धर्म

जानिए आखिर कैसे मिल सकता है आपको मरने के बाद स्वर्ग ?

Janprahar Desk
27 Jun 2020 7:28 PM GMT
जानिए आखिर कैसे मिल सकता है आपको मरने के बाद स्वर्ग ?
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गंगा को भारत में केवल एक नदी नहीं बल्कि मां का स्थान प्राप्त है। गंगा भारत की आत्मा भारत के प्राण हैं। भारत में आध्यात्मिक चेतना का विकास हुआ उसमे गंगा का बहुत बड़ा योगदान रहा है।  सनातन धर्म में गंगा को मोक्ष दायिनी कहा गया है इसलिए जीते जी तो इंसान गंगा की आराधना करता है मौत के बाद भी अपने अवशेषों को गंगा में प्रवाहित करने की इच्छा रखता है।

भारत के बहुसंख्यक वर्ग की आखिरी इच्छा अमूमन यही होती है कि उनकी अस्थियों को गंगा के पानी में विसर्जित कर दिया जाए। वैसे तो अस्थि विसर्जन देश की लगभग हर नदी में किया जाता है लेकिन इस काम के लिए गंगा का जल सर्वोत्तम माना जाता है। 

 अपने प्रियजनों के अस्थि विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचते हैं हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास कपाल क्रिया और अस्थि विसर्जन किया जाता है। ऐसे करने के पीछे कारण है गंगा का इतिहास।

गरुण पुराण सहित अनेक ग्रंथो में लिखा है की की गंगा कोई साधारण नदी नहीं है ,और गंगा का जल भी साधारण जल नहीं है। असल में गंगा नदी स्वर्ग से निकली नदी है जिसे भागीरथ अपनी तपस्या से पृथ्वी पर लेकर आए थे। भगवान विष्णु के पैरों से गंगा ब्रह्मा के कमंडल में पहुंची वहां से गंगा की एक धारा धरती पर आई जिसे भोलेनाथ ने अपनी जटाओ में स्थान दिया।

माना जाता है की गंगा भले ही गंगा सागर पहुंचकर समुद्र में मिल जाती है लेकिन गंगा के पानी में बहने वाली अस्थियो  से पितरों को सीधे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। गंगा का मूल निवास आज भी स्वर्ग माना गया है। इसी सोच के साथ मृत्यु के बाद अस्थियां गंगा में बहायी जाती है। जिससे मृत आत्मा को भी स्वर्ग की प्राप्ति हो।

इसके अलावा माना जाता है की मानवीय देह पांच तत्वों जल ,अग्नि, वायुआकाश और पृथ्वी से मिलकर बनी होती है। मृत्यु के बाद शरीर की अस्थि को नदी में बहा कर शरीर को फिर से पांच तत्वों को सौंप दिया जाता है। अस्थियो को विशेष कर गंगा नदी में इसलिए बहाया जाता है क्योंकि भारतीय जनमानस के अंतिम इच्छा होती है।

गंगा का पानी जिन अस्थियो को प्राप्त हो जाता है उन्हें सद्गति प्राप्त होती है।

गंगा के विषय में एक और कहानी प्रचलित है। जिसके अनुसार एक शिकारी ने जीवन में कभी कोई अच्छा कार्य नहीं किया था जीवन भर जानवरों का शिकार करता रहा। और कभी भी एक भी कार्य परोपकार का नहीं किया एक दिन एक बाघ का शिकार करते हुए पीछे से दूसरे बाघ  ने उस पर हमला कर दिया और उसे मार डाला उसके बाद वे शिकारी के मांस को खा गए आखिर में बचा हुआ थोड़ा मांस गिद्ध आकर नोचने लगे कुछ गिद्ध उसकी हड्डी मुँह में लेकर गंगा के तट तक जा पहुंचे। इधर शिकारी के कर्मो का लेखा जोखा देखा गया तो यमराज ने शिकारी को घोर नर्क में डालने का फैसला लिया। किन्तु देवलोक से उसके स्थूल शरीर की हड्डी गंगा के ऊपर से उड़ते हुए गिद्ध के मुंह से छूट गई और गंगा नदी में गिर गई ऐसा होते ही अचानक उसके पुण्य का पलड़ा भारी हो गया और यमराज को स्वर्ग में भेजना पड़ा।

ऐसी अनेक कहानिया लोकमान्यताओं में सुनाई जाती है  जिससे जनता के मन में ये इच्छा घर कर जाती है की गंगा में अस्थिया बहाये बिना उन्हें मोक्ष प्राप्त  सकेगा और इस मान्यता को पूरा करने के लिए लोग अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां गंगा में विसर्जित करते हैं। और किसी भी भी अंतिम इच्छा को पूर्ण करना हर धर्म  में एक श्रेष्ठ कार्य समझा जाता है। इन मान्यताओं के चलते गंगा में अस्थियों का विसर्जन किया जाता रहा है।

तो दोस्तों अब आप समझ ही गए होंगे की आखिर गंगा में अस्थिया बहाने के पीछे क्या कारण है और कैसे आप गंगा में अस्थिया बहा कर अपने पितरो को मोक्ष की प्राप्ति करा सकते है।

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