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इस जगह आज भी निकलता है भीष्म पितामह के शरीर से खून |

Janprahar Desk
4 July 2020 7:22 PM GMT
इस जगह आज भी निकलता है भीष्म पितामह के शरीर से खून |
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महा भारत के महान योद्धा भीष्म  का एक ऐसा मंदिर जिसकी मूर्ति का रहस्य जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे क्योंकि इस मूर्ति से लगातार खून निकलता है। इसके पीछे क्या रहस्य हैं ये जानने के लिए आपको ये आर्टिकल अंत तक पढ़ना होगा और इस आर्टिकल के अंत में आप इस खास मंदिर और इस मंदिर में स्थित मूर्ति के पीछे का रहस्य जान जायेंगे।

महाभारत की जब जब बात की जाती है तब तब गंगापुत्र भीष्म पितामह को भी याद किया जाता है लेकिन इस पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ एक ही जगह है जहां पर भीष्म पितामह का मंदिर है यह जगह है इलाहाबाद देश के कोने में भीष्म पितामह जिनका मूल नाम देवव्रत था  उनका एक मंदिर है जहां इनकी 12 फीट लंबी मूर्ति स्थापित है जिसको तीरों की शैया पर लेटाया हुआ दर्शाया गया है।

महाभारत के किस्से की अगर बात की जाए तो आप सब जानते हैं जब भीष्म पितामह अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे उस समय पांडवों द्वारा उन पर लगातार तीरो का वार किया गया और उनको तीरों की शैया पर लेटाया और वही पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उसी खास दृश्य को देखते हुए इस ख़ास मंदिर का निर्माण करवाया गया।

तो दोस्तों आइये जानते है इस खास मंदिर की खास 12 फीट लंबी मूर्ति का खास रहस्य।

सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर इसका निर्माण कब करवाया गया था दोस्तों इतिहास की मानें तो 1961 में हाईकोर्ट के वकील जे आर भट्ट ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था जो प्रसिद्ध नाग वासुकी मंदिर के भी पास स्थित है जहां पूजा और परिक्रमा के लिए लोग घंटो लाइन में लगे रहते हैं मंदिर के पुजारी बताते हैं कई वर्ष पहले रोज़ाना एक बूढी औरत गंगा में स्नान करने आती थी डुबकी लगाने के बाद एक दिन उसने जे आर भट  से कहा कि वहा गंगा के पुत्र की भी पूजा करनी चाहिए। जिसके बाद भट्ट ने यहां मंदिर का निर्माण प्रारंभ कर दिया लेकिन दोस्तों भट्ट जी को यह नहीं पता था कि आखिर इस मंदिर से भीष्म खुश हो जाएंगे।

 दरअसल यहां पर जो भीष्म पितामह की खास 12 फीट लंबी मूर्ति है जो कि तीरों की शैया पर जिन्हे लेटा हुआ दर्शाया गया है वहां तीरों से लगातार आपने आप खून निकलता है। इकलौता भीष्म का ये मंदिर गवाही देता है और वह दृश्य दुबारा सबके सामने लाता है जब महाभारत के समय पांडवों ने अपने पितामाह को तीरों की शैया पर लेटाया था। मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग ये  बताते हैं कि शाम के समय यहां पिता मां की मूर्ति के शरीर  से लगातार खून निकलता है और उन उन जगह से खून निकलता है जहां पर तीर लगे हुए थे यह अपने आप में सबसे बड़ा रहस्य है वैज्ञानिक इस बात का ठीक से पता नहीं लगा पाए है आखिर कैसे इस मूर्ति से अपने आप ही खून निकलता है जबकि इसका कोई भी ऐसा टेक्निकल खेल नहीं है जहां से खून निकलता हो  वहीं वहीं से निकलता है जहां पर है भीष्म पितामह के शरीर पर तीर लगे है इस राज से अभी तक कोई भी पर्दा नहीं उठा पाया।

और ये ख़ास मंदिर जोकि गंगा पुत्र भीष्म पितामह का इकलौता मंदिर है इसकी पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु हमेशा आते है और यहाँ दर्शन करते हैं भीष्म पितामह की 12 फीट लंबी लेटी हुई मूर्ति के।

तो दोस्तों इलाहाबाद में ही बस भीष्म पितामह का इकलौता मंदिर है और इस मंदिर की बहुत ज्यादा मान्यता है और ये मंदिर जितना मान्य है उतना ही रहस्य्मय भी ये तो आप जान ही गए होंगे।

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