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सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते लगी अस्थाई दुकानें

Janprahar Desk
7 Dec 2020 2:35 PM GMT
सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते लगी अस्थाई दुकानें
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सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते लगी अस्थाई दुकानें
सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते लगी अस्थाई दुकानेंसिंघु बॉर्डर (दिल्ली/हरियाणा), 7 दिसंबर (आईएएनएस)। कृषि कानून के खिलाफ 12वें दिन भी सिंघु बॉर्डर पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आए किसानों ने डेरा डाला हुआ है। वहीं आंदोलन की वजह से सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा के चलते पुलिस प्रशासन ने अपना पहरा बढ़ा दिया है। इसकी वजह से जहां आस पास मौजूद दुकानों पर काफी असर हुआ है, वहीं बॉर्डर पर किसानों की बड़ी संख्या होने की वजह से कुछ लोगों ने अपनी अस्थाई दुकानें भी लगा ली हैं।

दिल्ली निवासी फुरकान (बदला हुआ नाम) 7 सालों से अपने घर मे छोटी सी फैक्ट्री लगा कर खुद अपने हाथों से नेहरू कट जैकेट बना रहे हैं। बीते 5 सालों से पंजाब के जालंधर शहर के ज्योति पार्क में इन जैकेट को बेचने का काम कर रहे थे।

हालांकि सिंघु बॉर्डर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से फुरकान ने अपनी अस्थाई दुकान अब बॉर्डर पर ही लगा ली है।

वो बीते 3 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर रोजाना आते हैं और सड़क पर ही दुकान लगाकर नेहरू जैकेट बेचना शुरू कर देते हैं। आंदोलन में आए किसान भी नेहरू जैकेट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिसके चलते फुरकान की अच्छी कमाई हो रही है।

फुरकान ने बताया, बीते 3 दिनों से मैं यहां नेहरू जैकेट बेच रहा हूं। मैं पहले जालंधर शहर में दुकान लगाता था, लेकिन कोविड-19 की वजह से वहां नहीं जा सका। लेकिन किसानों के विरोध प्रदर्शन की वजह से यहां आ गया हूं।

बॉर्डर पर हो रहे प्रदर्शन में काफी संख्या में लोग आए हुए हैं। जिसके चलते लोग रुक रुक कर जैकेट देखते भी हैं और खरीद भी रहे हैं।

हालांकि फुरकान की दुकान के अलावा और भी अस्थाई दुकान सिंघु बॉर्डर पर लग गई हैं जिनपर हाथों के ग्लव्स, मास्क और अन्य सर्दियो के आइटम बेचे जा रहे हैं।

कई सालों से शकील नरेला में सर्दियों के जैकेट बेचा करते थे लेकिन जब से सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है उसको देखते हुए बीते 5 दिनों से बॉर्डर पर ही अस्थाई दुकान लगा रखी है। जिसपर सर्दियों के जैकेट बेचे जा रहे हैं।

फुरकान और शकील के मुताबिक जब तक यहां ये प्रदर्शन रहेगा तब तक हम अपनी दुकान लगाए रखेंगे।

-- आईएएनएस

एमएसके-एसकेपी

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