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जानिए क्या है इस अनोखे कुंड भीमकुण्ड का रहस्य ?

Janprahar Desk
15 Jun 2020 6:40 PM GMT
जानिए क्या है इस अनोखे कुंड भीमकुण्ड का रहस्य ?
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 भारत एक ऐसा देश है जो अपनी अद्भुत कला संस्कृति अध्यात्म और अनूठी भौगोलिक संरचना के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है यही नहीं यहां का इतिहास अपने आप में कई रहस्य को समाए हुए हैं |जिसमें से एक है भीमकुंड ऐसा कुंड जिसकी गहराई का आकलन आज तक कोई नहीं कर पाया बड़े से बड़े वैज्ञानिक इस के रहस्य को समझने में फेल हो गए आखिर इस कुंड का ऐतिहासिक रहस्य क्या है चलिए जानते हैं|

विज्ञान चाहे कितनी तरक्की कर ली लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका कोई नहीं जान पाया ऐसा ही कुछ भीम के साथ हुआ जब बड़े से बड़े वैज्ञानिक इसकी गहराई नापने में नाकामयाब रहे।

  • इतिहास:-  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बजना गांव में स्थित है भीम कुंड। यह कठोर चट्टानों की गुफा के बीच बना है प्राचीन समय से ही यह जगह साधना का प्रमुख केंद्र रही है यहां बड़े से बड़े ज्ञानी ऋषि-मुनियों ने साधना की है वर्तमान में यह कुंड है एक टूरिस्ट और रिसर्च का केंद्र बन गया है। इसके बारे में कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि भीमकुंड एक शांत ज्वालामुखी है।
  • पौराणिक कथाएं:-  भीमकुंड की एक कहानी महाभारत से भी जुड़ी है कहते हैं कि कौरवों से हारने के बाद पांडव अज्ञातवास के लिए निकल पड़े जांगले के रस्ते से गुजरते वक्त द्रोपदी को प्यास लगी।  पांचो भाइयो ने मिलकर पानी की खोज की लेकिन भला जंगल  में पानी कहां से मिलता। लंबी दूरी तय करने पर द्रोपदी को और तेज़ी से प्यास लगने लगी द्रोपदी समेत सभी पांडवो का बुरा हाल हो गया काफी मशक्कत के बाद भी जब कोई उपाय नहीं सुजा तो भीम ने  गुस्से में गदा उठाकर जमीन पर जोर से दे मारा।जिससे जमीन की सतह से पानी निकल पड़ा द्रोपदी समेत पांचो पांडवो ने अपनी प्यास भुजायी बस तभी से इसका नाम भीम कुंड पड़ गया।

इसके पीछे एक कहानी और भी है कहा जाता है की इस कुंड को नारद कुंड और नील कुंड भी कहा जाता है एक बार की बात है जब नारद जी आकाश में घूम रहे थे तभी उन्हें एक महिला और पुरुष घायल अवस्था में मिले नारद जी ने जब उनकी बुरी दशा का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वह संगीत के राग रागिनी है वे तभी ठीक हो सकते हैं जब संगीत कला में माहिर गायक सांग गान गए  बस फिर क्या था नारद जी इस कला में माहिर थे उन्होंने बिना रुके सांग गान  गाना शुरू कर दिया इतना मधुर गायन सुन कर देवता भी खुशी से झूमने लगे और इस गायन से  विष्णु भगवान इतने मंत्रमुग्ध हो गए की वो एक जलकुंड में परिवर्तित हो गए तभी से इसका रंग नीला हो गया इस तरह ये जल कुंड नील और नारद कुंड के नाम से जाना जाने लगा।

