धर्म

क्या पृथ्वी का अधिकाँश भाग नीला होना दर्शाता है कृष्ण का नीला रंग के होने का राज़ ?

Janprahar Desk
19 July 2020 8:21 PM GMT
क्या पृथ्वी का अधिकाँश भाग नीला होना दर्शाता है कृष्ण का नीला रंग के होने का राज़ ?
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कन्हैया श्यामा गोपाल हर एक नाम से ही उनका मन मोहक रूप निराला स्वरूप झलकता है। हिंदू संस्कृति में भगवान श्रीकृष्ण खास महत्व रखते हैं बता दें कि श्रीमद भगवत गीता के अनमोल वचन का एक-एक शब्द मनुष्य को मुक्ति दिलाने वाला है।

ऐसा भी कहा जाता है कि कृष्ण भक्ति से इंसान के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं इतना ही नहीं श्रद्धा भक्ति होने के बावजूद भी लोगों के मन में उनकी नीले रंग को लेकर शंका जरूर रहती है अगर कभी भी किसी भी पेंटिंग मूर्ति या तस्वीर की ओर नजर डालेंगे तो कृष्ण का रंग नीला होगा तो वही इसको लेकर कई सारे मत दिए जाते हैं लेकिन सच्चाई क्या है ये आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताएंगे  तो अंत तक जरूर पढियेगा हमारा ये आर्टिकल।

भगवान श्री कृष्ण के नीले रंग के पीछे सबसे पहली जो मान्यता बताई जाती है वो भगवान विष्णु से जुड़ी हुई है गौरतलब है कि कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है दरअसल  भगवान विष्णु सदा गहरे  सागरों में ही निवास करते हैं उनके इन सगरो में निवास करने की वजह से भगवान श्री कृष्ण का रंग नीला है।

हिंदू धर्म में जिन लोगों के पास बुराइयों से लड़ने की क्षमता होती है और जो लोग चरित्रवान होते हैं उनके चरित्र को नीले रंग का माना जाता है हिंदू धर्म में नीले रंग को अनंतता का प्रतीक माना जाता है यानी जिसका अस्तित्व कभी समाप्त न हो यही वजह है कि श्री कृष्ण कन्हैया का वर्णन नीले रंग से होता है और एक अन्य मान्यता के अनुसार जब भगवान कृष्ण छोटे थे तब पूतना नामक राक्षसनी ने इन को मारने के लिए इन्हें अपना विष युक्त दूध पिलाया हालांकि एक देवांश होने की वजह से कृष्ण की मृत्यु नहीं हुई और इस वजह से कृष्ण का रंग नीला हो गया।

इसी तरह कहा जाता है कि यमुना नदी में एक कालिया नामक नाग रहता था जिसके कारण गोकुल के सभी निवासी परेशान थे अतः जब भगवान कृष्ण कालिया नाग से लड़ने गए तो युद्ध के समय उसके विष  के कारण भगवान कृष्ण का रंग नीला हो गया। ऐसे ही भगवान श्री कृष्ण का रंग नीला होने के पीछे प्रकृति का अधिकांश भाग नीला होना बताया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म बुराइयों से लड़ने और सभी बुराइयों का नाश करने के लिए हुआ था इसीलिए श्रीकृष्ण ने एक प्रतीक के तौर पर नीला रंग धारण किया था। तो वहीं ब्रह्म संहिता के मुताबिक भगवान कृष्ण के अस्तित्व में नीले रंग के छोटे छोटे बदलो  का समावेश है इसलिए इन्हें नीले रंग में देखा जाता है चलिए अब बढ़ते है आखिरी किवदंती की ओर जिसमें भगवान श्री कृष्ण को नीलोत्पल दल के नाम से जाना चाहता है इसका संबंध उस कमल पुष्पों फूल  से है जिसकी पंखुड़ियां नीली हो श्री कृष्ण विष्णु के अवतार हैं जिन्हें कमल बहुत पसंद है इसलिए कई महान कलाकारों ने श्रीकृष्ण की कल्पना करते हुए नीले रंग को इनके चित्र आदि बनाने के लिए चुना।

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