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नया जॉब कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले इन 8 बातों पर ध्यान जरूर दें
जब भी आपको नई नौकरी मिलती है तो ऐसा लगता है जैसे सब कुछ अच्छा होने लगा है। नई नौकरी मिलना और नए ऑफिस में जाना यकीनन एक अलग अहसास होता है। इसी के साथ महीने की सैलरी जब आपके अकाउंट में आती है तब भी ऐसा लगता है कि दुनिया मिल गई हो।
लेकिन कई बार सैलरी आने के बाद और नई नौकरी एक्सेप्ट करने के बाद हमें ये पता चलता है कि हमारे साथ नियमों के नाम पर कुछ धोखा सा हो रहा है। इसलिए नया जॉब कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले इन बातों पर जरूर ध्यान दें-
1. इन-हैंड सैलरी
सबसे पहले जिस चीज़ को लोग अपने ऑफर लेटर में देखते हैं वो होती है CTC (कॉस्ट टू कंपनी), आपकी सीटीसी और इन हैंड सैलरी में काफी अंतर हो सकता है। ध्यान रखें कि आप एचआर से अपनी सैलरी का पूरा ब्रेकअप ले लें ताकि महीने के आखिर में आपको शॉक ना लगे।
2. छुट्टियां
एचआर जो भी छुट्टियां आपको बताता है वो साल भर की छु्ट्टियां एक साथ मिलेंगी, कब से छुट्टियां ले सकते हैं? क्या साल के अंत में छुट्टी लैप्स (व्यर्थ) हो जाएगी? क्या छुट्टी को कैश करवा सकते हैं ये सारी बातें एचआर से पहले ही क्लियर कर लें।
3. HR पॉलिसीज
आप अपने ऑफर लेटर को एक्सेप्ट करने से पहले HR से पॉलिसीज के बारे में बात कर लें। सेक्शुअल हैरेस्मेंट, भेदभाव आदि के लिए कंपनी क्या करती है। कंपनी की पॉलिसीज के हिसाब से आपको क्या-क्या सुविधाएं दी जा सकती हैं।
4. सोशल सिक्योरिटी फायदे
कानून ये कहता है कि कंपनी को भी कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में हर महीने के हिसाब से कॉन्ट्रिब्यूशन देना होगा। आप इस पॉलिसी के बारे में भी एचआर से साफ कर लें। अधिकतर कंपनियां CTC का हिस्सा ही ये कॉन्ट्रिब्यूशन बना देती हैं।
5. नौकरी से निकाले जाने का क्लॉज
कई कंपनियां टर्मिनेशन क्लॉज और पॉलिसीज के बारे में लोगों को पहले से ही डिटेल्स नहीं देती हैं, लेकिन ये बहुत जरूरी है। एक तरह से देखा जाए तो ये आपके कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा होता है, लेकिन इसके बारे में लोगों पढ़ना जरूरी नहीं समझते हैं।
6. कॉन्फिडेंशिएलिटी क्लॉज
हर कंपनी का डेटा उनकी संपत्ति होती है और कई बार कंपनियां अपने कॉन्ट्रैक्ट में कॉन्फिडेंशिएलिटी क्लॉज भी शामिल करती हैं। इसमें ये शामिल होता है कि कर्मचारी कंपनी की पर्सनल जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं करेगा।
7. नॉन-कम्पीट क्लॉज
ये वो क्लॉज होता है जिसके बारे में लोगों को पता नहीं होता और कई लोग लीगल मैटर्स में फंस जाते हैं। इस क्लॉज के हिसाब से कंपनियां आपको अन्य बिजनेस में भी एक साथ काम करने से रोक सकती हैं।
8. बॉन्ड
ये एक ऐसा क्लॉज है जो बताता है कि आप कितने समय के लिए उसी कंपनी के साथ बंध गए हैं। दरअसल, ये क्लॉज आपको एक तय अवधि के लिए उसी संस्था से बांधकर रखेगा। बॉन्ड्स की वैलिडिटी को भी कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है।
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