धर्म

अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक में अयोध्या के राम मंदिर का नक्शा हुआ पास

Janprahar Desk
3 Sep 2020 9:10 AM GMT
अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक में अयोध्या के राम मंदिर का नक्शा हुआ पास
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बुधवार को अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई इससे ठीक 29 दिन पहले ,अयोध्या में राम मंदिर का पूजन हुआ था ।अब बुधवार को मंदिर का नक्शा भी पास हो चुका है। अर्थात यह कह सकते हैं कि आखिर मंदिर दिखने में कैसा होगा?

बुधवार को अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई इससे ठीक 29 दिन पहले ,अयोध्या में राम मंदिर का पूजन हुआ था ।अब बुधवार को मंदिर का नक्शा भी पास हो चुका है। अर्थात यह कह सकते हैं कि आखिर मंदिर दिखने में कैसा होगा?

इस नक्शे को अयोध्या विकास प्राधिकरण की बैठक में बड़ी आसानी से मंजूरी भी मिल गई। यह नक्शा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पास करवाया है। ट्रस्ट ने राम मंदिर के साथ ही पूरी 70 एकड़ की भूमि का नक्शा भी पास कराया है।
2.11 करोड रुपए विकास शुल्क और 15 लाख ₹363 श्रमिक सेस की राशि ट्रस्ट ने पहले से ही जमा करवा दी है।

ट्रस्ट का अनुमान है कि जितना जल्दी मंदिर का निर्माण प्रारंभ होगा, उतनी ही जल्दी मंदिर बन पाएगा और कोई कमी होगी तो उसे सुधारने में जल्द ही सक्षम भी हो पाएंगे । इसके लिए खुदाई का काम जल्द से जल्द शुरू हो तो अच्छा होगा। (अयोध्या विकास प्राधिकरण) के चेयरमैन और कमिश्नर एमपी अग्रवाल ने बताया कि ट्रस्ट ने 70 एकड़ परिसर के दो नक्शे भेजे थे। एक नक्शा 2लाख 74 हजार 110 वर्ग मीटर के लेआउट का है। यह ओपन एरिया है। दूसरा नक्शा राम मंदिर का है जो 12,879 वर्ग मीटर कवर्ड क्षेत्र में है। दोनों नक्शे बोर्ड की बैठक में पास करा दिए गए हैं।

राम मंदिर और परकोटे का निर्माण सिर्फ 5 एकड़ में ही होगा । 49.24 मीटर ऊंचाई, भूतल 9972 वर्ग मीटर ,प्रथम तल 1850 वर्ग मीटर ऊपर द्वितीय तल 1056 वर्ग मीटर का होगा।

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर 36 से 40 महीने में बनकर तैयार हो सकता है। मंदिर निर्माण में एक ग्राम भी लोहे का प्रयोग नहीं होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि मंदिर की आयु कम से कम एक हजार वर्ष होगी। लार्सन एंड टूब्रो कंपनी, आईआईटी के इंजीनियरों की निर्माण कार्य में मदद ली जा रही है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि मंदिर स्थल से मिले अवशेषों के श्रद्धालु दर्शन कर सके, ऐसी व्यवस्था भी की जा रही है। मंदिर निर्माण में पत्थरों का उपयोग होगा। पत्थरों की आयु के हिसाब से ही मंदिर की एक हजार वर्ष आयु का आकलन किया गया है। निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो ने योग्यतम लोगों को अपने साथ जोड़ा है।

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