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मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और श्राद्ध

Janprahar Desk
6 Feb 2021 5:26 PM GMT
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और श्राद्ध
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मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और श्राद्ध

वाराणसी, 6 फरवरी । मौनी अमावस्या पर मौन रहकर मां गंगा में स्नान करने वालों को शुभ फल प्राप्त होंगे। अमावस्या तिथि में गंगा स्नान, दान और श्राद्ध के साथ पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व भी है। चंद्रमा व सूर्य के मकर राशि में, एक साथ होने से मौनी अमावस्या का संयोग बनता है। मौनी अमावस्या का महापर्व 11 फरवरी को मनाया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि बुधवार 10 फरवरी को रात 1:09 बजे लगेगी और बृहस्पतिपवार 11 फरवरी को रात 12:36 बजे तक रहेगी। बृहस्पतिवार को पूरे दिन अमावस्या का मान रहेगा। पितरों की शांति के लिए श्राद्ध भी किए जाएंगे। इस दिन मौन रहकर स्नान करने की धार्मिक मान्यता है। इस दिन शुभ संयोग में गंगा स्नान के बाद दान पुण्य का फल मिलता है।


ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि मौनी अमावस्या पर पीपल के वृक्ष के समक्ष भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ परिक्रमा से आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर दान मेरू समान फल देने वाला होता है। पितरों के निमित्त कांसे के खाली बर्तन में दूध, जल, काले तिल, काले वस्त्र, स्वर्ण और गेहूं आदि का दान करना लाभकारी माना गया है।

शनि, राहु एवं केतु ग्रह की शांति के लिए काले तिल, तिल का तेल, सरसों का तेल एवं काले रंग की वस्तुओं का दान करना विशेष फलदायी है।

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