धर्म

एक अनोखा मंदिर जिसमे लोग करते है मेंढक की पूजा।

Janprahar Desk
13 July 2020 8:39 PM GMT
एक अनोखा मंदिर जिसमे लोग करते है मेंढक की पूजा।
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उत्तर प्रदेश के अनोखे मंदिरों में से एक है मेंढक मंदिर यह जितना नाम से अनोखा है उतनी ही इस मंदिर के निर्माण की कहानी रहस्यों से भरी है सबसे पहले बताते हैं कि मंदिर में किसकी पूजा होती है ?

दरअसल यहाँ पर भगवान शिव की पूजा होती है बताते हैं मंदिर से जुड़ी जानकारी के बारे में। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की  औयल कस्बे में स्थित इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि ये जगह ओयल शैव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र था और यहां के शासक भगवान शिव के उपासक थे।  इस कस्बे के बीच मंडूक यंत्र पर आधारित प्राचीन शिव मंदिर भी है। मेंढक मंदिर के शिवलिंग की खास बात यह है कि इसका रंग बदलता है यहां खड़ी नंदी की मूर्ति है जो आपको कहीं और देखने को नहीं मिलेगी।

बता दें की ये  क्षेत्र 11 वीं सदी से 19 वीं सदी तक चाहमान शासकों के अधीन था चाहमान वंश के राजा बक्श सिंह ने ही इस अनोखे मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि मंदिर करीब 200 साल पुराना है।

 मान्यता है कि सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था।  मेंढक मंदिर में दीपावली के आलावा महाशिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। मंदिर की दीवारों पर तांत्रिक देवी-देवताओं की मूर्तियां लगी हुई है मंदिर के अंदर भी कई विचित्र चित्र लगे हुए हैं जो मंदिर को शानदार रूप देते हैं।

 मंदिर के सामने मेंढक की मूर्ति है और पीछे भगवान शिव का पवित्र स्थल जो एक गुम्बद के साथ चौकोर आकार में बना हुआ है। कहते हैं कि इस मंदिर के वास्तु परिकल्पना कपिला के एक महान तांत्रिक ने की थी।  तंत्र वाद पर आधारित इस मंदिर के वास्तु संरचना अपनी विशेष शैली के कारण लोगों का मन मोह लेती है। पुरानी ऐतिहासिक कहानी को समेटे हुए यह मंदिर ओयल शैव साम्राज्य का एक केंद्र हुआ करता था। यहां के पीठासीन भगवान शिवजी है इसीलिए उत्तर प्रदेश के नर्मदेश्वर मंदिर भी कहा जाता है मेंढक मंदिर में हर रोज हजारों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं लेकिन दीपावली और महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा देखने लायक होता है। मान्यता है कि मंदिर में पूजा करने पर हर किसी की मनोकामना पूरी होती है और विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

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