धर्म

आखिर बिना आसान नंगी भूमि पर क्यों नहीं करना चाहिए कोई भी शुभ काम ?

Janprahar Desk
19 July 2020 7:51 PM GMT
आखिर बिना आसान नंगी भूमि पर क्यों नहीं करना चाहिए कोई भी शुभ काम ?
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दोस्तों आप और हम सब किस ने किसी तरह के आसन पर बैठकर पूजा-पाठ करते हैं भगवान का ध्यान करते हैं लेकिन हम आसन का प्रयोग क्यों करते हैं आपको बताते हैं कि शास्त्रों में हर प्रकार की कामना के लिए अलग-अलग आसन बताए गए हैं लेकिन नित्य पूजा करते समय कैसा आसान  होना चाहिए यह बात आज भी शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं।

शास्त्रों के अनुसार मंत्र जाप करते समय हमेशा आसन बिछाना चाहिए बिना आसन भूमि पर बैठकर मंत्र जाप करने से दुख की प्राप्ति होती है वही वास  के आसन पर बैठकर मंत्र जाप या देव पूजा नहीं करनी चाहिए ऐसा करने से दरिद्रता आती है। पत्थर के आसन पर बैठकर पूजा या मंत्र जाप रोग होते हैं साथ ही लकड़ी के आसन पर बैठ कर पूजा करने से दुर्भाग्य की प्राप्ति होती है। घास के आसन पर बैठ कर पूजा करने से यश और कीर्ति नष्ट हो जाती है। पत्ते के आसन पर बैठ कर पूजा करने से मन बेचैन रहता है यही कारण है कि पूजा के दौरान हमेशा अच्छे आसन का इस्तेमाल करना चाहिए।

वही शास्त्रों में भी बताया  गया है कि पूजा के दौरान किस प्रकार के आसन का प्रयोग करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि पूजन के लिए रेशम कम्बल मर्ग चरम काष्ठ और  ताल पत्र के आसन का प्रयोग शुभ कार्यों के लिए करना चाहिए।

वही शमी श्रीपर्णी कंदब खेर और कश्मीरी शॉल से पांच प्रकार के आसन श्राद्ध और देव अर्चन  के लिए शुभ है। इसके अलावा कामना के अनुसार किस प्रकार का आसन होना चाहिए यह भी शास्त्रों में बताया गया है जिसमें व्याधाचर्म का आसन सभी प्रकार की सिद्धियों के लिए शुभ है। ज्ञान और सिद्धि के लिए मृग चर्म का आसन शुभ माना गया है। वस्त्र का आसन रोगों से छुटकारा दिलाने वाला होता है चलिए अब आपको बताते हैं कौन से देवी देवता की पूजा करने के लिए किस तरह के आसन का इस्तेमाल करना चाहिए।

कम्बल  के आसन पर बैठकर पूजा करना सर्वश्रेष्ठ कहा गया है लाल रंग का कंबल मां भगवती लक्ष्मी हनुमान जी की पूजा करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। कुशा का आसन रोगियों के लिए यह आसन सर्वश्रेष्ठ है यह कुशा नामक घास से बनाया जाता है जो भगवान के शरीर से उत्पन्न हुई है इस आसन पर बैठ कर पूजा करने से सर्व सिद्धि मिलती है किसी भी मंत्र को सिद्ध करने में कुशा का आसन सबसे अधिक प्रभावी है।

लेकिन विशेषकर पिंडदान श्राद्ध कर्म इत्यादि के कार्य में कुशा के आसन का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे अनिष्ट होने की संभावना होती है हिरन  के चमड़े का आसन से ब्रम्हचर्य ज्ञान वैराग्य सिद्धि शांति एवं मोक्ष प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ आसन है इस पर बैठकर पूजा करनी चाहिए सारी इंद्रियां संयमित रहती है कीड़े मकोड़े रक्त विकार वायु पित्त विकार आदि से साधक की रक्षा होती है।

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