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फ्रीलांसरों के लिए टैक्स के क्या नियम हैं? जानें
अगर आप फ्रीलांसर के रूप में काम करते हैं और इससे आपकी अच्छी खासी कमाई होती है तो आप भी टैक्स के दायरे में आते हैं।अगर आप टैक्स की अदायगी करते हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद होता है। आइये जानते है कि भारत में फ्रीलांसर के लिए टैक्स के क्या नियम है?
फ्रीलांसर के लिए टैक्स नियम
एक फ्रीलांसर आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिए केवल ITR-3 या ITR-4 का विकल्प चुन सकता है।
एक फ्रीलांसर आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिए केवल ITR-3 या ITR-4 का विकल्प चुन सकता है।
बिजनेस इनकम के साथ, फ्रीलांस इनकम वाले करदाताओं के पास अपनी इनकम से ऐसे खर्चों को घटाने का विकल्प भी होता है जो फ्रीलांस काम करने के लिए किए जाते हैं।
आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत, फ्रीलांसर के रूप में काम करने वाले व्यक्ति प्रति वर्ष 1,50,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।
एक फ्रीलांसर 80D (स्वास्थ्य बीमा के लिए प्रीमियम), 80E (शिक्षा ऋण), और 80G (दान के लिए दान), आदि सहित विभिन्न टैक्स-बचत योजनाओं के तहत कटौती का क्लेम कर सकता है।
ग्राहक अक्सर फ्रीलांसरों को भुगतान की गई राशि से टीडीएस काट लेते हैं। लेकिन एक फ्रीलांसर अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इस काटे गए टीडीएस का क्लेम कर सकता है।
फ्रीलांसर IT रिटर्न कैसे दाखिल करें?
Step 1
Step 2
एक वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए सभी खर्चों में कटौती करें।
Step 3
उस वित्तीय वर्ष के लिए मूल्यह्रास राशि की गणना करें।
फ्रीलांसरों का टैक्स स्लैब
2.5 लाख रुपये से कम की वार्षिक आय को टैक्स से छूट दी गई है।
2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच आय वालों पर 10 प्रतिशत कर लगता है।
5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच आय वालों पर 20 प्रतिशत कर लगता है।
10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लगता है।
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