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इस मंदिर में हर मन्नत होती है 30 दिन में पूरी

Janprahar Desk
10 July 2020 7:40 PM GMT
इस मंदिर में हर मन्नत होती है 30 दिन में पूरी
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बप्पा के इस द्वार में जो मांगो वह मिलता है 30 दिन में हो जाती है हर मनोकामना पूरी। हलवाई गणेश मंदिर की कहानी है आश्चर्यजनक।

गणेश जी के देशभर में कई मंदिर है लेकिन पुणे  की हलवाई मंदिर बहुत ही अनोखा है मंदिर की भव्यता को देखकर आंखें चौक जाती है वही  गणपति बप्पा की महिमा भी बेहद निराली है। कहा जाता है कि पूरे श्रीमंत दगड़ुशेठ हलवाई गणपति मंदिर में मांगी गई असंभव से संभव मदद भी 30 दिन में पूरी होती है।

चलिए मंदिर से जुड़े तथ्य जानते हैं दरअसल मंदिर का निर्माण दगडूशेठ हलवाई द्वारा कराया गया था। इस मंदिर से जुड़ी एक कहानी लोगों के बीच बहुत प्रचलित है बता दें कि दगड़ुशेठ गणवे एक व्यापारी और हलवाई थे जो कोलकाता से आकर पुणे में बस गए थे। उन्होंने हलवाई के रूप में ख्याति पाई और लोगों ने उन्हें हलवाई उपनाम दे दिया और इस तरह लोगों के बीच वह दगडुशेठ हलवाई के नाम से प्रसिद्ध हो गए और फिर धीरे-धीरे दगडूशेठ एक समृद्ध व्यापारी और नामचीन हलवाई बन गए और भगवान की असीम अनुकंपा उन पर बनी रही है।

दुर्भाग्य से 18 वि सदी में प्लेग की महामारी में उनके बेटे का देहांत हो गया। पुत्र की अकाल मृत्यु से दगडूशेठ शोक में चले गए और उनकी पत्नी भी अवसाद से घिर गई। यह सब देख उनके आध्यात्मिक गुरू श्री माधवनाथ महाराज ने उन्हें इस दुख से उबरने के लिए भगवान गणेश का एक मंदिर बनवाने का सुझाव दिया इसके बाद दगडूशेठ हलवाई ने पुणे में गणपति जी के मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर अपनी भव्यता और यहां आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होने के कारण प्रसिद्ध है।

कहते हैं बप्पा के दर से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता यहां बप्पा 30 दिनों में भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। कहते हैं यह मंदिर से दगडुशेठ हलवाई और पुणे के  गोडसे परिवार की  श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है।

तो वही  वस्तु के लिहाज से भी यह मंदिर बहुत है मंदिर के मुख्य मंडप की दीवारों पर उभरी आदि  शक्तियों का अद्भुत प्रतीक है कि बप्पा स्वयं इस ऐश्वर्या में नहीं विराजते बल्कि उनकी शरण में आने वाला उनका हर भक्त दरिद्रता और विघ्न बाधाओं से मुक्ति पाकर ऐसी ऐश्वर्य को प्राप्त करता है।

आपको बता दें कि शास्त्रों में बप्पा यानी गणपति को पंचभूत कहा गया है मान्यता है कि धरती आकाश आग हवा और जल की सारी शक्तियां इन में समाहित है।  यहां कोई मन्नत के लिए शेष नवादा है तो कोई बप्पा का आशीर्वाद लेने दूर-दूर से यहां का है। इस मंदिर में भगवान गणेश की 7.5 फीट ऊंची और 4 फीट चौड़ी लगभग 8 किलोग्राम सोने से सुसज्जित प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण बड़ी खूबसूरती से किया गया है निर्माण में विशेष शैली का उपयोग है। भगवान की प्रतिमा मंदिर के बाहर से ही दिखाई देती है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर जय और विजय नामक दो प्रहरियो की संगमरमर की मूर्तियां स्थित की गई है।

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