कोरोना के ट्रेंडिंग ग्राफ से वैज्ञानिकों की बढ़ रही टेंशन, भारत में मिल रही तीसरी लहर की आहट

 
Third wave

भारत में आई दूसरी लहर अब थामते हुए दिखाई दे रही है। लेकिन कोरोना के हालिया आंकड़ों ने तीसरी लहर के भयावय संकेत दिए है। देखा जाए तो पिछले कई हफ्तों से कोरोना के ग्राफ में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है लेकिन फिर पाजिटिविटी रेट में हुई मामूली वृद्धि वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब बन गए है। 

अगर कोविड के ट्रेंडिंग ग्राफ को समझा जाएं तो रोजाना नए संक्रमितों में गिरावट हुई है जबकि पाजिटिविटी रेट में थोड़ा इजाफा हुआ है। देश में साथ जुलाई को पाजिटिविटी रेट 2.27 प्रतिशत थी वहीं, वर्तमान में यह 2.37 प्रतिशत है। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह मात्र 0.10 प्रतिशत की वृद्धि है लेकिन यह पाजिटिविटी रेट कब छलांग लगाकर देश में हाहाकार मचा दें, कुछ कहा नहीं जा सकता है। 

दूसरी लहर के बाद समस्त राज्यों ने लॉकडाउन में ढील  दे दी है। लोगों को जबरदस्त भीड़ कोरोना को बढ़ाने का काम रही है। अगर यही आलम रहा तो रिसर्च रिपोर्ट की भविष्यवाणी सच साबित होगी। रिपोर्ट के अनुसार भारत में अगस्त महीने के दौरान COVID-19 की तीसरी लहर देखी जा सकती है। 

वहीं, SBI रिसर्च द्वारा यजी दावा किया गया है कि कोरोना के तीसरी लहर की पीक सितंबर के महीने में देखने को मिलेगी। अनुमान है कि तीसरी लहर के दौरान चरम कोविड-19 मामले महामारी की दूसरी लहर से लगभग दो या 1.7 गुना अधिक होंगे। 

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हाल ही में कोरोना मामलों पर एनालिसिस करने वाले सरकारी पैनल के वैज्ञानिकों ने एक संभावित अनुमान जताया है, जिसके मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर अक्टूबर-नवंबर पर अपने पीक पर पहुंच सकती है।

सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने कोरोना के बढ़ते मामलों का पूर्वानुमान लगाने के लिए इस पैनल का गठन किया था। यह पैनल गणितीय मॉडल के सहारे यह पता लगती है कि किस आधार पर कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है। 

वैज्ञानिकों ने तीन परिदृश्य के आधार पर भविष्यवाणी की है। तीन परिदृश्य हैं – आशावादी, मध्यवर्ती और निराशावादी।

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