बंगाल में बीजेपी की साख को खतरा! दीदी के पाले में आने को तैयार कई भाजपा नेता

भले ही बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी पार्टी एक मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरी है, लेकिन ताजा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि भाजपा बंगाल में अपनी नैतिक साख नहीं बचा पाएगी।
 
Mamta and modi

भले ही बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी पार्टी एक मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरी है, लेकिन ताजा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि भाजपा बंगाल में अपनी नैतिक साख नहीं बचा पाएगी। राजनीतिक दमखम की लड़ाई में बीजेपी ने बंगाल में 77 सीटें तो जीत ली, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बीजेपी के कई नेता वापस टीएमसी के खेमे में जाना चाहते है। 

ये सारे वही नेता है जो पहले ममता बनर्जी के पार्टी में थे लेकिन 2021 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था और अब बीजेपी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब टीएमसी में वापसी का रास्ता तालाश रहे है। कई नेताओं ने तो इस बात का इशारा भी किया हैं। 

इन सब नेताओं में सबसे पहला नाम आता है बीजेपी नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय का, वो कई बार संकेतों के माध्यम से टीएमसी में जाने का संकेत दे रहे है। शनिवार को उन्होंने ममता का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल घड़ी में ममता दीदी ने उनके परिवार का हालचाल जाना इसके वो ममता दीदी के आभारी है। 

ऐसे कई नेता है जो फिर से टीएमसी का दामन थामना चाहते है। तो आइए एक नजर डालते है उन नेताओं पर..

मुकुल रॉय - कहा जाता है कि मुकुल रॉय के दम पर ही बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 18 सीट जीती थी। मुकुल रॉय ने 2017 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी जॉइन किया था। अब अटकलें लगाई जा रही है कि वह फिर से ममता बनर्जी के पार्टी में आ सकते हैं।

दीपेंदु विश्वास- विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन बीजेपी के खराब प्रदर्शन के कारण अब वो वापिस टीएमसी में आना चाहते है। उन्होंने तो खत के माध्यम से लिखा भी था कि उन्होंने पार्टी छोड़कर एक 'खराब फैसला' लिया और वापस लौटना चाहते हैं।  

सोनाली गुहा - सोनाली गुहा ने तो सोशल मीडिया के माध्यम से ममता बनर्जी से अपील की थी कि मुझे पार्टी में फिर से शामिल कर लिया जाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर सांझा किये गए पत्र में लिखा था- 'मैं टूटे हुए मन से यह लिख रही हूं कि मैंने भावुक होकर दूसरी पार्टी में शामिल होने का गलत फैसला लिया।'

सरला मुर्मू - सरला मुर्मू को तो विधानसभा चुनाव में टीएमसी की तरफ से टिकट भी मिला था, लेकिन वो अपने टिकट से नाखुश थी। इसलिए उन्होंने बीजेपी जॉइन कर लिया। लेकिन नतीजों के बाद उन्होंने फिर टीएमसी का दामन थामने की बात कहीं। उन्होंने कहा था कि अगर ममता दीदी मुझे माफ़ कर दे तो मैं पूरी लगन से काम करूंगी। 

अमोल आचार्य - अमोल आचार्य ने टिकट न मिलने के कारण पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने एक बार कहा था कि मैंने हमेशा ममता बनर्जी को अपना नेता माना है, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे नामांकन से वंचित कर दिया जाएगा। मैं परेशान होकर बीजेपी में शामिल हो गया। लेकिन अब अमोल आचार्य के सुर बदल गए है। हाल ही में अमोल आचार्य ने कहा, सीबीआई द्वारा टीएमसी नेताओं को प्रताड़ित करने के कारण वह भाजपा छोड़ रहे हैं। 

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