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क्या आप जानते है शिवलिंग का असली मतलब ?

Janprahar Desk
30 Jun 2020 9:55 AM GMT
क्या आप जानते है शिवलिंग का असली मतलब ?
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भगवान शिव आदि अनंत और महाकाल है इस संपूर्ण ब्रहमांड में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं जो भगवान शिव के बारे में ना जानता हो। यूं तो बहुत से लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने भगवान शिव को देखा है लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो भगवान शिव को नहीं देख पाते तो ऐसे में वह उनके लिंग की पूजा करते हैं यानी की शिवलिंग की पूजा।

आखिर शिवलिंग क्या है शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है आखिर शिवलिंग क्या  प्रस्तुत करता है और क्या दर्शाता है आज इस आर्टिकल के द्वारा मैं  इन सभी सवालो का जबाब दूंगी लोगों ने शिवलिंग का गलत अर्थ बता कर लोगों को भ्रमित कर रखा है।

लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य वाली बात यह है इसमें विदेशी लोगों के साथ-साथ कुछ अपने देश के लोग भी शामिल है इन लोगों ने शिवलिंग का इतना गंदा मतलब निकाल रखा है की मैं उसको आपको बता भी नहीं सकती और साथ ही इसे मैं महादेव  का अपमान समझती हु।

 शिवलिंग एक संस्कृत शब्द है जिसमें लिंग का मतलब होता है प्रतीक यानी शिवलिंग का मतलब हुआ शिव का प्रतीक यानी ऐसी चीज जिसको हम शिव मानकर उसकी पूजा करते हैं। आज मैं आपको बताउंगी शिवलिंग के बारे में और उसकी खास शक्तियों के बारे में।

शिवलिंग एक ख़ास ढांचा है जिसको एक खास मकसद से बनाया जाता है। आपने भगवान शिव के तरह तरह के शिवलिंग देखे होंगे यह सभी शिवलिंग मनुष्य के द्वारा बनाए गए हैं।

 कहीं-कहीं अपनी भक्ति दिखाने के लिए जैसा मन में आया वैसा  शिवलिंग बना दिया और कुछ कुछ शिवलिंग तो ऐसे हैं जो प्राकृतिक रूप से बने हुए हैं लेकिन हम जब 12 ज्योतिर्लिंगो

को देखते है तो उन सब की शेप अलग है यानि की उनका आकार अलग है। क्योंकि अलग अलग मकसद के लिए अलग अलग ज्योतर्लिंग बनाया गया है।

इनमे से कुछ शिवलिंगो को सेहत के लिए बनाया गया है तो कुछ शिवलिंग को खुशहाली के लिए और कुछ को ध्यान साधना के लिए लेकिन इन सब चीजों में एक चीज समान है यह सभी शिवलिंग आलोकिक है  इसका सरल अर्थ यह  है की शिव किसी स्त्री या पुरुष का प्रतीक ना होकर  संपूर्ण ब्रह्मांड आकाश शून्य और निराकार का प्रतीक है।

उन्हें किसी चीज़ में नहीं रखा जा सकता क्योंकि वह खुद एक प्रतिक है। अगर आप वैज्ञानिक द्वारा ली गई कुछ तस्वीरें देखें तो आप पाएंगे कि हमारा भगवान शिव लिंग से मिलता-जुलता है स्कन्द पुराण के अनुसार आकाश स्वयं एक लिंग है और शिवलिंग समस्त ब्रह्मण्ड की दुरी है शिवलिंग अनंत है इसकी ना तो शुरुआत है और ना ही कोई अंत। इसीलिए शिवलिंग का एक अर्थ अंत भी होता है।

बहुत से शिवलिंग को प्राचीन ज्ञान और शास्त्रों में दिए गए निर्देशों से बनाया गया है। जैसे कि मैंने आपको बताया कि शिवलिंग का अर्थ अंत भी होता है और आप तो जानते ही हैं स्वयं भगवान शिव जिन्हें विनाशक भी कहा जाता है जो इस ब्राह्मण और इस सृष्टि की शुरुआत भी है और अंत भी है।  दोस्तों इस ब्रह्मण्ड में दो ही चीज है जो  वास्तविक में है एक है एनर्जी और दूसरा पदार्थ। मानव शरीर पदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा यानी की एनर्जी से। इसी प्रकार शिव पदार्थ और उनकी शक्तियां ऊर्जा है वह दोनों मिलकर शिवलिंग बनाते है।

वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्माण्ड की आकृति है शिवलिंग भगवान शिव और माता पार्वती का आदि अनादि रूप है और पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतीक है अर्थात इस प्रकृति में स्त्री और पुरुष दोनों का समान रूप से वर्चस्व है।

 शिवलिंग से जुड़ी एक कहानी भी है। यह सब तो आप जानते हैं ब्रह्मा सृष्टि के रचियता और विष्णु पालनहार और सृष्टि को संतुलित करने के लिए भगवान शिव है।  ऐसे ही एक बार भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच लड़ाई हो गई।की आखिर हम दोनों में से कौन बड़ा है किसकी शक्ति सबसे सर्वोपरि है। दोनों आपस में बहस करने लगे। 

तभी एक आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया एक खास काला पत्थर है जिसकी ऊंचाई या गहराई का अगर किसी ने भी अंदाजा लगाया तो वह सबसे बड़ा हो जाएगा। ऐसे में भगवान ब्रह्मा ने जैसे ही सुना है वे आकाश की तरफ रुख करने लगे ताकि उसका अंतिम सुन सके वही भगवान विष्णु उनकी जड़ की तरफ बढ़े  क्योंकि उन्हें पता था कि किसी पौधे की भांति शिवलिंग की भी कोई जड़ होगी।

वे दोनों उस काले पत्थर की जड़ और अंतिम छोर को ढूढ़ने के लिए बढ़ते हो रहें बढ़ते ही रहे और जब वह हारकर हताश हो गए तब फिर से  एक आकाशवाणी हुई जिसमें बताया गया कि अगर आप दोनों  इसे ढूंढने में असमर्थ हैं यानी आप सर्वशक्तिमान नहीं है।

 उसी समय प्रकट हुए भगवान शिव जो उस काले पत्थर के रूप में उनके सामने थे। दोस्तों वैसे  तो इसे काला पत्थर कहना बहुत गलत है लेकिन आजकल के वास्तविक जीवन में हर कोई यही कहता है जो नास्तिक है वह भी यही कहता है की यह मात्र काला पत्थर है लेकिन किसी को नहीं पता यह है काला पत्थर नहीं बल्कि शिव का प्रतीक है जिसके अंतिम छोर को ढूंढने में भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी परेशान हो गए थे। तो यही है शिवलिंग का वास्तविक अर्थ यानी कि शिव का प्रतीक।

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