धर्म

गणेश जी के इन 32 रूपों में छिपी होती है प्रकृति की शक्तियां: इन 32 रूपों मे छिपा है प्रथम पूज्य होने का कारण !

Janprahar Desk
22 Aug 2020 3:07 PM GMT
गणेश जी के इन 32 रूपों में छिपी होती है प्रकृति की शक्तियां: इन 32 रूपों मे छिपा है प्रथम पूज्य होने का कारण !
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गणेश पुराण में विघ्नहर्ता गणेश जी के 32 मंगलकारी रूप बताए गए हैं। इनमे वे बाल रूप में है, तो किशोरों वाली ऊर्जा भी उनमें मौजूद है। ब्रह्मा, विष्णु ,महेश की शक्ति उनमें समाहित है तो वह सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में है। वह पेड़ ,पौधे ,फल, पुष्प के रूप में सारी प्रकृति खुद में समेटे हैं ।वे योगी भी हैं और नर्तक भी। वे बाधाएं मिटाकर अभय देते हैं । सही गलत का भेद बता कर न्याय भी करते हैं ।गणेश के इन रूपों में उनके प्रथम पूज्य होने का कारण छिपा है। गणेश शुभारंभ की बुद्धि देते हैं और काम को पूरा करने की शक्ति भी।

गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है और माना जाता है कि किसी भी मंगलमय कार्य की शुरुआत करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है तो वह काम मंगलमय हो जाता है और बिना किसी विघ्न के संपन्न हो जाता है। गणेश पुराण में विघ्नहर्ता गणेश जी के 32 मंगलकारी रूप बताए गए हैं। इनमे वे बाल रूप में है, तो किशोरों वाली ऊर्जा भी उनमें मौजूद है। ब्रह्मा, विष्णु ,महेश की शक्ति उनमें समाहित है तो वह सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में है।

वह पेड़ ,पौधे ,फल, पुष्प के रूप में सारी प्रकृति खुद में समेटे हैं ।वे योगी भी हैं और नर्तक भी। वे बाधाएं मिटाकर अभय देते हैं । सही गलत का भेद बता कर न्याय भी करते हैं ।गणेश के इन रूपों में उनके प्रथम पूज्य होने का कारण छिपा है। गणेश शुभारंभ की बुद्धि देते हैं और काम को पूरा करने की शक्ति भी।

ये है गणेश जी के 32 रूप और उनसे संबंधित प्रेरणादायक तथ्य, जो गणेश जी के प्रत्येक रूप से हम सभी को ग्रहण करने चाहिए।

1. श्री बाल गणपति -गणपति जी का यह रूप संकट में भी बाल सुलभ सहजता की प्रेरणा देता है। व्यक्तियों को आगे बढ़ने की क्षमता दर्शाता है।
2. तरुण गणपति- इस रूप में गणपति अपनी पूरी क्षमता से काम करने और उपलब्धियों के लिए संघर्ष की प्रेरणा देते हैं ।
3.भक्त गणपति -इस रूप में गणपति इंसान के चार पुरुषार्थ_ धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं ।
4. वीर गणपति- इस रूप में गजानन बुराई और अज्ञानता पर विजय पाने के लिए पूरी क्षमता से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं ।
5.शक्ति गणपति -गणेश जी का यह रूप इस बात का प्रतीक है ,कि इंसान के भीतर शक्तिपुंज है, जिसका उसे इस्तेमाल करना चाहिए।
6. द्विज गणपति- द्विज इसलिए है क्योंकि वह ब्रह्मा की तरह दो बार जन्मे है ।उनके चार हाथ, चार वेदों की शिक्षाओं का प्रतीक है। इस रूप में उनके 2 गुण अहम है, ज्ञान और संपत्ति। इन दो को पाने के लिए गणपति के इस रूप को पूजा जाता है।
7. सिद्धि गणपति -इस रूप में गणेश जी पीतवर्ण है। वे बुद्धि और सफलता के प्रतीक है। भगवान गणेश का यह रूप किसी भी काम को दक्षता से करने की प्रेरणा देता है। यह सिद्धि पाने का प्रतीक है।

8.उच्छिष्ट गणपति- यह रूप ऐश्वर्या और मोक्ष में संतुलन का प्रतीक है। वे कामना और धर्म में संतुलन के लिए प्रेरित करते हैं ।गणेश जी के इस रूप का एक मंदिर तमिलनाडु में भी है।

