वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार से दिसंबर तक सबको लग जाएगी वैक्सीन?

 
वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार से दिसंबर तक सबको लग जाएगी वैक्सीन?


भारत सरकार ने देशव्यापी टिकाकरण का ऐलान करते हुए यह कहा था कि दिसंबर तक देश के सभी व्यक्तियों का वैक्सीनेशन हो जाएगा। लेकिन टिकाकरण की रफ्तार को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले साल दिसंबर तक प्रत्येक व्यक्ति वैक्सीनेट हो जाएगा। 

इस बीच तीसरी लहर ने और चिंताएं बढ़ा दी है, महाराष्ट्रा, केरल और दक्षिण राज्य के कुछ जिलों में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं, दुनिया के 126 ऐसे देश है जहां पर तीसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है। कई देशों में तो संक्रमितों की संख्या में 100 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

खैर भारत पर वापस आ जाते है, देश में 16 जनवरी से टिकाकरण अभियान की शुरुआत हुई है। 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत जाने के बाद भी अभी तक 40 करोड़ डोज ही लगाई जा चुकी है। यह भारत की आबादी का कुल 22 फीसदी हिस्सा ही है। वहीं, भारत मे अब तक कुल 6 फीसदी आबादी को ही दोनों डोज लग पाई है। 

शुरुआत में वैक्सीन लगाने का ठेका राज्यों को दिया गया था लेकिन उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 21 जून से देश में 18 साल से ऊपर के हर एक नागरिक को मुफ्त में कोरोना की वैक्सीन लगाने का ऐलान कर दिया। टिकाकरण को इवेंट के तौर पर और विश्व में अपनी ख्याति बनाने के लिए 21 जून को 86 लाख टीके लगाए भी गए, लेकिन उसके बाद सरकार अपने पुराने रवैये पर लौट आई।

भारत में अब तक कुल साढ़े 39 करोड़ टीके लगाएं जा चुके है। जिसमें से 7 करोड़ 92 लाख लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगी है। वहीं, 31 करोड़ 61 लाख लोगों को अभी एक डोज ही लग पाई है। 

देश में इस वक्त रोजाना औसत के हिसाब से 25 लाख डोज लगाए जा रहे। किसी दिन यह आंकड़ा 40 लाख पहुंच जाता है तो किसी दिन यह 12 लाख पर ही सिमट कर रह जाता है। 

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि देश मे दिसंबर के अंत तक सभी लोगों का वैक्सीनेशन का मिशन कैसे पूरा होगा? क्या सरकार के हवाहवाई बातों से जीती जाएगी कोरोना से जंग? 

जब कोरोना मई के महीने में पीक पर था तब केंद्र ने दावे के साथ कहा था कि दिसंबर तक देश को 216 करोड़ डोज मिल जाएगी, लेकिन अदालत में दाखिल हलफनामे में सरकार ने 81 करोड़ वैक्सीन की कटौती कर दी। 

केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया है कि दिसंबर तक 135 करोड़ डोज ही मिल पाएगी। सिर्फ यही नहीं सरकार ने अलग-अलग कंपनियों से मिलने वाली वैक्सीन से भी पलटी मार ली है। पहले सरकार ने कहा था कि देश में 8 तरह की वैक्सीन उपलब्ध होगी। वहीं, दायर हलफनामे में कहा गया है कि 5 तरह की ही वैक्सीन उपलब्ध होगी।

अब ऐसे में सरकार द्वारा कही गई बातों पर कैसे भरोसा किया जाए? ताजा आंकड़ों के मुताबिक 16 जुलाई तक प्रदशों को 41 करोड़ 10 लाख वैक्सीन डोज दी गई है। जिसमें से 38 करोड़ 39 लाख 2 हजार 614 वैक्सीन डोज लगाई गई है। राज्यों के पास अभी  2 करोड़ 51 लाख टीके ही मौजूद है। 

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दूसरा सच यह भी है कि कई राज्य ऐसे है जहां पर टिके की कमी है। इसीलिए उन्हें वैक्सीनेशन रोकना पड़ रहा है। बीजेपी शासित राज्य इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। गैर बीजेपी राज्य टीके की कमी का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ रही है। वहीं, केंद्र की दलील यह है कि राज्यों को पता रहता है कि उन्हें कितना टीका दिया जा रहा है। इसके बावजूद भी वह टीके पर राजनीति करते हैं। खैर केंद्र और राज्य के बहस के बीच आम जनता क्यों पीसे? आम जनता को उनके टीके के हक से महरूम नहीं किया सकता। 

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शीर्ष अदालत में बताया गया कि 31 जुलाई तक 51.6 करोड़ टीके लोगों को लगाए जा चुके होंगे। सरकार ने आगे की टीकाकरण नीति के लिए बताया कि अगस्त से दिसंबर के बीच 135 करोड़ कोविड वैक्सीन खरीदेगी। जिसमें 5 अलग अलग कंपनियों की वैक्सीन शामिल होगी। 

इन समीकरणों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि दिसंबर के अंत तक पूरी आबादी का टीकाकरण हो पाएगा। लेकिन सरकार को यह अभी भी लगता है कि वह अपने वादों को पूरा करने में कामयाब होगी। खैर वादा पूरा नहीं भी होता है तो सरकार की जवाबदेही किसी के प्रति नहीं बनती है।

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