धर्म

कैसे पाए शनि की साडे साती से मुक्ति ?

Janprahar Desk
11 July 2020 9:28 PM GMT
कैसे पाए शनि की साडे साती से मुक्ति ?
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देश का एकमात्र शनि मंदिर। इस मंदिर में अपनी पत्नी के साथ विराजमान है शनि देव। पति और पत्नी को एक साथ पूजा करना है अनिवार्य।

देश के अलग-अलग हिस्सों में शनि देव के कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर मौजूद है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शनि मंदिर के बारे में बताने वाले हैं जो बाकी  मंदिरों से अलग है।

छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मंदिर है जहां शनिदेव अपनी पत्नी के साथ विराजित है एक तरफ जहां शनि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है वही ये एक अनोखा मंदिर है। आपको बता दें कि शनिदेव का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के 1 जिले कर्वधा में स्थित है जहां भोरमदेव मार्ग से 15 किलोमीटर दूर एक गांव छापरी स्थित है जहां से 500 किलोमीटर दूर मड़वा महल है। जहां से टेढ़े मेढ़े पथरीले रास्तों को पार करते हुए गांव करियामा आता है जहां यह मंदिर स्थित है इस मंदिर में शनि देव अपनी पत्नी स्वामिनी के साथ पूजे जाते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार यह देश का एकमात्र मंदिर है जहां शनिदेव और उनकी पत्नी की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान है। यहां के पुरोहितों के मुताबिक वह काफी लंबे समय से भगवान शनिदेव की पूजा करने के लिए करियामा जाते रहे हैं लगातार तेल डालने की वजह से प्रतिमा पर धूल मिट्टी की काफी मोटी परत जम चुकी थी। एक दिन इस प्रतिमा को साफ किया गया तो वही शनिदेव के साथ उनकी पत्नी देवी स्वामिनी की भी प्रतिमा मिली।

आपको बता दें कि इस मंदिर को देश का एकमात्र सपत्नीक शनिदेवालय  का दर्जा मिला है। बाकी स्थानों पर शनिदेव की अकेली प्रतिमा स्थापित है।  ये शनि मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ  पति पत्नी दोनों एक साथ शनि की पूजा अर्चना करने आते हैं।

आपको बता दें कि इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से श्रद्धा पूर्वक अपनी इच्छा लेकर आते हैं वह खाली हाथ नहीं जाते उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं धर्म ग्रंथों के अनुसार बताया जाता है कि ऐसी मान्यता है कि जब पांडवों को वनवास काल मिला था तो इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने करवाई थी।

आसपास के लोगों ने बताते है की यहाँ  पूजा करने से पति पत्नी के रिश्ते में कोई बाधा नहीं आती उनका शादीशुदा जीवन सरलता से चलता है। जबकि देश की सबसे प्राचीन शनि मंदिर में से एक शनि शिंगणापुर में भी पहले महिलाओं का प्रवेश वर्जित था लेकिन महिलाओं को भी पूजा करने का अधिकार मिल गया है।

इस शनिदेव के मंदिर के साथ एक और मान्यता जुड़ी हुई है मान्यता प्रचलित है की  जो भी पति पत्नी एक साथ मंदिर में आकर दोनों श्रद्धा पूर्वक अपनी माथा टेकते हैं और सरसों का तेल चढ़ाते हैं ऐसा करने से पति पत्नी दोनों का जीवन धन्य हो जाता है और उनका जीवन सुखमय  हो जाता है। साथ ही यहां पर अगर कोई भी व्यक्ति सरसों का तेल चढ़ा कर अपना माथा शनि देव के चरणों में टिकता है तो उनको जीवन से साडे साती  की महादशा से मुक्ति मिल जाती है।

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