फायदा या नुकसान? जानिए कैसा रहेगा किसानों के लिए इस साल का मानसून

इस साल मानसून ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत दिए है। भारत में 60 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर रहती है। खरीफ फसल मानसून की तीव्रता पर निर्भर होती है इसलिए मानसून का अब जल्दी से गति पकड़ना किसानों के लिए फायदेमंद है।
 
Mansoon

भले दो दिन की देरी ही सही पर मानसून ने भारत में दस्तक दे दी है। अब मानसून धीरे-धीरे उत्तर और मध्य भारत में दस्तक देने लगा है। इस साल मानसून ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत दिए है। भारत में 60 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर रहती है। खरीफ फसल मानसून की तीव्रता पर निर्भर होती है इसलिए मानसून का अब जल्दी से गति पकड़ना किसानों के लिए फायदेमंद है।

मालूम हो कि शरुआत में तो मानसून केरल में दो दिन की देरी से आया लेकिन बाद इसने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि भारत का आधा हिस्सा छह दिन में कवर हो गया। मौसम वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान किया है कि इस साल भारत में सामान्य मानसून रहेगा। इस साल मानसून के 96 से 104 फीसदी रहने की संभावना है। 

आंकड़ों के अनुसार इस साल मानसून ने साल 1901 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। साल 1901 में 107.9 मिमी बारिश हुई थी। वहीं, इस साल 1 से 9 जून के बीच 21 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ने केरल में 2 कई देरी से दस्तक दिया था लेकिन उसके बाद से इसने रफ्तार पकड़ी है तो उस हिसाब से 8 जुलाई तक मानसून पूरे भारत को कवर कर लेगा।  

वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मानसून उम्मीद से पहले ही दिल्ली पहुंच जाएगा क्योंकि अगले 48 घंटो में मानसून पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में पहुंचेगा। साथ ही यह उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी दस्तक देगा इसलिए पूरी उम्मीद है कि यह दिल्ली में समय से पहले ही दस्तक देगा। जबकि हर साल दिल्ली में मानसून जून के आखिरी में पहुंचता है। 

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