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कहीं जाट आंदोलन की तरह न हो हश्र किसान आंदोलन का- भाकियू नेता की चेतावनी

Janprahar Desk
11 Dec 2020 4:04 PM GMT
कहीं जाट आंदोलन की तरह न हो हश्र किसान आंदोलन का- भाकियू नेता की चेतावनी
नई दिल्ली, 11 दिसंबर (आईएएनएस)। हरियाणा के किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को तोड़फोड़ नहीं करने की हिदायतें देते हुए उनसे अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और किसानों के प्रतिनिधियों की कमेटी में लिए गए सिर्फ तीन फैसलों पर ही अमल करें। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कुछ लोग अफवाह फैलाकर आंदोलन को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन पर उतरे किसानों को सचेत करते हुए कहा कि कहीं जाट आंदोलन की तहर ही किसान आंदोलन का हश्र न तो इसलिए प्रदर्शनकारी कहीं तोड़फोड़ न करें।

चढ़ूनी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से देशभर के किसानों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने की अपील की है। उन्होंने कहा, हमारी पंचायत में आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए तीन फैसले लिए गए हैं।

ये फैसले हैं:

1. रिलायंस की सीम पोर्ट करवाना है

2. देशभर में 12 दिसंबर को नौ बजे से लेकर शाम तक सारे टोल फ्री करवाना है और रोडजाम नहीं करना है।

3. देशभर में 14 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देना है।

चढ़ूनी ने कहा, हमें शिकायतें मिली हैं कि कुछ लोग अपनी मर्जी से रिलायंस के टावर काटने, रिलायंस के मॉल बंद करने या वहां कुछ और करने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों से इन अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, मेरी विनती है कि यह आंदोलन टूट न जाय और इसका हश्र जाट आंदोलन की तरह न हो, इसलिए ऐसा कोई कदम न उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करवाना चाहती है।

उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे उतना ही काम करें जितना कमेटी द्वारा कहा जाए। चढ़ूनी ने प्रदर्शनकारियों से सिर्फ कमेटी द्वारा दिए गए आदेशों व निदेशरें का पालन करने की अपील की।

उन्होंने कहा, आंदोलन के दौरान जो भी तोड़फोड़ करेगा या आगजनी करेगा वह हमारा आदमी नहीं होगा, उसको पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।

बता दें कि किसान संगठन केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन नये कानून, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को निरस्त करवाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वो 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 14 दिनों से डटे हुए हैं।

--आईएएनएस

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