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हिन्दू धर्म में सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं करते अंतिम संस्कार और आखिर क्यों महिलाये नहीं जाती है शमशान ?

Janprahar Desk
22 Jun 2020 5:12 PM GMT
हिन्दू धर्म में सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं करते अंतिम संस्कार और आखिर क्यों महिलाये नहीं जाती है शमशान ?
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दुनिया में हिंदू धर्म केवल एक ऐसा धर्म है जिस में न जाने कितने रीति-रिवाज और परंपराएं हैं हिंदू धर्म में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार होते हैं। व्यक्ति की जिंदगी में जो आखिरी संस्कार होता है वह अंतिम संस्कार होता है।

गरुड़ पुराण में माना जाता है कि किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर के तेरह दिनों की छूट के बाद के घर का शुद्धिकरण किया जाता है। इसी तरह इस पुराण में अंतिम संस्कार से संबंधित कई बातें बताई गई हैं।

आज मैं आपको अपने इस आर्टिकल की मदद से उन सभी बातों में से कुछ बातो के बारे में बताउंगी। जैसे आखिर कभी भी क्यों सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं होता ?इतना ही नहीं है छेद वाले मटकी में जल भरकर क्यों शव के चारो और परिक्रमा की जाती है ?इन सब सवालों के बारे में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है।

इस पुराण के अनुसार सूर्यास्त के बाद कभी भी दाह संस्कार नहीं किया जाता अगर किसी की मृत्यु रात को हुई हो तो उसका दाह संस्कार अगले दिन ही किया जाता है।  ऐसा माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से मृतक व्यक्ति की आत्मा को परलोक में कष्ट भोगना पड़ता है और अगले जन्म में उसके किसी अंग में खराबी हो सकती है। इसी कारण सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार नहीं किया जाता है।

अब जानते है की आखिर क्यों करते हैं छेद वाली मटकी में जल भरकर परिक्रमा अगर आप ध्यान दें तो जब दाह संस्कार किया जाता है उस समय एक छेद वाली मटकी में जल लेकर शव की परिक्रमा की जाती है और इसे पटक कर फोड़ दिया जाता है। माना जाता है कि मृतक व्यक्ति की आत्मा का उसके शरीर से मोह भंग करने के लिए ये किया जाता है लेकिन इसके पीछे एक और रहस्य  हैं कहा जाता है कि हमारा जीवन मटकी की तरह व्रत होता है जिस में भरा पानी हमारा समय होता है इसका मतलब है कि यह आयु रूपी पानी हर पल टपकता रहता है और अंत में व्यक्ति सब को छोड़कर परमात्मा के पास चला जाता है।

आपने गौर किया होगा कि व्यक्ति के अंतिम संस्कार में कभी भी महिलाएं शामिल नहीं होती हैं क्यों महिलाओं को इससे वंचित किया जाता है?

 ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अंतिम संस्कार का समय ऐसा होता है जहां हिंदू रिवाज के तहत औरतों का जाना मना होता है अक्सर अंतिम संस्कार के बाद पूरे घर की सफाई की जाती है जिससे नकारात्मक शक्ति घर में ना रहे।  इसलिए घर के कामों के लिए महिलाओं को घर पर रखा जाता है।

यह भी कहते हैं कि भूत सबसे पहले अपना निशाना महिलाओं को बनाते हैं इसलिए उन्हें श्मशान घाट नहीं ले जाया जाता। हिंदू रिवाज के हिसाब से जो अंतिम संस्कार करने जाता है उसे गंजा होना पड़ता है गंजापन औरतों और लड़कियों को नहीं सुहाता इसलिए औरतों को अंतिम संस्कार में नहीं ले जाया जा सकता।

कहा जाता है कि लड़कियां बहुत नरम दिल की होती है और किसी अपने के मरने के बाद अपना रोना रोक नहीं पाती ऐसे में श्मशान घाट पर रोना  यानी मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को शांति न मिल पाना। हमारे अपने को मरने के बाद शांति मिले इसलिए औरतो को अंतिम संस्कार में शामिल नहीं किया जाता।

तो दोस्तों  अंतिम संस्कार से सम्बंधित कुछ ऐसी बाते और कुछ ऐसे सवालो के जबाब जो सामन्यता हर किसी के मन में आते है और ये सवाल इंसान को बहुत कुछ सोचने पर भी मजबूर कर देते है।  लेकिन शायद आज इस आर्टिकल की मदद से आपको आपके कुछ सवालो का जवाव मिल गया होगा।

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