भीमकुण्ड का रहस्य :-

  • भीमकुंड चट्टाननी पहाड़ पर एक गुफा के अंदर है इसका पानी इतना साफ सुथरा है की जब सूरज की किरणे यहाँ पड़ती  हैं तो इसका पानी अपने अनोखे  रूप में दिखाई देता है पानी में रंगों के कई रूप देखने को मिलते हैं।
  • भीम कुंड का पानी इतना साफ सुथरा और पारदर्शी है कि काफी गहराई तक आसानी से देखी जा सकती हैं। इसके पानी की तुलना मिनरल वाटर से की जाती है।  यही वजह है कि ये अपने आप में अद्भुत है जो अपने भीतर कहीं रहस्य छुपाय हुए हैं।
  • इसका सबसे बड़ा रहस्य यह है कि आज तक कोई भी इसकी गहराई नाप नहीं सका है बड़े से बड़े वैज्ञानिक और गोताखोर इसकी गहराई नापने में असफल रहे।
  • कि पानी की तुलना मिनरल वाटर सीखी जाती है यही वजह है कि भीमकुंड अपने आप में अद्भुत है जो अपने भीतर कई रहस्य समाए हुए हैं।
  • इसका  सबसे बड़ा रहस्य यह है कि आज तक कोई भी इसकी गहराई नाप नहीं सका है बड़े से बड़े वैज्ञानिक और गोताखोर इसकी गहराई नापने में असफल रहे है जब इस रहस्यमयी जल कुंड की  खबर विदेशी चैनलों को मिली तो डिस्कवरी चैनल की एक टीम इंडिया आ पहुंची।टीम अपने साथ कई गोताखोरों को लायी थी उन्होंने कई बार इसमें डुबकी लगाई लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा वो इसके रहस्य और गहराई का सही आंकलन लगाने में असफल रहे उन्हें कोई सबूत नहीं मिला
  • कई बार ऐसा होता है की नदी या तालाब में गए लोग डूब जाते हैं जिसके मर्त शरीर पानी में तैरते हुए ऊपर आ जाता है लेकिनभीम कुंड में ऐसा नहीं है ये ऐसा विचित्र है की यदि कोई इसके पानी में डूब जाए तो उसका मर्त शरीर कभी ऊपर नहीं आता। वह अदृश्य हो जाता है या कहीं गुम हो जाता है।
  • ऐसा भी कहा जाता है की यह कुंड अपने आप में ही कई रहस्यों की खदान है। किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा या अनहोनी का संकेत इस जल कुंड में आसानी से देखा जा सकता है बताते है की इस जल कुंड का जल स्तर अचानक से बढ़ने लगता है वहीं यह भी कहा जाता है कि भूकंप या सुनामी आने के संकेत साफ साफ इसमें देखे गए।  यहां के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें किसी आपदा का पता पहले ही चल जाता है
  •  इसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इसका पानी कभी कम नहीं होता भरपूर मात्रा में पानी का इस्तेमाल होने के बावजूद कुंड के पानी का लेवल कभी नहीं घटता। कई बार खोज की गई लेकिन इसके पानी के स्रोत का पता नहीं चल पाया कोई नहीं जानता कुंड की गहराई।  गहराई का पता लगाने के लिए समय समय पर गोताखोरों को यहां भेजा जाता है लेकिन कुछ हासिल नहीं होता जब गोताखोर ऐसा करके थक गए तो प्रशासनने भीम कुंड के पानी को पंप की मदद से खाली करने की योजना बनाई  ये काम कई दिनों तक जारी रहा लेकिन कुंड के पानी के स्तर में कोई कमी नहीं आई। काफी खोज के बाद भी इसके तल का पता किसी को नहीं चला।  हलाकि 80 फिट की गहराई में पहुंचने पर गोताखोरों को तेज़ जल की धाराए मिली। जिनका लिंक शायद समुद्र से जुड़ा है।
  •  बताते हैं कि इसकी गर्त में दो कुंड है जिस्मे एक से पानी निकलता है और दूसरे में भरता है।  शायद इसी वजह से पानी का भाब तेज़ रहता है और कभी कम नहीं होता।
  • तो देखा आपने भीमकुंड अपने आप में कितने रहस्य छुपाए हुए हैं कि आज तक बड़े से बड़ेवैज्ञानिक भी इसका पता नहीं लगा पाए।  
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