धर्म

आखिर कैसे महल में बैठकर ही संजय ने ध्रतराष्ट्र को बताया युद्ध का पूरा हाल ? कैसे मिली उन्हें ये दिव्य शक्ति ?

Janprahar Desk
22 Jun 2020 5:20 PM GMT
आखिर कैसे महल में बैठकर ही संजय ने ध्रतराष्ट्र को बताया युद्ध का पूरा हाल ? कैसे मिली उन्हें ये दिव्य शक्ति ?
x

महाभारत के युद्ध में जब हस्तिनापुर में बैठे कौरव के पिता ध्रितराष्ट्र अंधे होने के कारण युद्ध देखने में सक्षम नहीं थे तब संजय ने हस्तिनापुर  के महल में बैठकर ही कुरुक्षेत्र के युद्ध का हर दिन का हाल है ध्रतराष्ट्र को सुनाया था।

तो आखिर कैसे संजय इतनी दूर से महाभारत को इतनी सूक्ष्म दृष्टि से देख पाए क्या उस काल में यह सब के लिए संभव था या संजय के पास कोई शक्ति थी। तो आइये जानते है की आखिर संजय को ऐसी कौन सी विशेष योग्यता  प्राप्त थी जिससे वह महाभारत का युद्ध देख सके। लेकिन इस सब से पहले मैं आपसे पूछना चाहूंगी की क्या आप जानते है की आखिर संजय थे कौन अगर नहीं तो  पहले आइए जानते हैं संजय कौन थे ?

संजय धृतराष्ट्र की सभा के सदस्य थे उन्हें बहुत ही स्पष्ट वादी सदाचारी सत्यवादी निर्भय धर्म के पक्षपाती और भगवान कृष्ण के परम भक्त के रूप में देखा जाता है। धर्म का साथ देने वाले संजय धृतराष्ट्र की सभा के सदस्य होने के बावजूद भी पांडवों के प्रति सहानुभूति रखते थे।

ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि उन्होंने बहुत बार धृतराष्ट्र को उनके पुत्रों का पांडवों के प्रति व्यवहार को लेकर चेतावनी दी थी जब कौरवों द्वारा द्रौपदी का अपमान हुआ तब गुरु द्रोण और भीष्म पितामह ने कौरवों को रोकने का प्रयास किया। परंतु कौरवो ने किसी की बात नहीं मानी और भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया।

जब पांडव युद्धक्रीड़ा में कौरवों से हारकर वन में चले गए तब भी संजय ने धृतराष्ट्र को चेतावनी दी कि कौरवों के ऐसे असहिष्णु व्यवहार के कारण कौरवों का तो विनाश होगा ही साथ ही निर्दोष प्रजा भी व्यर्थ में ही मारी जाएगी।

अंत में संजय की बात सत्य हुई और महाभारत जैसे भयंकर युद्ध को नहीं रोका जा सका। क्योंकि धृतराष्ट्र अंधे थे युद्ध के आरंभ होने से पूर्व महृषि वेदव्यास ने धृतराष्ट्र से कहा कि युद्ध  देखने के लिए उन्हें दिव्य दृष्टि प्रदान कर सकते हैं परंतु धृतराष्ट्र को पता था कि उनके पुत्रों का विनाश निश्चित है। इसलिए उन्होंने दिव्य दृष्टि प्राप्त करने की बात को स्वीकार नहीं किया किन्तु वेद व्यास जानते थे कि धृतराष्ट्र अवश्य ही युद्ध के समय रणभूमि का हाल जानने के लिए व्याकुल होंगे इसलिए संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की जिससे न केवल प्रत्यक्ष रूप से हो रही है घटनाये अपितु मन में भी चिंतन की जाने वाली हर बात को जान सकते थे।

जब  युद्ध में भीष्म पितामह बाणों की शैया पर थे तब संजय ने धृतराष्ट्र को इसकी सूचना दी ध्रतराष्ट्र ये सुन शोकाकुल हुए और संजय से युद्ध का पूरा हाल पूछा। तब संजय ने पांडवों और कौरवों दोनों पक्षों की स्थिति का वर्णन किया और भगवान कृष्ण द्वारा दिया गया गीता का उपदेश धृतराष्ट्र को सुनाना आरंभ किया।

साथ ही सनी भगवान कृष्ण के यथार्थ स्वरूप का भी वर्णन करते हुए कहा कि संसार में जहां भी सत्य सरलता सहजता और धर्म का पालन होता है वहां श्री कृष्ण का वास अवश्य होता है।  और जहां भगवान कृष्ण है वह निस्संदेह विजय होती है।

तो दोस्तों  इस प्रकार महर्षि वेदव्यास द्वारा प्राप्त दिव्य शक्ति से संजय ने युद्ध का पूरा हाल ध्रतराष्ट्र को सुनाया।

Next Story