धर्म

आखिर पूजा में क्या है इन दो चीज़ो का महत्व ?

Janprahar Desk
22 July 2020 10:11 AM GMT
आखिर पूजा में क्या है इन दो चीज़ो का महत्व ?
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 दोस्तों हर किसी का पूजा करने की विधि अलग होती है लेकिन चावल और हल्दी यह दो ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल हर पूजा में किया जाता है लेकिन क्या कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है इस आर्टिकल  में हम आपको बताने वाले हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

सबसे पहले बात करते हैं चावल की कई लोग चावल को अक्षत भी कहते हैं आपको बता दें कि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटे ना हो इसका रंग सफेद होता है पूजा में अक्षत का उपयोग अनिवार्य है अक्षत ना हो तो पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती दरअसल अक्षत पूर्णता का प्रतीक है यानी कि टूटा हुआ नहीं होता है अतः  पूजा में अक्षत चढ़ाने की मान्यता यह है कि हमारी पूजा अक्षत की तरह पूर्ण हो।  अन्न में श्रेष्ठ होने के कारण भगवान को चढ़ाते समय यह भाव रहता है कि जो कुछ भी आज हमें प्राप्त होता है भगवान की कृपा से ही मिलता है हमारे अंदर यह भावना भी बनी रहे इसका सफेद रंग शांत का प्रतीक है यानी हमारे प्रत्येक कार्य की पूर्णता ऐसी हो कि उसका फल हमें शांति प्रदान करें तो इसीलिए पूजन में अक्षत एक अनिवार्य सामग्री है। भगवान को चावल अर्पित करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चावल टूटे हुए ना हो अक्षत पूर्णता का प्रतीक है सभी चावल अखंडित होनी चाहिए चावल साफ और स्वच्छ होनी चाहिए।

अब बताते हैं पूजा में हल्दी की उपयोगिता के बारे में यह तो हम सभी जानते है कि हल्दी एक विशेष प्रकार की औषधि है और इसमें दैवीय गुण भी होते हैं हिंदू धर्म में हल्दी को शुभ और मंगल लाने वाला माना जाता है यह न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि जीवन में संपन्नता भी लाती है मुख्य रूप से हल्दी विश रोधक होती है और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है इसीलिए हल्दी का प्रयोग हवन और औषधियों में भी किया जाता है। विवाह में भी वर-वधू को हल्दी चढ़ाने के पीछे भी यही महत्व है कि उन्हें बाहरी बाधाओं से बचाया जाए और साथ ही सेहत और सुंदरता के लाभ भी उन्हें मिले वास्तव में हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है। इसी तरह हल्दी का दान करना शुभ माना जाता है इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है। कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है गुरु ग्रह में अनुकूलता आती है पूजा के बाद माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से विवाह संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है। घर की बाउंड्री के दीवार पर अगर हल्दी की रेखा बना दी जाए तो घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता इसके अलावा नहाते समय अगर पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर नहाए जाए तो यह शारीरिक और मानसिक शुद्धता देती है करियर में सफलता के लिए भी यह प्रयोग अचूक है। अगर नकारात्मकता को दूर रखना चाहते हैं तो हल्दी की गांठ पर मौली लपेटकर सिरहाने रखें। विवाह संबंधी रुकावटें दूर करने के लिए हर गुरुवार को गणेश जी को चुटकी भर हल्दी चढ़ाये। सूर्य को चढ़ाने वाले जल में चुटकी भर हल्दी मिलाने से कन्या की शादी मनचाहे वर से होती है।

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