धर्म

जानिए क्या हुआ जब एक गौरेया के गुस्से के आगे समुद्र की भी एक न चली।

Janprahar Desk
13 July 2020 8:36 PM GMT
जानिए क्या हुआ जब एक गौरेया के गुस्से के आगे समुद्र की भी एक न चली।
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दोस्तों आज हम आपको श्रीमद्भगवद्गीता से एक छोटी सी चिड़िया की दृढ़ निश्चय की एक रोचक कहानी बताने जा रहे है जो हमे यह बताती है की कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता यदि हम दृढ़ निश्चय कर ले  तो असंभव कार्य भी ईश्वर की मदद से पूर्ण होता है।

बहुत समय पहले की बात है एक छोटी सी गौरैया समुद्र के किनारे एक गड्ढे में घोंसला बनाकर रहती थी। वहां उस गौरेया ने दो अंडे दिए।  सुबह होने पर अपने अंडों को वहीं छोड़कर वह गौरेया दाना चुगने निकल गई शाम को दाना चुगने के बाद जब गौरैया वापस आई तो उसने देखा उसके अंडे वहां नहीं थे। वह घबरा गई उसने आसपास देखा परंतु उसे कोई नहीं दिखा तब उसने समुद्र से पूछा समुद्र मैंने यहाँ अपनेदो अंडे रखे थे क्या तुमने देखें। समुद्र इठलाते हुए बोला तेरे अंडों का मुझे क्या पता। समुद्र के इठलाने से गौरेया को अंदाजा हो गया कि उसके अंडे समुद्र  ने ही चुराए हैं वह समुद्र से बोली तुम्हारे अलावा यहां और कोई नहीं है इसलिए तुम्हें जरूर पता है कि मेरे अंडे कहां है तुमने ही मेरे अंडे चुराए हैं अब तुम ही मुझे मेरे अंडे वापस करो। गौरैया की यह बात सुनकर समुद्र को हंसी आई और वह अहंकार में बोला मुझे नहीं पता तुम्हारे अंडे कहां हैं ढूंढ सकती हो तो ढूंढ लो।

यह सुनकर गोरिया गुस्से में बोली मेरे अंडे वापस करो नहीं तो मैं पूरे समुद्र का पानी सुखा दूंगी यह सुनकर समुद्र गौरैया पर हंसने लगा। गौरैया गुस्से में समुद्र को देखने लगी समुद्र की लहरें आती और जाती परंतु गौरेया उसे घूर रही। गोरैया बोली समुद्र तुम ऐसे नहीं मानोगे अब मैं तुम्हारा पानी सुखा कर ही रहूंगी ऐसा कह कर गोरिया अपनी चोंच में समुद्र से पानी लेती और किनारे पर डालती इस तरह करते करते उसे सुबह से शाम हो गई शाम के समय अन्य पक्षी उसे देखने आए और बोले गौरेया आज तुम दाना चुगने क्यों नहीं आई ?परंतु गौरैया तो गुस्से में कुछ नहीं बोली बस अपनी चोंच में समुद्र से पानी लेती और किनारे पर डाल देती।

सभी पक्षियों ने उसे बहुत समझाया कि यह कार्य संभव नहीं है समुद्र का पानी कौन सुखा  सकता है लेकिन गौरैया बोली मैंने प्रण किया है मैं इस समुद्र का पानी सुखा कर ही रहूंगी जिससे मेरे अंडे मुझे वापस मिल जाएंगे। ऐसे दृढ़ निश्चय के साथ वह गौरेया अपने कार्य में लगी रही जब वह थक जाती तो थोड़ी देर रुक जाती और फिर अपने कार्य में लग जाती यह सिलसिला 3 से 4 दिनों तक चलता रहा और गौरैया का स्वास्थ्य धीरे-धीरे गिरने लगा।

यह देखकर सभी प्राणी पशु पक्षी हैरान थे सब को उसकी चिंता होने लगी तब सभी पक्षी मिलकर पक्षियों के राजा गरुड़ देव के पास पहुंचे और उनसे बोले महाराज यह नन्ही सी गौरैया अपनी जिद पर अड़ी है और इतनी विशाल समुद्र का पानी सुखाने का प्रयास कर रही है।

यह सुनकर गरुण देव समुद्र तट पर गौरैया के पास पहुंचे और बोले गौरेया क्या हम तुम्हारी कुछ मदद कर दे  हमारी चोंच कुछ बड़ी है गौरेया गुस्से में बोली यह मेरा काम है मुझे करने दो मुझे किसी की मदद नहीं चाहिए।

गरुड़ देव समझ गए की गौरेया अपने बच्चों की चिंता से गुस्से में है तब गरुड़ देव भगवान श्री हरि विष्णु के पास गए और उनसे मदद की विनती करने लगे और बोले प्रभु आप तो सृष्टि के रचयिता हैं अब आप ही कुछ चमत्कार कर सकते हैं  यह नन्ही गौरेया ज़िद में आकर समुद्र का पानी सुखाने की ठान बैठी है जोकि  संभव नहीं है। भगवान विष्णु ने देखा कि गोरिया निरंतर अपने कार्य में लगी है उसके दृढ़ निश्चय को देखकर प्रसन्न होकर भगवान श्री हरि विष्णु ने समुद्र से पीछे हट कर गोरिया को उसके अंडे लौटाने को कहा। भगवान विष्णु की आज्ञा अनुसार समुद्र पीछे हटा और गौरेया ने  उसमें से अपने अंडे निकाल लिए और वह इठलाते  हुए बोली देखा  मैंने कर दिखाया।

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