भारत के इन 5 मंदिरों में पुरुषों की नहीं है एंट्री, जानिए इनसे जुड़ी मान्यताओं के बारे में

 
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भारत विभिन्न धर्मों के साथ विभिन्न मान्यताओं वाला देश है। भारत मे ऐसे कई मंदिर भी है जहां की मान्यताएं भी अजीबोगरीब है। अपने ऐसे को मंदिरों के बारे में सुना होगा जहां पर गैर हिंदू का जाना वर्जित होता है। लेकिन क्या अपने कुछ ऐसे मंदिरों के बारें में सुना है जहां पर पुरुषों को जाने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं है। वहां पर सिर्फ महिलाएं ही पूजा करती है। हालांकि इसके पीछे भी कुछ मान्यताएं ही है। तो चलिए आपको भारत के कुछ ऐसे ही धार्मिक स्थलों के बारे में बताते है जहां पर पुरुषों का जाना वर्जित है। 

ब्रह्मा मंदिर - राजस्थान के अजमेर जिले में स्थिति इस मंदिर के गर्भगृह में पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है। कमाल की बात है कि ब्रह्मा देवता के इकलौते मंदिर प्राचीन मंदिर में पुरुषों को ही जाने की अनुमति नहीं है। 

इसके पीछे की मान्यता ये है कि एक बार ब्रह्मा देवता सरस्वती माता के साथ यज्ञ करने वाले थे, लेकिन देवी सरस्वती विलंभ से पहुंची तो ब्रह्मा देवता ने देवी गायत्री से शादी करके यज्ञ पूरा किया। जिसके बाद देवी गायत्री ने यह श्राप दिया कि इस मंदिर में आज के बाद कोई भी पुरुष नहीं आएगा। अगर कोई कोई पुरुष आता भी है तो उसका वैवाहिक जीवन कष्टों से भरा होगा। 

कामाख्या मंदिर - गुवाहाटी की नीलांचल पहाड़ी पर  स्थिति इस मंदिर को हर साल चार दिन के लिए बंद कर दिया जाता है। इस दौरान पुरुषों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती है। इन चार दिनों में पूजापाठ के लिए सिर्फ महिलाएं या संन्यासी पुरुष ही जा सकते है।

मान्यता है कि जून महीने के दौरान कामाख्या देवी के मासिक धर्म का समय होता है इसलिए इन दिनों में पुरुषों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है। बता दें कि जून के महीने में हर साल यहां पर अंबुबाची मेले का आयोजन होता है, जहां दूर-दराज के लोग आते है। 

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कन्याकुमारी मंदिर - 52 शक्ति पीठों में से एक माने जाने वाले इस मंदिर में साल के 365 दिनों में से किसी भी दिन पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर के परिसर में शादीशुदा पुरुष नहीं जा सकते, जबकि मंदिर के द्वार तक सिर्फ संन्यासी पुरुष ही जा सकते है। 

पुराणों के अनुसार कन्याकुमारी मंदिर के अंदर सती माता के रीढ़ का हिस्सा और दाहिना कंधा गिरा था। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इसी स्थान पर भावगाव शिव ने माता पार्वती के साथ विवाह किया था। इस दौरान भवगान शिव ने माता पार्वती को अपमानित किया। तभी से इस धार्मिक स्थल पर पुरुषों के जाने पर रोक है।

चंदौली का प्राचीन मंदिर - यूपी के चंदौली जिले में स्थिति यह प्राचीन मंदिर एक महान संत श्रीपथ की याद में यह स्थापित किया गया था। यह मंदिर तकरीबन 120 साल पुराना है। यहां पर भी पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है। 

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बताया जाता है कि संत श्रीपथ ने बेटों की हार और बेटियों के विजय की कामना से यह मंदिर स्थापित किया था। ऐसा माना जाता है कि अगर इस मंदिर में कोई पुरुष गया तो उसे आजीवन हार का सामना करना पड़ेगा और उसकी जिंदगी में सिर्फ नीरस होगा। 

मुजफ्फरपुर का माता मंदिर- इस प्राचीन मंदिर को  कामाख्या देवी की तरह ही एक शक्ति पीठ माना जाता है। इस मंदिर में भी देवी के मासिक धर्म के दौरान पुरुषों को जाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। इस मंदिर के नियम इतने कड़े है कि मासिक चक्र के दौरान महिलाएं ही आरती और पूजा करती है। 

माता के मासिक धर्म के दौरान मंदिर में वहां के पुजारी भी परिसर में दाखिल नहीं हो सकता है। कहा जाता है कि मासिक धर्म के दौरान अगर पुरुष मंदिर परिसर में दाखिल हुए तो उसे माता का श्राप लगता है।

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