क्या सच्ची पत्रकारिता से डर गई सरकार...! सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने के आरोप में दोनों सदनों का कार्यवाही ठप

 
पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिश

मानसून सत्र में दैनिक भास्कर ग्रुप पर सरकारी दबिश का मुद्दा विपक्ष ने जोर-शोर से उठाया है. विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में भास्कर ग्रुप पर इनकम टैक्स विभाग के छापों का विरोध किया और नारेबाजी की. इसके बाद सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया. इसके बाद कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन भारी हंगामे की वजह से सदन अब कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. लोकसभा में भी हंगामा हुआ, यहां फोन टैपिंग और जासूसी का मुद्दा भी उठाया गया. इसके बाद लोकसभा को 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया.

वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पत्रकारों और मीडिया हाउस पर हमले को लोकतंत्र को कुचलने कोशिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान भास्कर ने मोदी सरकार की लापरवाही को निडरता से दिखाया है. अब सरकार की सच्चाई पर पर्दा डालने की मंशा है. जिसके चलते पत्रकारिता को सरकारी दबिश दी जा रही है. 


बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देश के सामने सरकारी मिसमैनेजमेंट की असली तस्वीर रखने वाले दैनिक भास्कर ग्रुप के कई दफ्तरों पर गुरुवार तड़के इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा है. विभाग की टीमें दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान स्थित दफ्तरों पर पहुंची हैं और कार्रवाई जारी है.

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इसके साथ ही कांग्रेस का कहना है कि सच को निर्भीकता से उजागर कर रहे मीडिया समूह को दबाने की सरकार कोशिश में है. भास्कर ग्रुप पर दबिश के बाद कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ये देश के सच को निर्भीकता से उजागर कर रहे मीडिया समूह को दबाने की कोशिश है. उधर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी यह कहा कि छापे मीडिया को डराने का एक प्रयास है. लेकिन सच्ची पत्रकारिता को इनसे डरना नहीं चाहिए.

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