मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से दर्ज हुए राजद्रोह के सबसे ज्यादा मामले, देखिए आंकड़ें

 
What is Section 124A

सुप्रीम कोर्ट ने जब से राजद्रोह की धारा 124A का  जिक्र किया है तब से देश में एक नई बहस छिड़ गई है। शीर्ष अदालत ने इस धारा के प्रति गंभीर चिंता जाहिर करते हुए मौजूदा सरकार ने पूछा था कि अंग्रेजी हुकूमतों द्वारा जनता की आवाज को चुप कराने के लिए शुरू किए गए प्रावधान को खत्म क्यों नहीं किया जा रहा। 

राजद्रोह की धारा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी के बाद से विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय की इस टिप्पड़ी का स्वागत किया है। 

राजद्रोह की धारा के तहत दर्ज मामलों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो साफ झलकता है कि केंद्र सरकार अपने ऊपर उठने वाली आवाज को दबाने के लिए इस धारा का इस्तेमाल करके कई बेकसूरों को कसूरवार ठहरा रही है। जो बची कूची कसर रहती है वह हमारे देश की पुलिस पूरी कर देती है। नेताओं की शह में पुलिस किसी बेकसूर पर राजद्रोह का मुकदमा ऐसे ठोकती है जैसे उसे इसके लिए खुली छूट मिली है। 

हालिया आंकड़ों के अनुसार भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से राजद्रोह के तहत अधिक मुकदमे दर्ज हुए है। 2014 से 2019 के बीच इस धारा के तहत 326 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से महज छह लोगों को सजा दी गई। यह आंकड़ें गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए है। फिलहाल में 2020 के आंकड़े एकत्रित नहीं किए हैं। 

आंकड़ों में यह बात भी सामने आई है 2019 लोकसभा चुनाव के वक्त सबसे ज्यादा मामले इस धारा के तहत दर्ज किए गए है। कुल मिलाकर साल 2019 में इस धारा के तहत पुलिस ने 93 मामले दर्ज किए है।

वहीं, 2018 में 70, 2017 में 51, 2014 में 47, 2016 में 35 और 2015 में 30 मामले इस धारा के तहत दर्ज किए गए है। आंकड़े देखकर यही लगता है कि हर साल इस धारा का गलत उपयोग बढ़ता जा रहा है। वहीं, इन मामलों में जिन छह लोगों को दोषी ठहराया गया है। उनमें से 2 को 2018 में तथा एक-एक व्यक्ति को 2019, 2017, 2016 और 2014 में सजा सुनाई गई। 

यह भी पढ़ें: What is Uniform Civil Code in Hindi : क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड? विस्तार से जानिए

क्या है राजद्रोह कानून? (धारा 124A)

आईपीसी की धारा 124A की परिभाषा के अनुसार अगर कोई व्यक्ति संविधान को नीचा दिखाने की खातिर व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है। यह फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, जिसे राष्ट्र चिन्हों का अपमान हो तो उसके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा को व्यक्ति राष्ट्र विरोधी संगठन का सजयोग करता है तो  वह भी राजद्रोह के दायरे में आएगा। 

यह एक गैर जमानती अपराध है। इस मामले में आरोपी को 3 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। राजद्रोह में मामले में व्यक्ति का पासपोर्ट भी नष्ट कर दिया जाता है, व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए भी आवेदन नहीं कर सकता है।

अन्य खबरें

देश और दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए हमारे फेसबुक पेजको लाइक करे, हमे Twitterपर फॉलो करे, हमारेयूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कीजिये|