धर्म

महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने बचाई थी कर्ण की जान।

Janprahar Desk
5 July 2020 8:42 PM GMT
महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने बचाई थी कर्ण की जान।
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महाभारत के बारे में तो आप सभी ने पढ़ा होगा यहां तक कि सुना भी होगा लेकिन हम बात कर रहे हैं महाभारत के उस क्षण कि जब महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण को बचानी पड़ी थी कर्ण  की जान।

अगर वह करण की जान नहीं बचाते तो स्वयं हनुमान जी कर्ण का सर्वनाश कर देते इस  बारे में सब कुछ जानने के लिए आपको ये आर्टिकल अंत तक पढ़ना पड़ेगा।

पुराणों में अक्सर ऐसा पढ़ने में आता है कि महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ पर बैठे हनुमान जी कभी-कभी खड़े हो गए कौरवों की सेना की ओर घूरकर  देखते थे तो उस समय कौरवों की सेना तूफान की गति से युद्ध भूमि को छोड़ कर भाग जाती थी। हनुमान जी की दृष्टि  का सामना करने का साहस किसी में नहीं था यहां तक कि उनकी दृष्टी एक बार कौरवो  की ओर से लड़ रहे कर्ण पर जा पड़ी वो तो भगवान श्री कृष्ण थे जिन्होंने कर्ण को बचा लिया वरना वह कब के हनुमान जी की दृष्टि से ही खत्म हो जाते हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते है

जब कर्ण  और अर्जुन के बीच में युद्ध चल रहा था तो कर्ण अर्जुन पर भयंकर बाणों की वर्षा कर रहे थे उनके बाणों की वर्षा से श्री कृष्ण को भी बाण लग रहे थे उनके बाण  से श्रीकृष्ण कवच कट कर गिर पड़ा और उनके सुकुमार अंगो पर बाण लगने लगे। एक बाण तो इतना घातक था कि उसने सीधे आकर भगवान श्री कृष्ण के दाहिने हाथ पर घाव बना दिया।

रथ की छत पर बैठे पवन पुत्र हनुमान जी एक टक नीचे अपने आराध्य की ओर ही देख रहे थे श्री कृष्ण कवच हीन  हो गए और कर्ण के बाण उनके अंगों को भेद रहे थे। हनुमान जी से यह सहन नहीं हुआ और उसी समय वह गर्जना  कर कर दोनों हाथ उठाकर कर्ण  को मार देने के लिए खड़े हुए। उस समय हनुमान जी की भयंकर गर्जना से ऐसा लगा मानों ब्रह्मण्ड फट गया हो कौरव सेना तो पहले ही भाग चुकी थी और अब  पांडव पक्ष की सेना भी उनके गर्जन से भागने लगी।

साक्षात हनुमान जी का क्रोध देखकर कर्ण के हाथ से धनुष छूटकर नीचे गिर गया उन्हें  भी लगने लगा कि आप उनका अंतिम समय आ चुका है। भगवान श्री कृष्ण ने तत्काल उठकर अपना दाया हाथ उठाया और हनुमान जी को स्पर्श कर कर सावधान किया और बोले तुम्हारे क्रोध  करने का समय नहीं है श्री कृष्ण के स्पर्श से हनुमान जी रुक तो गए लेकिन उनकी पूंछ  खड़ी होकर आकाश में हिल रही थी उनके दोनों हाथों की मुठिया बंद थी उनकी आंखें ऐसी लग रही थी मनो उनमे आग भरी हो वैसे यह होना ही था क्योंकि हनुमान जी भगवान राम के भक्त हैं और स्वयं राम ही भगवान विष्णु थे और विष्णु का अवतार थे भगवान श्रीकृष्ण ऐसे में अपने आराध्य देव को परेशान देखकर हनुमान जी का क्रोध बढ़ने लगा हनुमान जी का क्रोध देखकर कर्ण और उनके साथी कांपने लगे।

हनुमान जी का क्रोध शांत ना होते देखकर कृष्ण ने कड़े स्वर में हनुमान जी से कहा मेरी और देखो अगर तुम इस प्रकार कर्ण  की ओर कुछ क्षण देखोगे तो कर्ण तुम्हारी दृष्टि से ही मर जाएगा। ये त्रेता युग नहीं है  तुम्हारे पराक्रम और तुम्हारी शक्ति को तो दूर तुम्हारे तेज को भी कोई यहां सहन नहीं कर सकता तुमको मैंने इस युद्ध में  शांत रहकर बैठने को कहा है।

यह सब सुनकर हनुमानजी ने अपने आराध्य देव की ओर नीचे देखा और शांत होकर बैठ गए लेकिन वह क्षण इतना भयंकर था कि उसने पूरी तरह से कर्ण को झिंझोड़  कर रख दिया क्योंकि उन्हें यह भी लगा कि उनकी मौत निश्चित है क्योंकि स्वयं हनुमान जी किसी और का नहीं बल्कि भगवान शंकर का अवतार है ऐसे में अवतार का गुस्सा होना यह दर्शाता है कि उनसे कोई और नहीं देवों के देव महादेव रूठ गए हैं यही  वो पल  था जब भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण की जान हनुमान जी से बचाए।

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