धर्म

आखिर क्यों आज तक कोई नहीं कर सका इस मंदिर को पूरा ?

Janprahar Desk
19 July 2020 7:48 PM GMT
आखिर क्यों आज तक कोई नहीं कर सका इस मंदिर को पूरा ?
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इस शिव मंदिर के कारीगरों को नहीं थी कपड़े पहनने की इजाजत। श्रापित था यह शिव मंदिर। कारीगर बन जाते थे पत्थर। यहाँ  नंदी के अंदर से आती है घंटियों की आवाज।

भगवान शिव के मंदिरों के चमत्कार अविश्वसनीय होते हैं लेकिन उनमें श्रद्धा रखने वाले भक्तों को इन चमत्कारों पर पूर्णता विश्वास होता है हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के दर्शन करवाने वाले हैं जो आपकी और हमारी सोच से परे है।

दरअसल मध्यप्रदेश में स्थापित शिव मंदिर श्रापित है अब आप सोच रहे होंगे कि यह क्या कोई मंदिर श्रापित हो सकता है तो इसका मतलब है हाँ तो चलिए अब आगे बढ़ते हैं और जानते है पूरी जानकारी मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर की।

आपको बता दें कि 11वीं सदी में मध्यप्रदेश में बने एक ऐसे मंदिर की जो एक श्राप के चलते निर्माण के दौरान अधूरा ही रह गया इसके बाद से आज तक कोई पूरा नहीं कर सका इतना ही नहीं कहा तो यहां तक जाता है की इसे  बनाने वाले कारीगर भी पत्थर की मूर्तियों में बदल गए सिर्फ इतना ही नहीं इस मंदिर में स्थापित की प्रतिमा भी रहस्यमई बातो में डाल देने वाली है चलिएआपको बताते हैं मंदिर से जुड़ी रोचक कहानी और महत्वपूर्ण तथ्य।

कहा जाता है कि 11वीं और 12वीं सदी के मध्य  रघुवंशी राजा गए  की राजधानी महिष्मति हुआ करती थी किवदंतियो और कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा गए भगवान शिव का भक्त था जिसने उस वक्त के प्रसिद्ध वास्तुशिल्पी भाई नागर ब्रोकर को महेश मती में शिव मंदिर बनाने का आदेश दिया। नागर बोगर  के बारे में बताया जाता है कि यह दोनों भाई नग्न अवस्था में मंदिर निर्माण कार्य करते थे साथ ही दोनों केवल एक रात में बड़े से बड़ा निर्माण कार्य कर देते थे। लेकिन इन्हें एक श्राप मिला हुआ था कि अगर किसी ने इन्हें नग्न अवस्था में निर्माण करते हुए देख लिया तो वह पत्थर के बन जाएंगे। जब एक दिन ये इस शिव मंदिर का निर्माण कर रहे थे तब एक रात उनकी बहन खाना लेकर अचानक निर्माण कक्ष में आ गई और उसने अपने भाइयों को नग्न अवस्था में देख लिया जिसके बाद वो पत्थर के बन गए ऐसे में मंदिर का निर्माण अधूरा रह गया और इसका गुम्बद फिर कभी नहीं बन सका।

प्राचीन शिव मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग को पौराणिक अभिलेखों में ज्योतिर्लिंग माना गया है जो इस रहस्यमई शिव मंदिर कोऔर भी खास बनाता है। आपको बता दें कि इस मंदिर का एक पत्थर स्थापत्य कला का नमूना है इसमें भी सबसे खास मंदिर के गर्भ गृह के सामने स्थापित नंदी की प्रतिमा है जिसे पत्थर से टोकने पर उसमें से घंटी की आवाज आती है बताया जाता है कि इस मंदिर को कुछ इस तरह से बनाया गया है कि सूर्य की पहली किरण और पूर्णिमा के चांद की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भ गृह को छूती है।

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