि भृगु की पत्नी उन्हें बिना बताए असुरों को आसरा दे रही थी इसलिए नारायण ने उनकी पत्नी का वध किया किंतु पत्नी वियोग में क्रोधित ऋषि ने विष्णु को ही श्राप  दे डाला कि जिस प्रकार विष्णु के कारण वोअपनी पत्नी का वियोग सहरहे है उसी प्रकार विष्णु जी को भी अपनी पत्नी से वियोग सहना  होगा और वह हर अवतार में अपनी लक्ष्मी से अलग हो जाएंगे और इस वजह से श्री राम और देवी सीता का वियोग हुआ था  और इसी कारण विष्णु जी के हर अवतार में हम देखते हैं कि लक्ष्मी जी से उन्हें वियोग सहना पड़ता है कृष्ण अवतार में उन्होंने राधा से वियोग सहा था इस आधार पर माना जाता है कि अवश्य राधा ही लक्ष्मी स्वरूपा रहे होंगे।

किंतु श्री कृष्ण को वियोग तो रुकमणी जी से भी 12 वर्षों के लिए सहना पड़ा था लेकिन अगर श्राप को सच माना जाए और रुक्मणी  जी को लक्ष्मी कहा जाये तो श्री कृष्ण और रुक्मणी का विवाह श्राप के प्रभाव के कारण संभव नहीं था।  तो फिर रुक्मणी कौन थी यह प्रश्न भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है ?

तो दोस्तों से सबसे ज्यादा ग्रंथ और स्रोत  हर जगह रुक्मणि जी को ही साक्षात लक्ष्मी का अवतार माना गया है।  इसके अलावा महाभारत में भी एक लक्ष्मी रुकमणी संवाद हमें देखने को मिलता है जब भीष्म युधिष्ठिर को लक्ष्मी रुकमणी संवाद बताते हैं जिसमें लक्ष्मी जी ने रुक्मणी से स्वयं कहा कि मेरा निवास तुम में और राधा में समान रूप से है हालंकि मूल महाभारत में ये कथा नहीं मिलती आगे आने वाले समय में महाभारत में इस कथा को शामिल किया गया।

इसके अलावा वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत पुराण में श्री लक्ष्मी जी को रुक्मणी के रूप में बताया है वह कहते हैं कि जब विष्णु राम है तो लक्ष्मी सीता है और जब विष्णु कृष्ण है तो लक्ष्मी रुक्मणी है एक और उदाहरण हम देखते हैं कि जब हनुमान जी श्री कृष्ण से मिलने आए तो क्योंकि वह सच्चे भक्त थे इसलिए उन्हें श्रीकृष्ण और रुकमणी में साक्षात राम सीता के दर्शन हुए यानी कि श्री विष्णु लक्ष्मी की।

इसके अलावा स्कंद पुराण में साफ कहा गया है कि रुकमणी जी द्वारका की शोभा और राधा वृंदावन की रुकमणी जी द्वारका की लक्ष्मी और राधा वृंदावन की। जैसे रुक्मणि द्वारिका में है वैसे ही राधा रानी वृन्दावन में।

इसके अलावा एक और कथा है जो केबल रामायण काल से जुड़ी हुई है जिसके अनुसार श्री राम बनवास से पहले वास्तविक सीता को अग्नि देव के पास छोड़ गए थे और रावण ने जिस सीता का हरण किया वो छाया सीता थी जब रावण का वध करके श्री राम छाया सीता को वापस ले जा रहे थे तब छाया सीता ने श्री राम से प्रार्थना की कि मैंने आपके लिए इतने कष्ट सही है और मैं चाहती हूं कि अब आप मुझे अपनी पत्नी बनाएं अब मैं आपके पास से कहीं नहीं जाऊंगी तब श्री राम ने उन्हें वचन दिया कि उनके अगले अवतार श्री कृष्णा तार में वह उनकी प्रेमिका अवश्य बनेगी और उनके साथ अनंत काल तक पूजी जाएँगी और धरि राम वास्तविक सीता को लेकर अयोध्या चले गए और यह छाया सीता आगे चलकर राधा रानी के रूप में जन्म ले लेती हैं। अगर स्पष्ट रूप से माना जाए तो राधा और रुक्मणी दोनों ही लक्ष्मी के रूप थे ये वही महालक्ष्मी थे जिन्होंने राधा बनकर श्री कृष्ण की आत्मा बनकर 100 साल के विरह से संसार को अटूट प्रेम की परिभाषा समझा दी और यह वही लक्ष्मी थी जो कृष्ण संगिनी रुक्मणी बनकर द्वारिका में आजीवन उनके साथरही जहां राधा आत्मीय प्रेम का प्रतीक मानी जाती है तो वही रुक्मणि जी दैहिक प्रेम की परिकाष्टता बताई जाती है  आसान शब्दों में कहें तो यह वही मां लक्ष्मी विष्णु पत्नी है जो गोलोक में हो तो राधा रानी कहलाती है धरती पर हो तो वृंदावनावेश्वरी कहलाती है और ये वही माँ लक्ष्मी है जो बैकुण्ड में हो तो लक्ष्मी और यदि धरती पर हो तो कृष्णपत्नी रुक्मणि या द्वरिकाधीश्वरी कहलाती है।

क्या आप जानते है की राधा के अनेक नामो में एक नाम रुक्मणि भी है यानि हम राधा और रुक्मणि को एक माने या अलग अलग दो देविया किन्तु इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि राधा और रुक्मणी दोनों ही मां लक्ष्मी का अंश है इसलिए कृष्ण का दोनों के प्रति प्रेम भी समान रूप से देखने को मिलता है।

तो दोस्तों अब आप समझ गए होंगे की आखिर राधा और रुक्मणि में कौन थी माँ लक्ष्मी का रूप और आखिर क्यों सदैव कृष्ण के साथ राधा पूजी जाती है।

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