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भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं किया था इस मंदिर का निर्माण।

Janprahar Desk
9 July 2020 7:57 AM GMT
भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं किया था इस मंदिर का निर्माण।
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आज मैं आपको एक अजब गजब सूर्य मंदिर की रहस्यमई जानकारी बताने वाली हु कहा जाता है की इस मंदिर में चमत्कार से अपने आप मंदिर ने बदल दी थी दिशा। भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में किया था मंदिर का निर्माण।

भारत में वैसे तो कई प्राचीन सूर्य मंदिर है लेकिन हम आपको एक जादुई सूर्य मंदिर के बारे में बताने वाले हैं यह खास मंदिर बिहार के औरंगाबाद जिले में है जिसके बारे में लोग बताते हैं कि इस मंदिर ने खुद ही अपनी दिशा बदल ली थी। तो वहीं इसकी एक और खासियत है जिस वजह से लोग इस मंदिर को मुरादों का मंदिर कहते हैं चलिए जानते है इस रहस्य्मय मंदिर के बारे में कुछ और बातें।

दरअसल इस मंदिर के बारे में लोगों का मानना है कि यहां जो भी भक्त अपनी मुरादे लेकर आता है उसकी सभी मुरादें पूरी हो जाती है यह अद्भुत मंदिर अपने अंदर  बहुत से रहस्य समेटे हुए है।

एक कथा के अनुसार एक बार औरंगजेब मंदिरो को तोड़ता हुआ औरंगाबाद के देव पंहुचा जब वह सूर्य मंदिर पहुंचा है तो पुजारियों ने उसे मंदिर को न तोड़ने को लेकर बहुत विनती की इसके बाद औरंगजेब ने पुजारियों के सामने एक शर्त रखी और कहा कि अगर सच में यहाँ भगवान है और इनमें शक्ति है तो इस मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम में हो जाए अगर ऐसा हुआ तो मैं मंदिर को नहीं तोडूंगा।

औरंगजेब की यह बात सुनकर सभी पुजारी हक्के बक्के रह गए क्योंकि अगली सुबह का समय देकर औरंगजेब तो उस समय चला गया था। फिर क्या था उसके बाद पुजारियों ने सूर्य देव से प्रार्थना की और अगली सुबह पूजा के लिए पुजारी जब मंदिर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मंदिर का प्रवेश द्वार दूसरी दिशा यानी पश्चिम में था। बस तभी से सूर्य देव मंदिर का द्वार पश्चिम दिशा में ही है।

आपको बता दें कि देश का यह एकमात्र पश्चिम अभिमुख सूर्य मंदिर है यह सात रथो  से सूर्य की उत्कृष्ट मूर्तियां अपनी तीनों रूपों सुबह में दोपहर में और शाम के समय में विराजमान है। इसके अलावा मंदिर में काली और भूरे पत्थरों की सुंदर कृतियां देखने को मिलती हैं जो कि मंदिर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर देती है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने अपने हाथों से एक रात में किया था। हालाँकि इसके निर्माण के विषय में सही जानकारी किसी के पास नहीं है सूर्य मंदिर को देखने से ऐसा लगता है कि बिना किसी जुड़ाई के पत्थर से ही इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है।

ये अनोखा सूर्य मंदिर दो भागों में बांटा है एक भाग में गर्भ ग्रह है और दूसरा भाग में मुख्य मंडल है करीब 100 फीट ऊंचे इस मंदिर का निर्माण बिना सीमेंट अथवा चुने गारे का प्रयोग किए आयात कार गोलाकार त्रिभुजाकार वगैरह कार आदि कई रूपों में पत्थरो को काटकर बनाया गया है। इस मंदिर पर सोने का कलश है किवदंतियो  के अनुसार यह सोने का कलश यदि कोई चुराने की कोशिश करता है तो वह उसे चिपक कर रह जाता है। हर साल चैत्र मास कार्तिक मास में होने वाले छठ पर्व पर यहां लाखों श्रद्धालु छठ व्रत करने के लिए जुटते हैं।

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