धर्म

श्रीफल को माना जाता है त्रिदेव का अंश।

Janprahar Desk
2 July 2020 8:40 PM GMT
श्रीफल को माना जाता है त्रिदेव का अंश।
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 हिंदू संस्कृति में ऐसे बहुत से काम हैं, जो महिलाओं के लिए निषेध हैं, लेकिन इनके पीछे हिंदू-संस्कृति में कई कारण दिए हैं। ऐसे ही कुछ वर्जित कार्यों में से एक है महिलाओं का नारियल ना फोड़ना। हमारे हिन्दू समाज में यह परम्परा युगों से चली आ रही है, किसी भी शुभ कार्य अथवा रीति-रिवाजों में श्रीफल वितरण किया जाता है। जब विवाह सुनिश्चित हो जाए या तिलक लगाने का कार्य हो तब श्रीफल भेंट किया जाता है। नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है।

जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर प्रकट हुए। तब स्वर्ग से वे अपने साथ तीन चीज़े  लाए थे। जिनमें पहली थीं माता लक्ष्मी, दूसरी कामधेनु गाय तथा तीसरी वस्तु थी नारियल का वृक्ष। नारियल भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का फल है इसी कारण नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है। नारियल में त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का वास माना जाता है।

नारियल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है तथा श्रीफल में स्थित तीन नेत्रों जैसी आकृति भगवान शिव के त्रिनेत्र को प्रदर्शित करती है। अलग अलग देवी या देवताओं को श्री फल चढ़ाने से मनुष्यो की अनेक समस्याओं का समाधान होता है और सुख समृद्वि की प्राप्ति होती है।  हिन्दू सनातन धर्म की सभी पूजा में नारियल को महत्वपूर्ण माना गया है। धर्म से संबंधित वैदिक या दैविक कार्य वह नारियल के बिना अधूरा माना जाता है। यह प्रथा हमारे समाज में युगो से चली आयी।

कन्या के विवाह उपरांत विदाई के समय पिता के द्वारा अपनी पुत्री को धन के साथ श्रीफल भेंट दिया जाता है और अंतिम संस्कार के क्रियाकर्म में भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं, धार्मिक अनुष्ठान और कामों में सूखे नारियल के साथ हवन किया जाता है। कलश स्थापना करना हो या किसी का सम्मान करना हो या भगवान को भोग लगाना हो नारियल के बिना यह सब विधियां पूरी नहीं होती। ऐसे में मान्यता है कि नारियल ईश्वर को अर्पित करने के बाद पुरूष ही इसे फोड़ते हैं। हर पूजा का अंत नारियल के बिना पूर्ण नहीं होता, पूजा के अंत में नारियल फोड़ना आवश्यक होता है।

लेकिन विशेष बात यह है कि नारियल को हमेशा पुरुष ही फोड़ते है स्त्रियों द्वारा नारियल को नहीं फोड़ा जाता। क्योंकि नारियल एक बीज फल है जो  उत्पादन या प्रजनन का कारक है। नारियल को प्रजनन क्षमता से जोड़ा गया है। गर्भावस्था में स्त्रियों को नारियल के बीज खाने की सलह दी जाती है। स्त्रियां बीज रूप में ही शिशु को जन्म देती है। इसी कारण स्त्रियों को बीज रूपी नारियल को नहीं फोड़ना चाहिए। एक तरह से स्त्रियों द्वारा नारियल फोड़ना जीव हत्या करना माना जाता है। ऐसा करना शास्त्र, वैद एवं पुरण में अशुभ माना गया है। देवी देवताओं की पूजा साधना के बाद केवल पुरुषों द्वारा ही नारियल को फोड़ा जा सकता है।

इसके पीछे का रहस्य इस पौराणिक कथा में छुपा है। जब विश्व का निर्माण करने के लिए ब्रह्मा निकले तो उन्होंने विश्व का निर्माण करने से पहले नारियल का निर्माण किया। माना जाता है नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इस कारण से भी महिलाओं को नारियल से दूर रखा जाता है। अब क्योंकि माहिलाएं शिशुओं को जन्म देती हैं, जिससे इस संसार का चक्र चलता रहता है। ऐसे में नारियल को फोड़ने का मतलब बीज को फोड़ने के समान है। यही कारण है कि बच्चे को जन्म देने वाली महिला स्वयं एक बीज को कैसे हानि पहुंचा सकती है। इसलिए माहिलाओं को नारियल फोड़ने से रोका जाता है।

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