धर्म

क्या आप जानते है भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यह वरदान दिया था।

Janprahar Desk
14 July 2020 10:06 PM GMT
क्या आप जानते है भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यह वरदान दिया था।
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दोस्तों हिंदू एक ऐसा धर्म है जिसमें देवी देवताओं के साथ-साथ उनके वाहनों की भी पूजा की जाती है ऐसे ही एक  है महादेव के प्रिय जिसे भोलेनाथ का श्रंगार माना जाता है भगवान शंकर इसे हमेशा अपनी गले में धारण करते हैं यही नहीं भारत में नागों को समर्पित पर्व नाग पंचमी विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन देश भर में जगह जगह पर सांपो को दूध समर्पित करने की परंपरा है और इसके साथ ही सांपों को लांबा भीभेंट किया जाता है।

मगर इसके साथ ही यह भी उतना ही बड़ा सच है कि सांपों से लोग बहुत डरते हैं और कई बार देखते हैं उनकी जान लेने पर उतारू हो जाते हैं क्या कोई जानता है कि इनकी पूजा क्यों की जाती है और नाग को देव के रूप में क्यों पूजा जाता है अगर नहीं तो यह आर्टिकल अवश्य पड़े।

एक बार की बात है कि यमुना जी में कालिया नाग के विष से जहर घुल गया था ब्रिज वासियों के लिए नदी का पानी जहर बन गया था तब भगवान कृष्ण ने इस समस्या का हल निकालने के लिए एक चाल चली वह गेंद ढूंढने के बहाने नदी में कूद गए और कालिया नाग को युद्ध में हरा दिया तब कालिया नाग ने  प्रभु के आगे हार मानकर यमुना जी के जल से अपना जहर वापस ले लिया उस दिन भी श्रावण मास की पंचमी तिथि थी।

कालिया नाग के इस नेक कार्य के बदले भगवान कृष्ण ने उसे वरदान दिया कि सावन के पंचमी के दिन देश के कोने-कोने में सांपों को देवता मानकर उनकी पूजा होगी तभी से नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाने लगा।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के शैया बने हुए हैं शेषनाग जी अपने फन पर पूरी पृथ्वी का भार थामे हुए हैं इसीलिए गृह निर्माण के समय भूमि पूजन के दौरान चांदी का नाग नागिन भूमि में दबाया जाता है।

ऐसे ही कथा है कि एक बार अपने भाइयों के दुर्व्यवहार से दुखी होकर शेषनाग हिमलय पर जाकर ब्रह्मा जी की तपस्या करने लगे थे उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और शेषनाग  को वरदान दिया कि उनकी बुद्धि कभी धर्म के मार्ग से नहीं भटकेगी साथ ही ब्रह्मा जी ने शेषनाग को  एक और जिम्मेदारी सौंपी उनका मानना था कि यह पृथ्वी पहाड़ और नदियों की वजह से सदैव हिलती डुलती रहती है तो इसीलिए इसे आप अपने फन पर धारण करो तब से शेषनाग ने पृथ्वी को अपने फन पर धारण किया हुआ है और उनके शरीर से बनी शैया पर भगवान विष्णु आसीन है इसीलिए शेषनाग को धरणीधर और अन्नत  भी कहते हैं शेषनाग का ही  एक अन्य नाम अनंतनाग है।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार नागराज पोरथय पांडव काल में हरिद्वार क्षेत्र में राज करते थे उनकी पुत्री  का नाम उल्पी था अर्जुन एक बार गंगा तट पर विश्राम कर रहे थे तब उल्पी अर्जुन को बेहोश करके नाग लोक ले गयी यह राजा पोरथ्य ने उल्पी और अर्जुन के प्रेम का सम्मान करते हुए उनका विवाह करवा दिया जिससे नाग  जाति और मनुष्य के बीच मित्रता का संबंध बनाए इसके बाद नागकन्या उलूपी के पुत्र इरावन की तो किन्नर भी देवता मानकर पूजा करते हैं।

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