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क्या आज भी जीवित है हनुमान जी।

Janprahar Desk
1 July 2020 10:31 PM GMT
क्या आज भी जीवित है हनुमान जी।
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महा शक्तिमान महा ज्ञानी भक्तों में सबसे प्रिय महाबली हनुमान जी इतिहास के वह किरदार जिनकी भक्ति और निष्ठा की मिसाले दी जाती हैं भगवान शिव के वह भक्त जिनकी  समानता ना कभी इतिहास में की जा सके और ना ही भविष्य में की जा सकेगी और आज मैं आपको बताने वाली हु कुछ ऐसी बाते  जो यह साबित करते हैं कि हनुमान जी आज भी जिंदा है और हमारे आसपास ही किसी रूप में हैं।

हनुमान जी की शक्ति अपार थी रामायण काल में भी हनुमान जी ने अपनी शक्ति को उच्चतम स्तर तक पहुंचाया ही नहीं क्योंकि अगर ऐसा हुआ होता तो लंका का विनाश हो कुछ ही क्षणों में कर देते। हनुमान जी को अमरत्व का वरदान हासिल था और वह कलयुग के अंत तक धरती लोक पर विराजमान रहेंगे हनुमान जी के जीवित होने के सबूत बताने से पहले बात करते हैं कि रामायण के बाद हनुमान जी कहां गए ?

दरअसल रामायण में भी बताया गया है कि श्रीराम के धरती छोड़ने तक हनुमान जी अयोध्या में ही उनकी सेवा करते रहे और उसके बाद उन्होंने वन को ही अपना निवास स्थान बनाया उसी के बाद त्रेता युग का अंत हुआ और द्वापर युग का प्रारंभ हुआ।

द्वापर युग में भी हनुमान जी का जिक्र दो बार हुआ है पहली बार जब भीम जंगल में थे तब उन्हें एक बुजुर्ग वानर मिला जब भीम ने उस वानर को रास्ते से हटने को कहा तो उस वानर ने कहा कि अब इस उम्र में मुझ में इतनी शक्ति नहीं है तुम ही मुझे रास्ते से हटा दो इसके बाद घमंड से चूर भीम ने पूरा प्रयास किया लेकिन वह उस वानर की पूछ तक नहीं हिला सका तब भीम को समझ आया कि वह कोई साधारण वानर नहीं बल्कि स्वयं हनुमान जी हैं। जो भीम को  घमंड छोड़ने का सबक देने  आए थे।

इसके बाद भी हनुमान जी अर्जुन के रथ पर ध्वज बनकर पूरे महाभारत युद्ध में उनके साथ रहे अंत में जब हनुमान जी अपने असली रूप में आए और वहां से चले गए तब वह रथ भी राख  बन गया। जब अर्जुन ने श्री कृष्ण से इसका कारण पूछा तो श्री कृष्ण ने बताया कि वह हनुमान जी ही थे जिस कारण उनके रथ  को कुछ नहीं हुआ वरना इतने विनाशक अस्त्रों के सामने उनका रथ कभी भी टिक नहीं सकता था इस तरह हनुमान जी ने महाभारत काल में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दी।

इसके बाद कलयुग में भी हनुमान जी की बातें आपको सुनने को मिल जाएंगी इंडोनेशिया कंबोडिया में भी अलग-अलग नामों से आपको हनुमान जी की कहानियां सुनने को मिल जाएंगी। अफ़्रीका से लेकर अमेरिका तक शक्तिशाली वानर के आज भी जिंदा होने की बातें की जाती है। १४ वी सदी में ऋषि मध्वाचार्य ने  हनुमान जी से भेट होने की बात की थी. 13 वी सदी में तुलसीदास जी ने भी बताया था कि हनुमानजी ने उन्हें रामचरितमानस लिखने के लिए प्रेरित किया था। उसके बाद भी कई साधु संतों ने हनुमान जी से मिलने या उन्हें देखने का दावा किया।

अब अगर बात करें हनुमान जी के जिंदा होने के सबूतों के बारे में तो आप गिन भी नहीं पाओगे। श्रीलंका में एक कबीला है जिसे मातंग कबीला कहा जाता है इस कबीले के लोगों को किसी से कम नहीं माना जाता क्योंकि उनकी मानसिक सहनशीलता और विलक्षण गुण उन्हें बाकियों से अलग करते हैं। उनका आज भी मानना है कि हनुमानजी हर 41 साल बाद उनसे मिलने आते हैं और ज्ञान देकर जाते हैं यही ज्ञान उनकी आत्मिक शांति को स्थाई बनाए रखता है। कई लोग इसे सच नहीं मानते लेकिन श्रीलंका और दक्षिण भारत में कई विशाल पैरों के निशान मिले हैं जिसे वैज्ञानिक भी मान चुके हैं आज वैज्ञानिक इंसानों को होमोसेपियंस मानते हैं उनका भी मानना है इंसानों की तरह ही 8 से 1000000 साल पहले अलग ढांचे  वाली प्रजातियां भी थी कई प्रजातियां जिनका शरीर हम से भी कहीं ज्यादा बढ़ा था यह प्रजातियां लुप्त हो गई लेकिन होमोसेपियंस अब तक बच  पाई।

आज भी अमेरिका और कई अन्य देशों में वानर जैसे शरीर वाले इंसानों को देखे जाने की खबरें मिलती रहती हैं हम अपने ही धर्म में हनुमान जी के अस्तित्व को नकारते हैं वहीं अमेरिका और कई अन्य देशों में वानर देव की पूजा की जाती है। अमेरिका में प्राचीन वानर देव का मंदिर मिला है जिस की मूर्तियों की बनावट हनुमान जी से मिलती है वहां की प्राचीन कथाओं में भी वानर देव को अमर ही माना जाता है हनुमान जी ने वरदान से अमरत्व को हासिल किया था और वह कलयुग के अंत तक धरती लोक पर ही विराजमान रहेंगे जब कल्कि अवतार अधर्म का अंत करेंगे और धर्म की स्थापना करेंगे तब हनुमान जी भक्ति में लीन हो जाएंगे।

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