धर्म

क्या आप जानते है हवा में झूलते इस मंदिर का रहस्य ?

Janprahar Desk
25 Jun 2020 10:16 PM GMT
क्या आप जानते है हवा में झूलते इस मंदिर का रहस्य ?
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आपने बहुत बार समुद्र के अंदर जमीन के अंदर यहां तक की जमीन के बाहर भी कई सारे चमत्कारी मंदिरों के बारे में सुना होगा।

लेकिन आज मैं आपको अपने इस आर्टिकल की मदद से एक ऐसे मंदिर के बारे में बताउंगी इसके बारे में कहा जाता है की वह हवा में झूलता है। तो यदि आपको हवा में झूलते इस खास मंदिर का रहस्य जानना है तो उसके लिए आपको ये आर्टिकल अंत तक पड़ना होगा।

 दोस्तों किसी भी चीज के बारे में पूरी तरह जानने के लिए वैज्ञानिक मापदंड सर्वश्रेष्ठ माना गया है इसीलिए रहस्य के तह तक जाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लेते हैं।  पर आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भी दुनिया में कई ऐसी चीजें मौजूद हैं जिनके करीब जाते ही विज्ञान भी अपना होश खो बैठता है।  जिनके रहस्य का आज तक किसी को पता ही न चल पाया।

ऐसी चीजें चमत्कार या किसी दिव्य शक्ति के रूप में आपके आस पास होती है आज मैं जिस खास मंदिर के बारे में आपको बताने जा रही हूं यह खास मंदिर कोई और मंदिर नहीं बल्कि एक जाना माना मंदिर लेपाक्षी मंदिर है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के अरब पूर्व जिले में स्थित है यह मंदिर अपने रहस्यमई स्तंभों के लिए बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है।

कहा जाता है कि इस मंदिर के परिसर में 70 नकाशी दार रहस्यमई स्तंभ स्थित है लेकिन इन 70 स्तंभों में से एक स्तंभ बहुत ही ज्यादा रहस्यमई बताया जाता है। आपको बता दें कि ऐसा कहा जाता है कि यह स्तंभ जमीन को नहीं छूता यानी कि वह हवा में लटक रहा है तो आइए चलिए जानते हैं कि आखिर इस खास स्तंभ के पीछे क्या रहस्य है और क्या चीज इस मंदिर को इतना ज्यादा रहस्यमई बनाती है ?

दोस्तों यह जो खास खंबा है यह हवा में तैरता है यह इमारत की छत से जुड़ा हुआ है यानी कि यह स्तंभ मंदिर की छत से तो जुड़ा हुआ है  लेकिन यह स्तंभ जमीन को नहीं छूता है यह स्तंभ जमीन से कुछ सेंटीमीटर पहले ही खत्म हो जाता है। कहा जाता है कि आप इस स्तंभ के नीचे से अपने हाथ पैर भी गुजार सकते हैं।

दोस्तों बदलते वक्त के साथ यह अजूबा एक मान्यता बन चुका है ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई इंसान इस खंभे के उस पार चला जाए तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है अगर वह नहीं जा पाता तो ऐसे में वह कपड़े की सहायता से इस पार से उस पार कर सकता है इससे भी उस व्यक्ति की मुराद पूरी हो जाती है।

इस मंदिर के पीछे की कथा जानकर  जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। कहते हैं बनवास के दौरान भगवान श्री राम लक्ष्मण और माता सीता यही आए थे। जब  सीता का अपहरण कर रावण अपने साथ लंका लेकर जा रहा था तब पक्षीराज जटायु ने रावण से युद्ध किया और वो घायल होकर इसी स्थान पर गिरा था। बाद में जब श्री राम सीता की खोज में यहां पहुंचे तो उन्होंने लेपाक्षी कहते हुए जटायु को अपने गले लगा लिया। लेपाक्षी आपको बता दें कि लेपाक्षी एक तेलुगु शब्द है जिसका मतलब होता है कि उठो पक्षी।

अगर पौराणिक मान्यताओं की माने तो इस मंदिर को ऋषि अगस्त्य ने बनाया था लेकिन अगर इतिहासकारों की माने तो सन 1578 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाइयों ने इस मंदिर को बनाया था।

 मंदिर के रहस्य को जानने के लिए अंग्रेजों ने भी इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश की लेकिन वह इसमें नाकामयाब रहे इसके बाद  एक इंजीनियर ने भी इस मंदिर के रहस्य को जानने के लिए इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन वह इसमें असफल रहा क्योंकि इसका यह हवा में झूल रहा था।

ऐसा कहा जाता है  कि 70 स्तंभों में से एक स्तंभ ऐसा है जो आज भी हवा में झूल रहा है और कहते हैं कि जिस दिन यह स्तंभ जमीन को छू लेगा उस दिन दुनिया का अंत हो जाएगा।

 दोस्तों आशा करती हूं कि इस आर्टिकल की मदद से आप समझ गए होंगे कि इस तरह से इस  मंदिर के पीछे क्या क्या रहस्य है और आखिर क्यों इसे हवा में झूलता हुआ मंदिर कहा जाता है और इस मंदिर के पीछे इतने रहस्य छुपे हैं ? आशा करती हु की इस आर्टिकल से आपको इस मंदिर से सम्बंधित  आपके सारे सवालों का जबाब मिल गया होगा।

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