धर्म

श्री कृष्ण ने ऐसे कराया गांधारी को सत्य से अवगत।

Janprahar Desk
14 July 2020 9:59 PM GMT
श्री कृष्ण ने ऐसे कराया गांधारी को सत्य से अवगत।
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जब कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो गया उसके बाद कुरु वंश की विधवाएं और माताएं अपने पतियों और पुत्रों के शव को देखकर विलाप करने लगी इन सभी के साथ गांधारी के आंसू भी अपने सौ पुत्रों के शोक में कहां थामने वाले थे।

सूर्यास्त हो जाने पर सभी ने वहां से वापस जाने का निर्णय ले लिया लेकिन गांधारी ने यह कहकर मना कर दिया कि वह अपने पुत्रों को छोड़कर अब कहीं नहीं जाएंगे जिस लाठी के सहारे गांधारी चला करती थी उसी के द्वारा उसने अपने पुत्रों की लाशों पर से चील कौवे और गिद्धों को भगाना शुरू किया लेकिन आधी रात के बाद गांधारी का भूख के मारे बुरा हाल होने लगा कुछ वक्त और गुजरने के बाद गांधारी सारे दुख और पीड़ा भूलकर सिर्फ भूख मिटाने की यत्न  में लग गई।

तभी उसे वहां आम की खुशबू आने लगी आम की खुशबू और परवान चढ़ चुकी भूख ने उसके सारे गम और दुख कुछ क्षण के लिए मिटा ही दिए थे आम तोड़ने के लिए गांधारी ने पत्थरों का ढेर लगाकर उस पर चढ़ने की कोशिश की कुछ देर बाद वह सफल भी हो गई आम बहुत स्वादिष्ट था भूख शांत हो जाने पर ही गांधारी का दिमाग फिर से सामान्य स्थिति में कुछ सोचने लगा।

कुछ देर बाद गांधारी को ध्यान आया कि जिससे वह पत्थरों का ढेर समझ कर खड़ी है वास्तविकता में उसके पुत्रों के शव हैं गांधारी को मूल समझ आ चुका था कि जिस दुख से हम भ्रमित होते हैं उससे अधिक दुःख आ जाने पर उसे भूला जा सकता है।

वह जान गयी थी की यह सब कृष्ण की रचाई हुई माया थी सत्य से साक्षात्कार करवाने के लिए कृष्ण ने यह सारा खेल रचा था यह बात समझने में गांधारी को देर नहीं लगी।

इसके बाद गांधारी ने श्री कृष्ण को श्राप दिया कि तुम्हे भी इसी तरह अपने प्रिय जनों का विक्षोप भोगना पड़ेगा और दुख झेलना पड़ेगा जिस तरह मेरा परिवार और मेरा कुल नष्ट हुआ है उसी तरह तुम्हारे भी सगे संबंधी इसी तरह आपस में लड़ कर मर जाएंगे और तुम्हारी हत्या एक शिकारी के हाथो किसी वन में भटकते हुए होगी।

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