9.विघ्न गणपति -इस रूप में गणेश जी का रंग स्वर्ण के समान है ।उनके 8 हाथ भी हैं ।वे बाधाओं को दूर करने वाले भगवान है ।यह रूप सकारात्मक पक्ष देखने की प्रेरणा देता है ।यह नकारात्मक प्रभाव और विचारों को भी दूर करता है ।
10.क्षिप्र गणपति- गणपति जी का यह रूप रक्त वर्ण है। यह रूप कामनाओं की पूर्ति का प्रतीक है। कल्पवृक्ष इच्छाएं पूरी करता है। और कलश समृद्धि देता है ।
11.हेरंब गणपति- इस रूप में गणेश कमजोर को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं ।वे डर पर विजय पाने की प्रेरणा देते हैं।
12. लक्ष्मी गणपति -गणेश जी इस रूप में उपलब्धियां और किसी काम में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं । इस रूप में गणेश जी बुद्धि और सिद्धि के साथ हैं।
13. महा गणपति -इस रूप में भगवान शिव की तरह है, गणेश जी के तीन नेत्र हैं। इस रूप में महागणपति दसों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं ।वे भ्रम से बचाते हैं।
14. विजय गणपति- इस रूप में भगवान गणेश जी मूषक पर सवार हैं। जिसका आकार सामान्य से बड़ा होता है ।इस रूप में गणपति विजय पाने और संतुलन कायम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
15. नृत्त गणपति- इस रूप में गणेश जी कल्प वृक्ष के नीचे नृत्य करते हुए हैं । इस रूप का पूजन ललित कलाओं में सफलता दिखाता है ।वे कला में प्रयोग के लिए प्रेरित करते हैं ।
16.उध्दर्व गणपति- इस रूप में गणेश जी की आराधना भक्तों को अपनी स्थिति से ऊपर उठने के लिए प्रेरित करती है। इस रूप में एक हाथ में उनका टूटा हुआ दांत है। बाकी हाथों में कमल पुष्प सहित प्राकृतिक संपदाए हैं।
17. एकाक्षर गणपति -एकाक्षर गणपति का बीज मंत्र है " गं"। यह हर तरह के शुभारंभ का प्रतीक है।
18. वर गणपति- इस रूप में उनके साथ विराजित देवी के हाथों में विजय पताका है ।वह विजयी होने के वरदान का प्रतीक है ।गणपति का यह रूप वरदान देने के लिए जाना जाता है । 19.त्र्यक्षर गणपति -यह भगवान गणेश का ओम रूप है। इस रूप में उनकी आराधना अध्यात्मिक ज्ञान देती है ।यह रूप स्वयं को पहचानने के लिए प्रेरित करता है ।
20.क्षिप्रप्रसाद गणपति- गणेश जी का यह रूप सभी की शांति और समृद्धि के लिए काम करने की प्रेरणा देता है। इस रूप में गणेश इच्छा को शीघ्रता से पुरा करते हैं और उतनी ही तेजी से गलतियों की सजा भी देते हैं। 
21.हरिद्रा गणपति- इस रूप में गणेश जी हल्दी के बने होते हैं और राज सिंहासन पर बैठे हैं ।इस रूप में गणेश प्रकृति और इसमें मौजूद निरोग रहने की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
22. एकदंत गणपति- इस रूप में गणेश अपनी कमियों पर ध्यान देने और खूबियों को निकालने के लिए प्रेरित करते हैं।
23 सृष्टि गणपति -गणेश जी का यह रूप प्रकृति की तमाम शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है ।यह रूप सही गलत और अच्छे बुरे में फर्क करने की समझ देता है ।इस रूप में गणेश निर्माण के प्रेरणा देते हैं।
24. उद्दंड गणपति -गणेश जी का यह रूप सांसारिक मोह छोड़ने और बंधनों से मुक्त होने के लिए प्रेरित करता है ।इस रूप में गणेश न्याय की स्थापना करते हैं ।
25.ऋण मोचन गणपति -इस रूप में गणेश जी परिवार, पिता और गुरु के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रेरित करते हैं ।गणेश जी का यह रूप अपराध बोध और कर्ज से मुक्ति देता है।
26. दुण्ढि गणपति- रक्त वर्ण गणेश जी के इस रूप में उनके हाथ में रुद्राक्ष की माला है ।गणेश जी का यह रूप आध्यात्मिक विचारों के लिए प्रेरित करता है ।जीवन को स्वच्छ बनाता है ।

27.द्विमुख गणपति- यह रूप दुनिया और व्यक्ति के आंतरिक और बाहरी दोनों रूपों को देखने के लिए प्रेरित करता है ।

28.त्रिमुख गणपति- गणेश जी का यह रूप भूत वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखकर कर्म करने के लिए प्रेरित करता है ।
29.सिंह गणपति -इस रूप में गणेश जी शेर के रूप में विराजमान है। गणेश जी का यह रूप निडरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। जो शक्ति और समृद्धि देता है ।
30.योग गणपति -इस रूप में भगवान श्री गणेश एक योगी की तरह दिखाई देते हैं। भगवान गणेश का यह रूप अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानने के लिए प्रेरित करता है।
31. दुर्गा गणपति -भगवान गणेश का यह रूप अजेय है। भगवान गणेश का यह रूप विजय मार्ग में आने वाली बाधाओं को हटाने के लिए प्रेरित करता है।
32. संकट हरण गणपति -यह रूप इस बात का प्रतीक है कि हर काम में संकट आएंगे ,लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति इंसान में है।

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